Delhi High Court ने जताई आपत्ति: Lakshmi Yojana में MP MLA संस्तुति अनिवार्य
दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत दिल्ली सरकार के उस कदम पर आपत्ति जताई, जिसके तहत महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये की वित्तीय सहायता देने वाली लक्ष्मी योजना का लाभ लेने के लिए स्थानीय सांसद या विधायक की संस्तुति अनिवार्य की गई है। मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने कहा कि पात्रता का निर्धारण आय प्रमाण पत्र और निवास प्रमाण जैसे दस्तावेजों के आधार पर किया जा सकता है। अदालत ने दिल्ली सरकार के वकील को 24 अगस्त को निर्देशों के साथ पेश होने को कहा।
पीठ ने कहा, ‘‘निर्देश प्राप्त करें। हम इसे मंजूरी नहीं दे सकते।’’ अदालत ने सवाल किया कि सरकार संस्तुति पत्र क्यों मांग रही है, जबकि पात्रता का आकलन करने के सैकड़ों अन्य तरीके मौजूद हैं। पीठ ने सरकारी वकील से पूछा, ‘‘आप उनसे विधायक या सांसद के पास जाने के लिए क्यों कह रहे हैं?’’ अदालत ने आदेश दिया, ‘‘सोमवार को इस मामले को सूचीबद्ध करें, ताकि वकील यह निर्देश ले सकें कि दिल्ली लक्ष्मी योजना का लाभ लेने वाली महिलाओं के लिए सांसद या विधायक का संस्तुति पत्र प्रस्तुत करना क्यों आवश्यक किया गया है।’’ उच्च न्यायालय कांग्रेस के पूर्व पार्षद अभिषेक दत्त और मौजूदा पार्षद वेदपाल शीतल चौधरी द्वारा इस मुद्दे पर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा था।
पीठ ने पाया कि योजना में लाभ लेने के लिए निर्धारित विस्तृत पात्रता मानदंड में विधायक की संस्तुति की आवश्यकता का कोई उल्लेख नहीं है। अदालत ने कहा, ‘‘हमारा प्रथमदृष्टया विचार है कि कोई महिला इन मानदंडों को पूरा करती है या नहीं, इसका आकलन करने के लिए विभिन्न दस्तावेज मांगे जा सकते हैं। यह संभव है कि किसी महिला को अपने निर्वाचन क्षेत्र के सांसद या विधायक का समर्थन मिले या न मिले।
वैसे भी, इस योजना में किसी संस्तुति पत्र की आवश्यकता का उल्लेख नहीं है।’’ याचिका में कहा गया है कि स्थानीय सांसद या विधायक से अनिवार्य रूप से संस्तुति पत्र प्राप्त करने की शर्त राजनीतिक प्रतिनिधियों को ‘‘मनमाना निर्णय लेने का अधिकार देती है’’ और कल्याणकारी योजना के लाभ को ‘‘राजनीतिक संरक्षण का माध्यम बना देती है।’’ जनहित याचिका के अनुसार, सरकार ने एक अगस्त को ऑनलाइन पंजीकरण पोर्टल शुरू करने के साथ ही इस योजना को लागू किया। पोर्टल पर पंजीकरण के लिए संबंधित सांसद या विधायक का संस्तुति पत्र जमा करना अनिवार्य किया गया है। याचिका में कहा गया है कि ऐसी संस्तुति के लिए सांसदों या विधायकों के लिए न तो कोई निर्धारित समयसीमा है और न ही निर्णय लेने के स्पष्ट मानदंड।
इसके अलावा, संस्तुति पत्र जारी करने से इनकार किए जाने की स्थिति में कोई शिकायत निवारण व्यवस्था भी नहीं है।
Assam Congress ने बराक वैली के 14 नेताओं को 6 साल के लिए निलंबित किया
कांग्रेस की असम इकाई ने बुधवार को बराक वैली के 14 नेताओं को विधानसभा चुनावों के दौरान पार्टी-विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में छह साल के लिए निलंबित कर दिया। कांग्रेस महासचिव (संगठन) रमन्ना बरुआ की ओर से जारी निलंबन आदेश के मुताबिक, यह कार्रवाई असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एपीसीसी) के अध्यक्ष गौरव गोगोई के निर्देश पर की गई। आदेश के अनुसार, निलंबित नेताओं में सिलचर जिला कांग्रेस कमेटी (डीसीसी) के तीन उपाध्यक्ष-समसुर रहमान चौधरी (जॉन), अख्तर हुसैन बारभुइयां और मोजिबुर रहमान चौधरी शामिल हैं।
आदेश में कहा गया है कि सिलचर डीसीसी के महासचिव अजमोल हुसैन लस्कर, शाइन अहमद लस्कर, महबूब हुसैन (रिपन), हनीफ आलम मजूमदार, अल्ताफ हुसैन लस्कर (टीटू) और नजीब अहमद लस्कर को भी निलंबित कर दिया गया है। इसमें कहा गया है कि विधानसभा चुनावों के दौरान पार्टी-विरोधी गतिविधियों में संलिप्तता के आरोप में असम प्रदेश युवा कांग्रेस कमेटी के महासचिव इजाज लस्कर, अल्पसंख्यक विभाग के महासचिव जहूर चौधरी, सोनाई मंडल कांग्रेस कमेटी के महासचिव कादिर अहमद लस्कर, जिला अल्पसंख्यक विभाग के पूर्व अध्यक्ष अंसार हुसैन बरलास्कर और सोनाई निर्वाचन क्षेत्र के युवा कांग्रेस अध्यक्ष रकीब अहमद मजूमदार को निलंबित करने का फैसला लिया गया है।
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