Toxic Advance Booking: रिलीज से पहले ही यश की 'टॉक्सिक' ने मचाई तबाही, इन करोड़ के बेच डाले टिकट
Toxic Advance Booking: कन्नड़ सुपरस्टार यश (Yash) की फिल्म 'टॉक्सिक: एक फेयरीटेल फोर ग्रोन अप्स' इस साल की मचअवेटेड फिल्मों में से एक है. लंबे समय से फैंस इसका बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, जो जल्द ही खत्म होने वाला है. फिल्म रिलीज होने में करीब 6 दिन बाकि है और इसने पहले ही कमाई करना शुरू कर दिया है. गीतू मोहनदास के डायरेक्शन में बनी इस क्राइम-थ्रिलर-एक्शन फिल्म ने कितनी कमाई कर ली और इसकी एडवांस बुकिंग कब शुरू होगी, चलिए जानते हैं.
रिलीज से पहले टॉक्सिक का धमाल
'टॉक्सिक' की विदेश में एडवांस बुकिंग शुरू हो गई है. अमेरिकी बॉक्स ऑफिस ट्रैकर ‘वेंकी बॉक्स ऑफिस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘टॉक्सिक’ की नॉर्थ अमेरिका में एडवांस बुकिंग को जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है. फिल्म ने प्रीमियर से 6 दिन पहले ही 1,20,000 डॉलर का आंकड़ा पार कर लिया है. रिपोर्ट के अनुसार, 204 लोकेशन और 589 शोज में अब तक 1,21,258 डॉलर यानी करीब 1.16 करोड़ रुपये की बुकिंग हो चुकी है. वहीं, नॉर्थ अमेरिकन मार्केट में फिल्म के 5,550 से ज्यादा टिकट बिक चुके हैं. बताया जा रहा है कि फिल्म की एडवांस बुकिंग से हर दिन करीब 10,000 डॉलर की कमाई कर रही है.
सबसे ज्यादा कहां से हुई कमाई?
अमेरिका में ‘टॉक्सिक’ की एडवांस बुकिंग का क्रेज कई राज्यों में देखने को मिल रहा है. इसमें टेक्सास सबसे आगे है, जहां 157 शोज के लिए करीब 1,984 टिकट बिक चुके हैं और फिल्म ने लगभग 47 हजार डॉलर की कमाई कर ली है. वहीं कैलिफोर्निया दूसरे नंबर पर है, जहां 888 टिकटों की बिक्री से करीब 19,244 डॉलर का कलेक्शन हुआ है. इसके अलावा जॉर्जिया, वॉशिंगटन और न्यू जर्सी में भी फिल्म की प्री-सेल्स अच्छी चल रही हैं और इन सभी जगहों से 4 हजार डॉलर से ज्यादा की कमाई हो चुकी है. वहीं अमेरिकी थिएटर चेन की बात करें तो सिनेमार्क सबसे आगे है, जहां अकेले फिल्म के शोज की एडवांस बुकिंग करीब 98,128 डॉलर तक पहुंच गई है.
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100 करोड़ की ओपनिंग कर सकती है फिल्म
‘टॉक्सिक’ की एडवांस बुकिंग को मिल रहे रिस्पॉन्स को देखते हुए फिल्म की ओपनिंग को लेकर भी बड़ी उम्मीदें जताई जा रही हैं. यश स्टारर इस फिल्म के जबरदस्त क्रेज और खासकर नॉर्थ अमेरिका में मजबूत प्री-सेल्स को देखते हुए माना जा रहा है कि ‘टॉक्सिक’ भारत में पहले दिन 100 करोड़ रुपये के आसपास या उससे ज्यादा की कमाई कर सकती है।.अगर फिल्म का ये आंकड़ा आता है, तो यश के करियर के साथ-साथ भारतीय बॉक्स ऑफिस पर भी ये एक बड़ी ओपनिंग साबित होगी. हालांकि, फिल्म की असली कमाई रिलीज के बाद दर्शकों के रिस्पॉन्स और वर्ड ऑफ माउथ पर निर्भर करेगी.
भारत में कब शुरू होगी एडवांस बुकिंग?
बता दें, फिलहाल भारत में ‘टॉक्सिक’ की एडवांस बुकिंग शुरू नहीं हुई है. मेकर्स 21 अगस्त, 2026 से फिल्म के टिकटों की बिक्री शुरू करने की तैयारी में हैं, यानी 26 अगस्त की रिलीज से करीब पांच दिन पहले दर्शक अपनी सीट बुक कर सकेंगे. फिल्म के क्रेज को देखते हुए कुछ जगहों पर टिकट के दाम सामान्य से ज्यादा रखे जाने की उम्मीद है. वहीं, फिल्म की स्टारकास्ट की बात करे तो यश के अलावा फिल्म में नयनतारा-गंगा, कियारा आडवाणी-नादिया, हुमा कुरैशी-एलिजाबेथ, रुक्मिणी वसंत-मेलिसा और तारा सुतारिया-रेबेका का किरदार निभा रही हैं.
कब रिलीज होगी ‘Toxic’?
फिल्म टॉक्सिक की रिलीज की बात करे तो ये फिल्म 26 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है. फिल्म हिंदी, कन्नड़ समेत कई भाषाओं में दर्शकों तक पहुंचेगी. ‘KGF’ के बाद यश एक बार फिर बड़े पर्दे पर एक बिल्कुल अलग और डार्क अवतार में नजर आने वाले हैं. ऐसे में फैंस इसे लेकर बेहद एक्साइटेड हैं. अब देखना होगा कि 26 अगस्त को सिनेमाघरों में पहुंचने के बाद ‘Toxic’ की ये दुनिया दर्शकों को कितनी पसंद आती है.
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भारत में बैटरी स्टोरेज समर्थित नवीकरणीय ऊर्जा लागत के मामले में नए कोयले से बेहतर साबित हो सकते हैं: अध्ययन
वॉशिंगटन, 20 अगस्त (आईएएनएस)। एक नए अध्ययन में दावा किया गया है कि बैटरी स्टोरेज द्वारा समर्थित नवीकरणीय ऊर्जा भारत में नए कोयला-आधारित बिजली संयंत्रों की तुलना में कम लागत पर चौबीसों घंटे विश्वसनीय बिजली उपलब्ध करा सकती है। अमेरिका के कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले के अध्ययन के अनुसार, यह मॉडल भारत के ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकता है और स्वच्छ ऊर्जा को प्रतिस्पर्धी विकल्प के रूप में स्थापित कर सकता है।
अध्ययन में भारतीय सौर ऊर्जा निगम यानी सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एसईसीआई) द्वारा आयोजित 1,000 मेगावाट क्षमता की एक महत्वपूर्ण नीलामी का विश्लेषण किया गया, जिसके परिणामस्वरूप 25 वर्षों के लिए नाममात्र शर्तों में 5.25 रुपए प्रति किलोवाट-घंटे का टैरिफ तय किया गया।
शोधकर्ताओं ने कहा कि इस परिणाम ने साबित किया है कि बैटरी स्टोरेज के साथ नवीकरणीय ऊर्जा संयोजन कोयला-आधारित बिजलीघरों जैसी निरंतर और भरोसेमंद बिजली आपूर्ति देने में सक्षम है, जो ईंधन की कीमतों में भविष्य में होने वाली वृद्धि के जोखिम के बिना भारत के मौजूदा कोयला संयंत्रों के प्रदर्शन से काफी हद तक मेल खाती है।
इंडियाज रिन्यूएबल एनर्जी ब्रेकथ्रू: कोल-लाइक रिलायबिलिटी ऐट अ लोअर, फिक्स्ड प्राइस शीर्षक से प्रकाशित यह अध्ययन विश्वविद्यालय के इंडिया एनर्जी एंड क्लाइमेट सेंटर द्वारा तैयार किया गया है।
नीलामी की संरचना इस प्रकार बनाई गई थी कि शाम, रात और सुबह के समय अधिकतम बिजली उपलब्ध कराई जाए, जबकि दिन में जब सौर ऊर्जा प्रचुर मात्रा में उपलब्ध रहती है, तब आपूर्ति की आवश्यकता अपेक्षाकृत कम रखी जाए। उत्पादकों के लिए यह अनिवार्य किया गया कि वे खरीदार द्वारा चुने गए छह पीक घंटों में कम से कम 90 प्रतिशत अनुबंधित क्षमता उपलब्ध कराएं। अन्य गैर-सौर घंटों में यह सीमा 70 प्रतिशत और सौर घंटों के दौरान 50 से 60 प्रतिशत निर्धारित की गई।
अनुबंध की शर्तों के अनुसार, हर 15 मिनट के ब्लॉक में प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाएगा। यदि निर्धारित आपूर्ति में कमी रहती है, तो अनुबंध मूल्य के डेढ़ गुना के बराबर जुर्माना लगाया जाएगा।
शोधकर्ताओं ने 10 भारतीय राज्यों के 10 वर्षों के प्रति घंटा मौसम आंकड़ों का उपयोग करते हुए यह जांचा कि क्या सौर ऊर्जा और बैटरी भंडारण इस व्यवस्था की आवश्यकताओं को आर्थिक रूप से पूरा कर सकते हैं।
अध्ययन में पाया गया कि प्रत्येक 1,000 मेगावाट अनुबंधित क्षमता के लिए राजस्थान जैसे उच्च सौर क्षमता वाले राज्यों में लगभग 3 गीगावाट सौर ऊर्जा क्षमता और 12 गीगावाट-घंटे बैटरी भंडारण की आवश्यकता होगी। जिन राज्यों में मानसून या सौर संसाधनों की स्थिति अलग है, वहां करीब 15 से 20 प्रतिशत अधिक सौर क्षमता की जरूरत हो सकती है, लेकिन बैटरी भंडारण की आवश्यकता लगभग समान रहेगी।
अध्ययन के प्रमुख लेखक और केंद्र में मॉडलिंग एवं विश्लेषण निदेशक उमेद पालीवाल ने कहा कि भारत की भौगोलिक स्थिति इस मॉडल के लिए बहुत अनुकूल है।
उन्होंने कहा, भारत की भूमध्य रेखा के निकट स्थिति के कारण यहां साल भर सौर ऊर्जा उत्पादन में मौसमी उतार-चढ़ाव अपेक्षाकृत कम रहता है। यूरोप जैसे उच्च अक्षांश वाले देशों में सर्दियों के दौरान उत्पादन में बड़ी गिरावट आती है, जबकि भारत की मुख्य चुनौती दिन में मिलने वाली प्रचुर सौर ऊर्जा को शाम और रात के समय के लिए संरक्षित करना है, जो आधुनिक और कम लागत वाली बैटरियों के माध्यम से संभव है।
इस नीलामी में 16 कंपनियों ने भाग लिया था और सात डेवलपर्स को क्षमता आवंटित की गई। उल्लेखनीय बात यह रही कि सभी सफल बोलियां 5.25 से 5.26 रुपए प्रति यूनिट के बेहद संकीर्ण दायरे में रहीं।
अध्ययन के सह-लेखक निकित अभ्यंकर ने कहा कि यह मूल्य भारत में सौर और बैटरी प्रौद्योगिकी की लागत में आई भारी गिरावट को दर्शाता है। उन्होंने कहा, यह किसी एक आक्रामक बोलीदाता का मामला नहीं है। सात विजेता केवल एक पैसे के अंतर में रहे, जिससे स्पष्ट होता है कि 5.25 रुपए प्रति यूनिट अब स्थिर और विश्वसनीय नवीकरणीय ऊर्जा की बाजार-आधारित कीमत बनती जा रही है।
शोधकर्ताओं का मानना है कि यह मॉडल भारत की बिजली वितरण कंपनियों की भविष्य की योजना निर्माण प्रक्रिया को बदल सकता है। साथ ही डेटा सेंटर, इस्पात, एल्यूमीनियम और अन्य विनिर्माण उद्योगों के लिए भी यह आकर्षक विकल्प बन सकता है, क्योंकि उन्हें लगातार और निर्बाध बिजली आपूर्ति की आवश्यकता होती है।
अध्ययन के सह-लेखक अमोल फड़के ने कहा, यदि भारत इस मॉडल को बड़े पैमाने पर अपनाता है, तो उपभोक्ताओं और उद्योगों को 25 वर्षों तक निश्चित कीमत पर विश्वसनीय और स्वच्छ बिजली मिल सकती है। कम लागत, स्थिर कीमत और भरोसेमंद आपूर्ति का यह संयोजन भारतीय विनिर्माण क्षेत्र के लिए एक बड़ा प्रतिस्पर्धात्मक लाभ साबित हो सकता है।
--आईएएनएस
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