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Explainer: आखिरकार क्रिकेट बोर्ड क्यों करते हैं खिलाड़ियों की NOC कैंसिल? जानिए अफगानिस्तान ने नूर अहमद को क्यों दी सजा

What is NOC in Cricket : क्रिकेट का खेल काफी पुराना है. आज दुनिया भर के लगभग आधे से ज्यादा देश क्रिकेट खेलते हैं. इनमें से लगभग 111 से अधिक देशों को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट बोर्ड (ICC) के द्वारा मान्यता प्राप्त है. ऐसे में वो क्रिकेट आईसीसी के नियमों के मुताबिक खेलते हैं. ये सभी देश उन नियमों का पालन करते हैं, जो क्रिकेट की सबसे बड़ी निकाय आईसीसी के द्वारा बनाए गए हैं. 

क्रिकेट में हर देश का अपना एक क्रिकेट बोर्ड होता है, जो उस देश के द्वारा ही संचालित किया जाता है. जैसे कि भारत का क्रिकेट बोर्ड बीसीसीआई है, जो इंडिया में क्रिकेट से जुड़े हर फैसले लेता है. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) टीम इंडिया के साथ-साथ घरेलू क्रिकेट में खेलने वाले खिलाड़ियों के हितों का भी ख्याल रखता है. 

क्रिकेट के सबसे बड़े नियमों में से एक एनओसी (NOC) का नियम है. अब आपको मन में सवाल आ रहा होगा कि, क्रिकेट तो बैट और बॉल का खेल है. इसमें गेंद और बल्ले के बीच जंग देखने के लिए मिलती है लेकिन क्रिकेट में एनओसी क्या है. ये क्या होता है. ये किस तरह काम करता है और इसका प्रभाव क्रिकेटर्स पर किस प्रकार पड़ता है. अगर आप भी ऐसा सोच रहे हैं तो आज हम आपको क्रिकेट में क्या होती है? 

इसके साथ ही खिलाड़ियों के लिए एनओसी क्रिकेट बोर्ड से पाना क्यों जरूरी होता है? एनओसी क्रिकेट बोर्ड क्रिकेटर्स को क्यों देता है? खिलाड़ियों की एनओसी बोर्ड द्वारा क्यों रद्द की जाती है? आज हम आपको इस सभी के बारे में बताने वाले हैं. इसके साथ ही अफगानिस्तान के क्रिकेटर नूर अहमद के साथ हुए ताजा मामले के बारे में भी बताने वाले हैं, जो एनओसी से ही जुड़ा हुआ है. 

क्रिकेट में क्या होती है एनओसी?

क्रिकेट में एनओसी (NOC) का मतलब नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (No Objection Certificate) होता है. इसे अनापत्ति प्रमाणपत्र हिंदी में कहा जाता है. ये पूरी तरह से आधिकारिक अनुमति पत्र होता है, जो क्रिकेट बोर्ड द्वारा अपने खिलाड़ियों को देश के अलावा किसी अन्य देश में जाकर खेलने के लिए दिया जाता है. इस एनओसी पत्र के द्वारा किसी खिलाड़ी को क्रिकेट बोर्ड या राज्य क्रिकेट संघ यह प्रमाणित करता है कि उसे किसी दूसरी टीम, राज्य या विदेशी टूर्नामेंट में खेलने पर कोई आपत्ति नहीं है. इस स्थिति में आईपीएल समते तमाम विदेशी लीगों में भी खिलाड़ियों को खेलने के लिए उनके बोर्ड के द्वारा एनओसी दी जाती है.

उदाहरण के लिए मान लीजिए कि, कोई खिलाड़ी भारत का है और वो इंग्लैंड की काउंटी क्रिकेट या किसी विदेशी टी20 लीग में खेलना चाहता है. तब उसका घरेलू क्रिकेट बोर्ड यह जांचता है कि खिलाड़ी को अनुमति दी जा सकती है या नहीं. वो खिलाड़ी बगैर एनओसी मिले वहां जाकर क्रिकेट नहीं खेल सकता है. एनओसी मिलने पर ही वो खिलाड़ी आधिकारिक रूप से उस प्रतियोगिता में खेल सकता है. 

क्रिकेट बोर्ड से एनओसी पाना क्यों जरूरी होता है?

आपको बता दें कि, एनओसी सिर्फ एक कागज नहीं है, बल्कि क्रिकेट बोर्ड द्वारा अपने खिलाड़ी को मिलने वाला आधिकारिक अनुमति पत्र होता है. इसके पाने के बाद ही खिलाड़ी का दूसरी प्रतियोगिता में खेलना उसके राष्ट्रीय या घरेलू दायित्वों से नहीं टकराता है. भारत में कई खिलाड़ी अपनी घरेलू टीम बदलते हैं, ऐसे में उन्हें अपने क्रिकेट बोर्ड से एनओसी लेनी पड़ती है. ऐसे क्रिकेटर्स में पृथ्वी शॉ, अर्जुन तेंदुलकर, शशांक शर्मा, करुण नायर जैसे नाम शामिल हैं. 

  • राष्ट्रीय टीम की उपलब्धता - अगर खिलाड़ी को देश के लिए खेलना है, तो बोर्ड पहले राष्ट्रीय कार्यक्रम को प्राथमिकता देता है.
  • घरेलू टूर्नामेंट की प्रतिबद्धता -  कई बोर्ड चाहते हैं कि खिलाड़ी अपने घरेलू सीजन में टीम के लिए उपलब्ध रहें.
  • अनुबंध और नियम -  केंद्रीय अनुबंध या घरेलू अनुबंध वाले खिलाड़ियों पर अलग शर्तें लागू हो सकती हैं.
  • आधिकारिक मान्यता - आईसीसी के नियमों के तहत कई विदेशी प्रतियोगिताओं में घरेलू बोर्ड की अनुमति आवश्यक होती है.

क्रिकेट बोर्ड खिलाड़ियों को एनओसी क्यों देता है?

क्रिकेट बोर्ड खिलाड़ियों को एनओसी बाहर विदेशी लीग और प्रतियोगिताओं में खेलने के लिए देता है. इस दौरान बोर्ड सबसे पहले ये देखता है कि क्या इससे हमारी क्रिकेट का कोई नुकसान तो नहीं हो रहा है. खिलाड़ी के एनओसी पाकर बाहर खेलना का कोई असर हम पर तो नहीं पड़ रहा है. अगर घरेलू सीजन नहीं चल रहा है या वो राष्ट्रीय टीम के लिए नहीं खेल रहा है तो क्रिकटो बोर्ड उन्हें एनओसी विदेशी लीग और अपनी टीम बदलने के लिए देता है. 

  • खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम की ड्यूटी पर नहीं है, तो उसे एनओसी दी जाएगी.
  • घरेलू क्रिकेट की जिम्मेदारियों से टकराव नहीं हो रहा, तो उसे एनओसी दी जाएगी.
  • विदेशी लीग या काउंटी क्रिकेट निर्धारित समय में हो रही है, तो उसे एनओसी दी जाएगी.
  • खिलाड़ी ने बोर्ड की सभी अनुबंध शर्तों का पालन किया है, तो उसे एनओसी दी जाएगी.

खिलाड़ी की एनओसी बोर्ड द्वारा रद्द क्यों की जाती है?

क्रिकेट बोर्ड के द्वारा एनओसी जारी होने के बाद भी कुछ परिस्थितियों में उसे निलंबित या रद्द किया जा सकता है. हालांकि हर बोर्ड के अपने नियम होते हैं. इसलिए कारण अलग-अलग हो सकते हैं. वहीं कुछ क्रिकेट बोर्ड खिलाड़ियों को एनओसी देते ही नहीं है. कुछ क्रिकेट बोर्ड बहुत गंभीर स्थिति में ही अपने खिलाड़ियों की एनओसी प्रदान करते हैं. 

  • राष्ट्रीय या घरेलू ड्यूटी आ जाना - क्रिकेट खिलाड़ी को अचानक राष्ट्रीय टीम या महत्वपूर्ण घरेलू टूर्नामेंट के लिए जाना है तो ऐसे में क्रिकेट बोर्ड उसकी एनओसी वापस ले सकता है और उससे पहले राष्ट्रीय ड्यूटी करने की कह सकती है. 
  • बोर्ड की नीति में बदलाव - कुछ खास स्थितियों में बोर्ड के निमय बिल्कुल अलग होते हैं. कभी-कभी बोर्ड विदेशी लीगों को लेकर अपनी नीति बदल देता है और पहले दी गई अनुमतियों को निलंबित कर सकता है.
  • अनुबंध या अनुशासन संबंधी कारण - खिलाड़ी अनुबंध की शर्तों या बोर्ड के नियमों का उल्लंघन करता है, तो कार्रवाई हो सकती है. ऐसे में उसकी एनओसी रद्द की जा सकती है.
  • खिलाड़ी की उपलब्धता बदल जाना - किसी खिलाड़ी के अचानक टूर्नामेंट के लिए उपलब्ध नहीं होनी की स्थिति में भी एनओसी रद्द की जा सकती है. चोट, चयन या कार्यक्रम में बदलाव जैसी परिस्थितियां भी एनओसी रद्द की जा सकती है.

 

एसीबी ने नूर अहमद की एनओसी की रद्द

कैरेबियन प्रीमियर लीग (सीपीएल) 2026 में सेंट लूसिया किंग्स की ओर से अफगानिस्तान के बाएं हाथ के स्पिनर नूर अहमद सीपीएल में खेलने वाले थे. लेकिन अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड (एसीबी) ने नूर अहमद एनओसी नहीं दी है. बोर्ड ने उनका नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) रद्द कर दिया है. इसके बाद सेंट लूसिया किंग्स ने नूर अहमद के विकल्प के रूप में न्यूजीलैंड के सलामी बल्लेबाज और विकेटकीपर टिम सीफर्ट को साइन किया है. वहीं नूर अहमद अब सीपीएल 2026 से बाहर हो गए हैं. अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने उनकी एनओसी क्यों रद्द की है. इस बारे में कुछ भी जानकारी अब तक सामने नहीं आ पाई है.

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कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार का 80 वर्ष की उम्र में निधन, उम्रकैद की काट रहे थे सजा

कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार का गुरुवार को निधन हो गया. बताया जा रहा है कि 80 वर्षीय कांग्रेस के पूर्व नेता को मृत अवस्था में सफदरजंग अस्पताल लाया गया था. बता दें कि 1984 के सिख विरोधी दंगों के दो मामलों में कोर्ट ने उन्हें उम्र कैद की सजा सुनाई थी. उसके बाद से वे दिल्ली की तिहाड़ जेल में सजा काट रहे थे.

दिल्ली हाईकोर्ट ने 2018 में सुनाई थी उम्रकैद की सजा

बता दें कि कांग्रेस के पूर्व नेता सज्जन कुमार तीन मामलों में से एक में बरी हुए थे. जबकि कोर्ट ने उन्हें दो मामलों में दोषी ठहराया था. ये मामले 1984 के सिख विरोधी दंगों के थे. उस दौरान दिल्ली कैंट की पालम कॉलोनी में 5 सिखों की हत्या के बाद एक गुरुद्वारे में आग लगा दी गई थी. इस मामले में सज्जन कुमार को दोषी ठहराया गया था. 17 दिसंबर 2018 को दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई थी.

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