जीतू पटवारी ने सीएम डॉ. मोहन यादव से की शिक्षा व्यवस्था की समीक्षा की मांग, कहा “कांग्रेस सकारात्मक सहयोग के लिए तैयार”
मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की व्यापक और गंभीर समीक्षा कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में शिक्षा के हर स्तर पर अब गंभीरता से विचार करने और ठोस सुधार की जरूरत है।
कांग्रेस नेता ने सोशल मीडिया पर लिखी पोस्ट में कहा कि दतिया विधानसभा उपचुनाव के जनादेश ने भाजपा सरकार को यह संदेश दिया है कि जनता सिर्फ वादे नहीं बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही और परिणाम चाहती है। उन्होंने बताया कि इसी भावना के साथ उन्होंने 4 अगस्त को पत्र लिखकर प्रदेश की बुनियादी चुनौतियों पर तथ्य आधारित सार्वजनिक संवाद और श्वेत-पत्र की परंपरा शुरू करने का आग्रह भी किया था।
शिक्षा के विभिन्न क्षेत्रों में समीक्षा की मांग
जीतू पटवारी ने शिक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए कई प्रमुख क्षेत्रों को चिन्हित किया है। इनमें आंगनवाड़ी एवं प्रारंभिक शिक्षा, सरकारी स्कूलों में घटता नामांकन, शिक्षकों की कमी, प्रशिक्षण एवं गुणवत्ता, विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता और परीक्षा व्यवस्था शामिल हैं। उन्होंने उच्च शिक्षा, विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की स्थिति के साथ-साथ तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता, डिजिटल शिक्षा और ग्रामीण-शहरी डिजिटल अंतर की समीक्षा कराने की मांग भी की है। साथ ही छात्रों से जुड़ी छात्रवृत्ति और फीस की आर्थिक कठिनाइयों, रोजगार से जुड़ी शिक्षा एवं कौशल विकास तथा शोध और नवाचार की स्थिति को भी समीक्षा के दायरे में शामिल करने की अपील की ।
विशेषज्ञों, शिक्षकों और विद्यार्थियों से संवाद की ज़रूरत बताई
कांग्रेस नेता ने मुख्यमंत्री से कहा कि सरकार को शिक्षा को सिर्फ एक विभाग के रूप में नहीं बल्कि प्रदेश के भविष्य की बुनियाद के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने विशेषज्ञों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों से संवाद कर शिक्षा व्यवस्था की कमियों और सुधार की संभावनाओं को समझने की जरूरत बताई। उन्होंने समयबद्ध और लक्ष्य आधारित कार्ययोजना तैयार करने तथा उसकी प्रगति की जानकारी जनता के सामने रखने की मांग भी की है।
सकारात्मक विपक्ष की भूमिका निभाने की बात कही
जीतू पटवारी ने कहा कि कांग्रेस रचनात्मक और सकारात्मक विपक्ष की भूमिका में सरकार के उन सभी कदमों में सहयोग करने के लिए तैयार है जिनसे मध्यप्रदेश के बच्चों और युवाओं का भविष्य बेहतर हो सके। उन्होंने कहा कि अब आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर तथ्यों पर बात करने और समाधान खोजने की जरूरत है।
जबलपुर के बाल सुधार गृह में नाबालिग से मारपीट, पैसे नहीं दिए तो हाथों पर ब्लेड से लगाए कट, सर्चिंग में मिला प्रतिबंधित सामान
जबलपुर में चल रहे एक बाल संप्रेषण गृह से हैरान करने वाली खबर सामने आई है। दरअसल यहां नाबालिगों की एक गैंग चल रही है, जो यहां आने वाले नए बच्चों से वसूली और मारपीट करती है। अक्सर ऐसी खबरें जेल के कैदियों के बारे में सुनने में आती है लेकिन इस बार जबलपुर के गोकलपुर बाल सुधार गृह से सामने आए इस मामले ने चिंता बढ़ा दी है।
दरअसल हाल ही में इस बाल सुधार गृह से बाहर आए एक 17 वर्ष नाबालिग ने अपने परिजनों को इस बारे में जानकारी दी है कि उससे हर हफ्ते 1000 रुपए मांगे गए। जब पैसे नहीं दिए तो उसके हाथ और शरीर पर ब्लेड से कट लगाया गया और मारपीट भी की गई। जब शिकायत के बाद सुधार घर की सर्चिंग की गई तो यहां से दो मोबाइल फोन, गुटका और गांजा जैसी प्रतिबंधित सामग्री भी मिली है।
नाबालिग ने खोला राज
इस पूरे मामले की जानकारी तब सामने आई जब जबलपुर के बेलखेड़ा इलाके में रहने वाला एक 17 वर्ष से नाबालिग, जो लूट और पिस्टल रखने के मामले में 10 अगस्त को पकड़ा गया था। वो 19 अगस्त को जमानत पर बाहर आया। बाहर आने के बाद उसने अपने पिता को सुधार घर की स्थिति के बारे में बताया। नाबालिग के मुताबिक यहां लगभग 10-12 लड़कों का समूह है। यहां नए और कमजोर बच्चों को इस समूह की बात माननी पड़ती है, विरोध करते हैं तो मारपीट की जाती है। नाबालिक ने अपने दोनों हाथों पर ब्लेड से लगे हुए कट दिखाए और एक जगह तो उसके हाथ पर एक लड़के ने अपना नाम भी लिख दिया है।
रहने के लिए देना पड़ते हैं पैसे
इस मामले में नाबालिग के पिता ने ये आरोप लगाया है कि 12 अगस्त को बाल सुधार घर से उनके पास फोन आया था। बेटे ने बताया कि अंदर रहने वाले लड़कों ने कहा है कि अगर सुरक्षित रहना है तो घर से 1 हजार रुपए मंगाओ। पिता के मुताबिक उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया और इसके बाद बेटे के साथ मारपीट की गई है और दोनों हाथों पर ब्लेड से कट लगाए गए हैं। बेटे के शरीर पर चोट के निशान भी दिखाई दे रहे हैं। पिता का कहना है कि बेटे के हाथ पर एक नहीं कई कट है शरीर पर कई जगह निशान है। उन्होंने अधिकारियों से कार्रवाई करने की मांग की है।
प्रबंधन का क्या कहना
बच्चों के साथ में मारपीट और ब्लेड के कट के बारे में बात सुधार घर के अधीक्षक शैलेश कुमार और सहायक अधीक्षक अरुण कुमार का कहना है तो शिकायत मिलने के बाद तुरंत ही जांच की गई थी। उन्होंने बच्चों के साथ मारपीट और हाथ पर कट लगाए जाने के बाद स्वीकार करते हुए कहा है की कट शार्पनर की ब्लेड निकल कर लगाए गए थे। प्रबंधन का कहना है कि बच्चों को पढ़ाई के लिए कॉपी किताब के साथ पेन पेंसिल और शार्पनर जैसी सामग्री दी जाती है। इस घटना में शार्पनर की ब्लड का इस्तेमाल किया गया है। घटना के बाद बाल सुधार घर प्रबंधन समिति की ओर से बाल न्यायालय को पत्र भेज कर मामले की जानकारी दी गई है। परिवार की तरफ से भी बाल सुधार घर और कोर्ट में शिकायत की गई है। अब कोर्ट के निर्देश के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सर्चिंग में मिला प्रतिबंधित सामान
शिकायत सामने आने के बाद जब बाल सुधार गृह की जांच की गई तो इस दौरान कई प्रतिबंधित सामान बरामद हुए। प्रबंधन ने यहां से दो मोबाइल फोन, गुटका और कुछ प्रतिबंधित सामान पकड़े हैं। इस बात की जांच की जा रही है कि आखिरकार प्रतिबंधित सामान अंदर कैसे पहुंचा और इसका इस्तेमाल कौन कर रहा था।
बच्चों की सुरक्षा पर सवाल
गोकलपुर बाल सुधार घर में लगभग 50 नाबालिग रह रहे हैं। इनकी उम्र 16 से 17 साल के बीच है। कई बच्चे ऐसे हैं जिनका अलग-अलग अपराधों में पहले भी यहां पर आना-जाना देखने को मिला है। जो मामला सामने आया है वह केवल एक नाबालिग तक सीमित नहीं है बल्कि इससे सुधार घर में रहने वाले अन्य बच्चों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। जहां बच्चों को सुधारने और सुरक्षित माहौल दिया जाना चाहिए वहां बच्चे गैंग बनाकर पैसे मांगने और मारपीट जैसे काम कर रहे हैं।
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