MP News: जुलाई में 9.26 लाख स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को मिली 10 करोड़ 96 लाख की छूट, टाइम ऑफ डे टैरिफ के तहत दी गई राहत
मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के कार्यक्षेत्र के जिलों में टाइम ऑफ डे टैरिफ के तहत 9 लाख से अधिक स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को 10 करोड़ से अधिक की छूट दी गई है। इनमें भोपाल रीजन के 7 लाख 59 हजार 792 उपभोक्ताओं को 839.90 लाख रुपये तथा ग्वालियर रीजन के 1 लाख 66 हजार 945 उपभोक्ताओं को 256.53 लाख रुपये की छूट प्रदान की गई।
दरअसल, मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के कार्यक्षेत्र के जिलों (भोपाल, नर्मदापुरम, ग्वालियर और चंबल संभाग) के स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को टाइम ऑफ डे (ToD) टैरिफ व्यवस्था के तहत सोलर आवर्स (सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक) में बिजली की खपत पर 20% तक की विशेष छूट का लाभ दिया जा रहा है। जुलाई-2026 में कंपनी कार्यक्षेत्र के कुल 9 लाख 26 हजार 737 स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को उनके बिजली बिलों में कुल 10 करोड़ 96 लाख 42 हजार रुपये की टाइम ऑफ डे छूट का सीधा लाभ मिला।
मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक ऋषि गर्ग ने बताया कि टाइम ऑफ डे (ToD) टैरिफ के तहत स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को सोलर आवर्स (सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक) बिजली उपयोग करने पर ऊर्जा प्रभार की सामान्य दर में 10 किलोवाट तक स्वीकृत लोड/अनुबंध मांग वाले उपभोक्ताओं को 20 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है। कंपनी द्वारा स्मार्ट मीटरिंग पहल के अंतर्गत उपभोक्ताओं को सोलर ऑवर में बिजली उपयोग करने पर विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
कहां और कैसे करें संपर्क
स्मार्ट मीटर से संबंधित किसी भी जानकारी के लिए उपभोक्ता 1912 पर संपर्क कर सकते हैं अथवा कैलाश कुमार चौधरी, प्रबंधक (स्मार्ट मीटरिंग सेल) से संपर्क कर सकते हैं। साथ ही Smartmeteringcellbhopal@gmail.com पर ई-मेल के माध्यम से भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
स्मार्ट मीटर के फायदे
- ऊर्जा की खपत को ट्रैक करने और ऊर्जा की बचत करने में मदद करता है।
- बिजली की खपत को सटीक रूप से मापता है, जिससे बिल में कोई गलती नहीं होती।
- ऐप के जरिए मोबाइल पर रियल-टाइम डेटा देखकर ऊर्जा की खपत को नियंत्रित कर सकते हैं।
- ऊर्जा की गुणवत्ता के बारे में जानकारी मिलती है, ताकि ऊर्जा की खपत को बेहतर बना सकते हैं।
- ऊर्जा की खपत को ऑनलाइन ट्रैक करने और नियंत्रित करने की सुविधा मिलती है।
- ऊर्जा की खपत को कम करने से पर्यावरण पर पड़ने वाला प्रभाव कम होता है।
कंपनी ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे आधुनिक तकनीक का लाभ उठाते हुए अपने परिसरों में स्मार्ट मीटर लगवाएं। स्मार्ट मीटर न केवल ऊर्जा प्रबंधन को बेहतर बनाते हैं, बल्कि उपभोक्ताओं को अपनी बिजली खपत पर नियंत्रण रखने और आर्थिक बचत करने का अवसर भी प्रदान करते हैं।
उल्लेखनीय है कि स्मार्ट मीटर से उपभोक्ताओं को बिजली की खपत को ट्रैक करने, ऊर्जा बचत करने तथा मोबाइल ऐप के माध्यम से कहीं से भी अपनी खपत की जानकारी प्राप्त करने की सुविधा मिलती है।
कांग्रेस का वंदे मातरम पर बड़ा फैसला, पार्टी कार्यक्रमों में सिर्फ दो अंतरे गाए जाएंगे, 1937 के निर्णय का पालन करेगी पार्टी
नई दिल्ली के इंदिरा भवन में हुई कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक में वंदे मातरम को लेकर पार्टी ने अपना रुख स्पष्ट किया। बैठक के बाद कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि पार्टी 1937 में लिए गए फैसले के अनुसार अपने कार्यक्रमों में वंदे मातरम के केवल दो अंतरे ही गाएगी। उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस की पहले से तय नीति के अनुरूप है।
कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में वंदे मातरम के साथ अन्य राजनीतिक और संगठनात्मक मुद्दों पर भी चर्चा हुई। बैठक के बाद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि पार्टी अपने ऐतिहासिक निर्णय के अनुसार आगे भी उसी व्यवस्था का पालन करेगी। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम और राष्ट्रगान कांग्रेस के लिए भावनात्मक विषय हैं, जबकि भाजपा इन्हें राजनीतिक मुद्दा बना रही है। पार्टी ने स्पष्ट किया कि उसके कार्यक्रमों में पहले दो अंतरे ही गाए जाएंगे।
वंदे मातरम पर कांग्रेस ने क्या कहा?
कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक बुधवार को नई दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में हुई। बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि पार्टी 1937 में कांग्रेस द्वारा लिए गए फैसले के मुताबिक आगे बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कार्यक्रमों में वंदे मातरम के केवल दो अंतरे गाए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वंदे मातरम और राष्ट्रगान कांग्रेस के लिए भावनात्मक विषय हैं। उनके मुताबिक पार्टी इन्हें ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व के रूप में देखती है। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से उठा रही है। वंदे मातरम को 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया था। इस गीत में कुल छह अंतरे हैं। कांग्रेस ने अपने फैसले में केवल यह स्पष्ट किया है कि पार्टी अपने कार्यक्रमों में पहले दो अंतरों का ही गायन करेगी।
जानिए क्या है पूरा मामला?
15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में हुए स्वतंत्रता दिवस समारोह के बाद वंदे मातरम को लेकर विवाद सामने आया था। भाजपा ने दावा किया कि कार्यक्रम के दौरान वंदे मातरम के गायन में व्यवधान डालने की कोशिश की गई थी। कांग्रेस ने इस बैठक में अपनी नीति स्पष्ट करते हुए 1937 के फैसले का पालन करने की बात दोहराई। बैठक में केवल वंदे मातरम का मुद्दा ही नहीं उठा। केसी वेणुगोपाल ने बताया कि कांग्रेस नेताओं के बीच राम मंदिर चंदा, पेपर लीक, छात्र आंदोलन और सरकार के आंदोलन से निपटने के तरीके जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने माना कि संसद का मानसून सत्र विपक्ष के लिए सफल रहा।
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