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मणिपुर: NRC की मांग को लेकर उग्र प्रदर्शन के बीच 22 अगस्त तक सभी स्कूल-कॉलेज बंद

Manipur schools closed: पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में लगातार बने तनावपूर्ण हालातों और कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार, राज्य के सभी शैक्षणिक संस्थान, जिनमें स्कूल, कॉलेज और उच्च शिक्षा संस्थान शामिल हैं- अब 22 अगस्त तक पूरी तरह बंद रहेंगे। यह आदेश सरकारी, सहायता प्राप्त (एडेड) और गैर-सहायता प्राप्त (अनएडेड) सभी शिक्षण संस्थानों पर लागू होगा।

शिक्षा विभाग की ओर से जारी देर रात के आदेश में कहा गया है कि मणिपुर के राज्यपाल ने राज्य में बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन, काउंसिल ऑफ हायर सेकेंडरी एजुकेशन, सीबीएसई (CBSE) या अन्य किसी भी बोर्ड से संबद्ध स्कूलों और विश्वविद्यालयों सहित सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को इस अवधि के दौरान बंद रखने का निर्देश दिया है।

एनआरसी (NRC) की मांग को लेकर प्रदर्शन और विरोध प्रदर्शन
शैक्षणिक संस्थानों को बंद रखने का यह निर्णय 'कैंपेन फॉर जस्ट एंड फेयर डेलिमिटेशन' (JFD) द्वारा राज्य में जनगणना (Census) प्रक्रिया शुरू होने से पहले राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को अपडेट करने की मांग को लेकर बुलाई गई 48 घंटे की हड़ताल और उसके बाद भड़के तनाव के कारण लिया गया है।

बुधवार को जेएफडी के विरोध प्रदर्शन के दौरान कई इलाकों में मुख्यमंत्री वाई खेमचंद सिंह और गृह मंत्री गोविंदस कोंथौजाम समेत कई राजनेताओं के पुतले फूंके गए। इस विरोध प्रदर्शन के कारण इम्फाल पश्चिम, इम्फाल पूर्व, थौबल और बिष्णुपुर सहित कई जिलों में सड़कों पर जाम और नाकेबंदी जैसी स्थिति पैदा हो गई। इसके अलावा, JFD ने गुरुवार को पूरे मणिपुर में सभी सरकारी कार्यालयों के बहिष्कार का भी आह्वान किया है।

मुख्यमंत्री की अपील और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा
प्रदर्शनकारियों की मांग है कि राज्य में जनगणना से पहले एनआरसी लागू किया जाए, जिसके लिए सेल्फ-एन्यूमरेशन का चरण 17 अगस्त से शुरू हो चुका है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार एनआरसी की मांग का समर्थन करती है और इस संबंध में मणिपुर विधानसभा पहले ही एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेज चुकी है।

मुख्यमंत्री वाई खेमचंद सिंह ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा, "मैं सभी से अनुरोध करता हूं कि वे बंद और नाकेबंदी जैसे आंदोलनों का सहारा लेने के बजाय विरोध का कोई अन्य तरीका अपनाएं, क्योंकि इससे दिहाड़ी मजदूरों और छात्रों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।"

हालात पर पैनी नजर रखते हुए मुख्यमंत्री ने बुधवार को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के वरिष्ठ अधिकारियों (जिसमें इंस्पेक्टर जनरल राजेंद्र नारायण सिंह भी शामिल हैं) के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। उन्होंने मणिपुर में शांति व्यवस्था बनाए रखने में केंद्रीय बलों के समर्पण और मूल्यवान योगदान के लिए उनका आभार व्यक्त किया।

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NASA Moon Images: चांद पर SpaceX रॉकेट की टक्कर से बना 60 फीट का गड्ढा, नासा की तस्वीरों में दिखा साफ नजारा

NASA Moon Images: चांद की सतह पर भेजे गए एक रॉकेट के मलबे ने नया निशान छोड़ दिया है। स्पेस x के Falcon 9 रॉकेट का ऊपरी हिस्सा 5 अगस्त 2026 को चंद्रमा की सतह से जा टकराया था। अब  नासा के Lunar Reconnaissance Orbiter (LRO) ने इस टक्कर वाली जगह की पहले और बाद की तस्वीरें जारी की हैं, जिनसे वहां बने नए क्रेटर का आकार सामने आया है।

जनवरी 2025 में स्पेस x के Falcon 9 रॉकेट ने फायरफ़्लाई एयरोस्पेस के ब्लू घोस्ट 1 मिशन को चांद की ओर रवाना किया था। मिशन के बाद रॉकेट का ऊपरी चरण अंतरिक्ष में रह गया और उसकी कक्षा में हुए बदलावों के कारण वह धीरे-धीरे चंद्रमा की ओर बढ़ गया। नासा के मुताबिक सौर गतिविधि और गुरुत्वाकर्षण बलों ने इसकी राह को प्रभावित किया।

कब और कहां टकराया रॉकेट?
Falcon 9 का यह ऊपरी चरण 5 अगस्त 2026 को चंद्रमा से टकराया। यह टक्कर आइंस्टीन और बेली क्रेटर के क्षेत्र में हुई। करीब 4 टन वजनी रॉकेट का हिस्सा लगभग 5,400 मील प्रति घंटे यानी करीब 8,700 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चंद्र सतह तक पहुंचा।

टक्कर के बाद चांद की सतह पर लगभग 60 फीट यानी 18 मीटर चौड़ा नया क्रेटर बना। तस्वीरों के विश्लेषण से इसकी गहराई 10 फीट यानी करीब 3 मीटर से कम आंकी गई है।

तस्वीरों में क्या खास दिखा?
नासा की Before और After तस्वीरों में टक्कर से बने नए क्रेटर को स्पष्ट रूप से पहचाना जा सकता है। इसके आसपास चंद्रमा की सतह पर अलग-अलग रंग और चमक वाले निशान भी दिखाई देते हैं।

वैज्ञानिकों के अनुसार, टक्कर के दौरान सतह की धूल और चट्टानों का बड़ा हिस्सा उछलकर आसपास फैल गया। गहरे और चमकीले हिस्से इस बात की ओर संकेत करते हैं कि प्रभाव के कारण सतह की अलग-अलग परतों की सामग्री बाहर आई और आसपास जमा हुई।

क्या धरती के लिए था कोई खतरा?
इस घटना से पृथ्वी को कोई खतरा नहीं था। नासा ने टक्कर से पहले ही स्पष्ट किया था कि रॉकेट का चंद्रमा से टकराना धरती के लिए खतरा पैदा नहीं करेगा। इसका असर  चंद्र सतह और वहां भविष्य में होने वाले वैज्ञानिक अभियानों से जुड़ा है।

इस घटना ने अंतरिक्ष में छोड़े गए रॉकेट चरणों के प्रबंधन पर चर्चा जरूर तेज कर दी है। जैसे-जैसे चंद्रमा पर मिशनों की संख्या बढ़ रही है, भविष्य में ऐसे अनियंत्रित अंतरिक्ष मलबे से बचने के लिए बेहतर ट्रैकिंग और मिशन-डिस्पोजल रणनीतियों की जरूरत बढ़ सकती है।

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