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फरहाना भट्ट बोलीं- डॉक्टर ने मना किया था:फिर भी 'खतरों के खिलाड़ी 15' में गईं; डर नहीं, बस एक कदम आगे बढ़ाना जरूरी है

'खतरों के खिलाड़ी 15' में नजर आ रहीं एक्ट्रेस फरहाना भट्ट ने बताया कि डॉक्टरों ने उन्हें शो में हिस्सा लेने से मना किया था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने शो के मुश्किल स्टंट्स, अपनी बीमारी, फैंस की उम्मीदों, रुबीना दिलैक के साथ दोस्ती और होस्ट रोहित शेट्टी से मिले हौसले पर खुलकर बात की। पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश… सवाल: 'खतरों के खिलाड़ी' का अनुभव कैसा रहा? जवाब: यह मेरी जिंदगी का 'वन्स इन अ लाइफटाइम' अनुभव रहा। शायद मैं दोबारा लाख कोशिश करूं, तब भी ऐसा अनुभव नहीं मिल पाएगा। इस सीजन के स्टंट बेहद मुश्किल और पहले से अलग हैं। पुराने स्टंट्स को भी नए ट्विस्ट के साथ पेश किया गया है। कई बार ऐसा लगा कि अब शरीर और दिमाग दोनों जवाब दे देंगे, लेकिन खुद को एक कदम और आगे बढ़ाने की हिम्मत ही सबसे बड़ी जीत थी। शो से लौटने के बाद जिंदगी काफी व्यस्त हो गई है, लेकिन यह सफर पूरी तरह यादगार रहा। सवाल: आपकी पहचान एक निडर इंसान की है। क्या कोई ऐसा डर था, जिसे आपने इस शो में हराया? जवाब: स्टंट करते समय हर किसी को डर लगता है, चाहे वह ऊंचाई हो, पानी हो, कीड़े हों या मगरमच्छ। लेकिन मेरा सबसे बड़ा डर यह था कि मेरे फैंस मुझसे निराश न हों। मैं नहीं चाहती थी कि उन्हें कभी लगे कि यह स्टंट मैं कर सकती थी, लेकिन मैंने कोशिश ही नहीं की। मेरे लिए जीत-हार से ज्यादा जरूरी हर स्टंट में अपना 100 प्रतिशत देना था। अगर मैं पूरी कोशिश करती हूं तो वही मेरे लिए सबसे बड़ी जीत है। सवाल: फैंस की उम्मीदों का दबाव कितना महसूस हुआ? जवाब: मुझे इस बात की चिंता नहीं थी कि मैं कमजोर दिखूंगी। मैं चाहती थी कि लोग यह देखें कि मैंने पूरी ईमानदारी से कोशिश की। स्टंट करते समय डर चेहरे पर दिखना स्वाभाविक है, लेकिन पीछे हटना मुझे मंजूर नहीं था। मेरे फैंस को हमेशा लगे कि फरहाना ने अपनी पूरी ताकत लगा दी। सवाल: शो में सबसे अच्छी दोस्ती किसके साथ हुई? जवाब: रुबीना दिलैक, ऑरी, करण, रित्विक, अविनाश और रुहानिका सभी के साथ अच्छा रिश्ता बना। रुहानिका उम्र में छोटी हैं, लेकिन बेहद मजबूत और फोकस्ड हैं। कई बार उनके स्टंट देखकर मुझे भी चिंता होती थी कि कहीं वह डर न जाएं। इस शो में सभी एक-दूसरे की तकलीफ समझते हैं, इसलिए रिश्ते अपने आप बन जाते हैं। सवाल: रुबीना दिलैक ने आपका खास ख्याल रखा। उसके बारे में बताइए? जवाब: शो से पहले ही मुझे पेट से जुड़ी गंभीर समस्या थी। डॉक्टर ने साफ कहा था कि इस साल शो मत करो, लेकिन मैंने दवाइयों के भरोसे जाने का फैसला किया। केपटाउन में शूटिंग इतनी व्यस्त थी कि मैं समय पर दवा भी नहीं ले पाई। भारत लौटने के बाद हालत बिगड़ गई और मुझे अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। जैसे ही रुबीना को पता चला, वह अस्पताल मिलने पहुंच गईं। सेट पर भी वह हमेशा पूछती थीं कि मैंने खाना खाया या नहीं, दवा ली या नहीं। वह जबरदस्ती घी खिलाती थीं ताकि मेरी सेहत ठीक रहे। उनका यह अपनापन मैं कभी नहीं भूलूंगी। सवाल: डॉक्टर ने मना किया था, फिर भी आपने शो क्यों किया? जवाब: सच कहूं तो आज भी नहीं पता कि मैं इस शो को लेकर इतनी उत्साहित क्यों थी। मुझे पता था कि मेरी तबीयत ठीक नहीं है। मैं जिम भी नहीं जाती और न ही खुद को बहुत फिट मानती हूं। एक स्टंट के बाद मेरी पूरी बॉडी टूट गई थी। तब वहां के एक स्टंटमैन ने मुझसे कहा, 'तुम जितना सोचती हो, उससे कहीं ज्यादा मजबूत हो।' शायद मेरी सबसे बड़ी ताकत मेरा दिमाग था। कई बार शरीर जवाब दे देता था, लेकिन मेरा मन हार मानने को तैयार नहीं होता था। मुझे लगता था कि अब मुझसे नहीं होगा, लेकिन फिर भी मैं खुद को आगे बढ़ाती रही। सवाल: क्या कभी ऐसा लगा कि अब यह स्टंट नहीं हो पाएगा? जवाब: हां, कई बार ऐसा लगा कि अब बस यहीं रुक जाऊंगी। कुछ स्टंट इतने मुश्किल थे कि डर अपने चरम पर था। लेकिन मैंने खुद से कहा कि बस एक कदम और बढ़ाना है। मुझे हमेशा भरोसा था कि शो की मेडिकल टीम हमारे साथ है और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाता है। इसी भरोसे ने मुझे हर बार हिम्मत दी। सवाल: होस्ट रोहित शेट्टी से क्या सीखने को मिला? जवाब: रोहित सर की तारीफ सुनना अपने आप में बहुत बड़ी बात होती है। जब वह किसी स्टंट के बाद कहते हैं, 'आई एम प्राउड ऑफ यू', तो लगता है जैसे सारी मेहनत सफल हो गई। कई बार मैं सिर्फ इसलिए और बेहतर करने की कोशिश करती थी ताकि उनके मुंह से ये शब्द सुन सकूं। अगर कभी लगता था कि मैं और अच्छा कर सकती थी, तो सबसे ज्यादा अफसोस इसी बात का होता था। रोहित सर की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वह बिना कोई खास टिप दिए भी आपका आत्मविश्वास बढ़ा देते हैं। अगर कोई डर रहा हो तो वह इस तरह हौसला बढ़ाते हैं कि मुश्किल स्टंट भी आसान लगने लगता है। सवाल: क्या रोहित शेट्टी के साथ फिर काम करने की इच्छा है? जवाब: बिल्कुल। मैं पहले भी उनके साथ काम कर चुकी हूं। अगर भविष्य में उनकी किसी फिल्म में मेरे लिए जगह बनती है तो वह मेरे करियर का सबसे बड़ा मौका होगा। मैं उम्मीद करती हूं कि दोबारा उनके साथ काम करने का अवसर जरूर मिलेगा। सवाल: आपके हिसाब से इस सीजन के मजबूत फाइनलिस्ट कौन हो सकते हैं? जवाब: इस शो में कई मजबूत खिलाड़ी हैं। रुबीना, अविनाश, ऑरी, करण, रित्विक और मैं खुद भी फाइनल तक पहुंच सकते हैं। सभी की पर्सनैलिटी अलग है, लेकिन एक चीज सबमें समान थी-हर कोई जीतने के इरादे से आया था। यही इस सीजन की सबसे बड़ी खासियत है। सवाल: 'खतरों के खिलाड़ी' ने आपको क्या सिखाया? जवाब: मैंने सीखा कि जिंदगी में कितनी भी मुश्किल स्थिति आ जाए, सबसे पहले खुद को शांत रखना चाहिए। कोई भी परिस्थिति उतनी कठिन नहीं होती, जितना हम उसे अपने दिमाग में बना लेते हैं। अगर आप अपने मन को समझा लें कि यह मुश्किल नहीं है, तो आधी लड़ाई वहीं जीत जाते हैं। इंसान अगर अपने दिमाग पर काबू पा ले, तो वह किसी भी डर का सामना कर सकता है। सवाल: आगे किस तरह के प्रोजेक्ट्स में नजर आएंगी? जवाब: मेरा पूरा फोकस अब एक्टिंग पर है। मैं अच्छे एक्टिंग प्रोजेक्ट्स करना चाहती हूं। रियलिटी शो से मुझे बहुत कुछ मिला है, लेकिन बतौर कंटेस्टेंट यह मेरा आखिरी रियलिटी शो होगा। अब मैं अपनी एक्टिंग, हेल्थ और दूसरी जरूरी स्किल्स पर काम करना चाहती हूं। मेरा मानना है कि चाहे इंसान कितना भी सफल हो जाए, उसे अपने हुनर को लगातार निखारते रहना चाहिए। सवाल: शगुन ने कुछ कंटेस्टेंट्स पर उनका मजाक उड़ाने का आरोप लगाया था। इस पर आपकी क्या राय है? जवाब: कुछ मौके ऐसे आए, जब मुझे भी लगा कि कुछ बातें जरूरत से ज्यादा कही गईं। हो सकता है सामने वाले का इरादा मजाक का रहा हो, लेकिन शब्दों का चुनाव बहुत मायने रखता है। मुझे लगा कि शगुन उन बातों से असहज थीं। अच्छी बात यह रही कि उन्होंने खुद अपने लिए आवाज उठाई। उन्होंने किसी और से अपने लिए लड़ने की उम्मीद नहीं की। मैं खुद इन चीजों से थोड़ा दूर रहती थी क्योंकि मेरा पूरा ध्यान सिर्फ स्टंट्स पर था। हालांकि शगुन ने मुझसे भी कहा था कि कुछ बातें मेरे बारे में भी कही जा रही हैं, लेकिन मैंने उन्हें नजरअंदाज किया और अपना फोकस सिर्फ खेल पर रखा। हर इंसान का स्वभाव अलग होता है। अगर शगुन ने यह बात कही है, तो जरूर उन्होंने कुछ महसूस किया होगा। किसी एक व्यक्ति को बार-बार निशाना बनाना या ऐसे शब्द इस्तेमाल करना, जिससे सामने वाला असहज हो, सही नहीं है।

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कॉमनवेल्थ में बॉक्सिंग भारत की ताकत, एथलेटिक्स में गोल्ड नहीं:39 मेडल के साथ चौथे स्थान पर; 123 खिलाड़ियों में 38 मेडलिस्ट, सक्सेस रेट 31%

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने 13 गोल्ड, 17 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज समेत कुल 39 मेडल जीते। पहली नजर में यह प्रदर्शन बर्मिंघम 2022 के 61 मेडल से कमजोर दिख सकता है, लेकिन आंकड़े अलग कहानी बताते हैं। इस बार ग्लासगो में सिर्फ 10 खेल शामिल थे, जबकि बर्मिंघम में 19 खेल खेले गए थे। बैडमिंटन, कुश्ती, शूटिंग, हॉकी, टेबल टेनिस और क्रिकेट जैसे खेल कार्यक्रम का हिस्सा नहीं थे, जिनसे 2022 में भारत को 30 पदक मिले थे। इसके अलावा भारत ने 210 खिलाड़ियों की जगह सिर्फ 123 खिलाड़ियों का दल भेजा। इसके बावजूद टीम चौथे स्थान पर रही। इतना ही नहीं, 123 खिलाड़ियों में से 38 खिलाड़ी मेडल जीतकर लौटे, यानी सफलता दर 31% रही। बर्मिंघम में यह आंकड़ा 29% था। 5 फैक्टर्स में एनालिसिस 1. मेडल के लिहाज से- बॉक्सिंग सबसे बड़ा मेडल बैंक भारत के 39 पदकों में सबसे बड़ा योगदान बॉक्सिंग का रहा। मुक्केबाजों ने 7 गोल्ड और 3 सिल्वर समेत कुल 10 मेडल जीते। यानी हर चार में से एक मेडल बॉक्सिंग से आया। इसके बाद एथलेटिक्स और वेटलिफ्टिंग ने 8-8 पदक दिलाए। पैरा एथलेटिक्स से 6, जूडो से 4 और पैरा पावरलिफ्टिंग से 1 मेडल मिला। कुल मिलाकर 39 में से 37 पदक सिर्फ पांच खेलों से आए। 2. पोजिशन के लिहाज से- चौथा स्थान बरकरार भारत 13 गोल्ड के साथ मेडल टैली में चौथे स्थान पर रहा। ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और कनाडा उससे आगे रहे। खेलों की संख्या कम होने और दल छोटा होने के बावजूद टीम टॉप-4 में पहुंच गई। 2022 बर्मिंघम गेम्स में 22 गोल्ड के साथ भारत चौथे स्थान पर था। 3. अनुमान से दोगुने से ज्यादा गोल्ड जीते कॉमनवेल्थ गेम्स शुरू होने से पहले भारतीय ओलिंपिक संघ और विभिन्न खेल महासंघों की इंटरनल रिपोर्ट में भारत को सिर्फ 31 मेडल और 6 गोल्ड मिलने का अनुमान लगाया गया था, लेकिन ग्लासगो में भारतीय खिलाड़ियों ने उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन करते हुए 39 मेडल जीता। भारत की सबसे ज्यादा उम्मीदें बॉक्सिंग, वेटलिफ्टिंग और एथलेटिक्स से थीं, जिन्होंने मिलकर 26 मेडल दिलाए। एथलेटिक्स में भारत को सबसे बड़ा झटका लगा और टीम एक भी गोल्ड मेडल नहीं जीत सकी। 4. किस खेल ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया? i. बॉक्सिंग भारत का सबसे सफल खेल बॉक्सिंग रहा। 14 मुक्केबाजों के दल में से 10 खिलाड़ी मेडल जीतकर लौटे। इसमें 7 गोल्ड और 3 सिल्वर शामिल रहे। यानी 71% मेडल कन्वर्जन रेट। बर्मिंघम 2022 में यह आंकड़ा 58% था। जैस्मिन लांबोरिया, साक्षी चौधरी, प्रीति पवार, प्रिया घंघास, अरुंधति चौधरी, सचिन सिवाच और अंकुश पंघाल चैंपियन बने। लवलीना बोरगोहेन, जादुमणि सिंह और नरेंद्र बेरवाल सिल्वर जीत सके। ii. पैरा एथलेटिक्स भारत के सिर्फ 11 पैरा एथलीट ग्लासगो पहुंचे थे, लेकिन उन्होंने 6 मेडल जीत लिए। इनमें 3 गोल्ड, 2 सिल्वर और 1 ब्रॉन्ज शामिल रहे। भारत ने तीन बार डबल पोडियम हासिल किया और दो बार 1-2 फिनिश दर्ज की। दिलीप गावित, सोमन राणा और शर्मिला धनकड़ गोल्ड जीतने में सफल रहे। iii. जूडो जूडो में भारत ने पहली बार कॉमनवेल्थ इतिहास में गोल्ड जीता। अस्मिता डे ने गोल्ड दिलाया। इसके कुछ मिनट बाद हर्ष सिंह ने दूसरा गोल्ड जीत लिया। यामिनी मौर्य ने सिल्वर और उन्नति शर्मा ने ब्रॉन्ज जीतकर कुल चार मेडल दिलाए। हालांकि 14 सदस्यीय भारतीय टीम के दो खिलाड़ी अरुण कुमार और तुलिका मान डोपिंग के कारण बाहर हो गए। 5. किस खेल ने निराश किया? i. एथलेटिक्स एथलेटिक्स ने भारत को 10 मेडल दिलाए, लेकिन एक भी गोल्ड नहीं आया। नीरज चोपड़ा सिल्वर जीत सके। उनके साथ डेब्यू कर रहे यशवीर सिंह ने ब्रॉन्ज जीता। गुलवीर सिंह ने 10 हजार मीटर में सिल्वर और 5 हजार मीटर रेस में ब्रॉन्ज जीतकर इतिहास रचा। तेजस्विन शंकर ने डेकाथलन में भारत का पहला कॉमनवेल्थ पदक दिलाया। सरवेश कुशारे, श्रीशंकर, प्रवीण चित्रावेल और सीमा कालीरामना भी मेडल जीतने में सफल रहे। हालांकि स्प्रिंट और रिले टीम से बड़ी उम्मीदें थीं, वह खाली हाथ रही। ii. वेटलिफ्टिंग भारत ने वेटलिफ्टिंग में 8 मेडल जीते, लेकिन सिर्फ एक गोल्ड मिला। मीराबाई चानू ने लगातार तीसरा कॉमनवेल्थ गोल्ड जीता। ऋषिकांता सिंह, अजय बाबू और लवप्रीत सिंह ने स्नैच में गेम्स रिकॉर्ड बनाए। ज्ञानेश्वरी यादव ने नेशनल रिकॉर्ड तोड़ा। 2022 में 15 में से 10 भारतीय वेटलिफ्टर मेडल जीतकर लौटे थे। iii. लॉन बॉल्स बर्मिंघम 2022 में भारत ने लॉन बॉल्स में गोल्ड और सिल्वर जीता था। इसलिए उम्मीदें इस बार भी मेडल की थी। लेकिन 6 सदस्यीय टीम खाली हाथ लौटी। हालांकि तस्वीर उतनी खराब नहीं थी जितनी मेडल टैली बताती है। रूपा रानी तिर्की और पिंकी सिंह की जोड़ी इंग्लैंड को हराने से सिर्फ एक बाउल दूर रह गई थी। पुरुष जोड़ी भी टाईब्रेक में हार गई। iv. पैरा पावरलिफ्टिंग भारत को पैरा पावरलिफ्टिंग टीम से काफी उम्मीदें थीं क्योंकि कई खिलाड़ी एशियाई और विश्व स्तर पर अच्छा प्रदर्शन कर चुके थे। लेकिन 7 सदस्यीय दल में सिर्फ झंडू कुमार ही मेडल जीत सके। V. जिम्नास्टिक्स, स्विमिंग और साइक्लिंग में मेडल नहीं मिला जिम्नास्टिक्स में भारत के आठ खिलाड़ियों में से केवल दो ही फाइनल में पहुंच सके। इस खेल में भारत को 2014 से कोई मेडल नहीं मिला है। स्विमिंग में श्रीहरि नटराज सहित कोई भी स्विमर मेडल तक नहीं पहुंच सका। साइक्लिंग में भी नतीजे निराशाजनक रहे। इसी बीच 16 साल की ट्रैक साइक्लिंग प्लेयर लीशा दास की कहानी चर्चा में रही। सीमित संसाधनों और प्रशासनिक दिक्कतों के बावजूद उन्होंने ग्लासगो में हिस्सा लिया। हालांकि वे मेडल जीतने में सफल नहीं रहीं। ------------------------------- कॉमनवेल्थ गेम्स की यह खबर भी पढ़ें… साइकल मैकेनिक की बेटी अस्मिता ने पहला जूडो गोल्ड दिलाया:सोमन ने सेना में ब्लास्ट में पैर गंवाया; कॉमनवेल्थ गेम्स के 38 मेडलिस्ट की स्टोरी कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 समाप्त हो चुके हैं। 11 दिन तक ग्लासगो में चले गेम्स में भारत के 38 खिलाड़ियों ने 39 मेडल जीते। गुलवीर सिंह को डबल मेडल मिले। इनमें 13 गोल्ड, 17 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज शामिल रहे। पूरी खबर पढ़ें…

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CWG 2026 Medal Tally: किस देश ने जीते कितने पदक और भारत किस स्थान पर रहा? देखें पूरी लिस्ट

CWG 2026 Medal Tally: ग्लास्गो 2 अगस्त को समाप्त हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत सबसे ज्यादा पदक जीतने वाला चौथा देश बना, जबकि ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड ने इन खेलों में पदकों का शतक लगाया। Mon, 03 Aug 2026 07:09:20 +0530

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