Delhi आपदा प्रबंधन कर्मियों के वेतन में 16 साल बाद हुई बढ़ोतरी
नयी दिल्ली, दो अगस्त दिल्ली सरकार ने आपदा प्रबंधन कर्मियों के वेतन में 100 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की है, जो 16 वर्षों से भी अधिक समय में पहली बढ़ोतरी है। उनका पिछला वेतन 2009 में बढाया गया था। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने रविवार को एक बयान में कहा, हमने आपदा प्रबंधन कर्मियों के वेतन में संशोधन करके उन्हें न्याय दिलाया है, जिसमें 16 वर्षों से बदलाव नहीं गया था।
इस फैसले से दिल्ली राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के तहत काम करने वाले कर्मचारियों को लाभ मिलेगा। इनमें परियोजना अधिकारी, जिला परियोजना अधिकारी और परियोजना समन्वयक शामिल हैं। इन पदों का सृजन वर्ष 2009 में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के सहयोग से किया गया था।
तब से इन कर्मियों का मासिक वेतन अपरिवर्तित था। परियोजना अधिकारी और जिला परियोजना अधिकारियों को 25,000 रुपये तथा परियोजना समन्वयकों को 20,000 रुपये प्रति माह मिलते थे।
YS Sharmila ने गोदावरी बाढ़ पीड़ितों के तुरंत पुनर्वास की मांग की
अमरावती, दो अगस्त आंध्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एपीसीसी) की अध्यक्ष वाई.एस. शर्मिला ने रविवार को गोदावरी नदी में आई बाढ़ से विस्थापित लोगों के तत्काल पुनर्वास की मांग करते हुए आरोप लगाया कि तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) नीत सरकार बाढ़ प्रभावित परिवारों की परेशानी दूर करने के बजाय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रशंसा करने में अधिक व्यस्त है। उन्होंने कहा कि बाढ़ के कारण 20,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं और आरोप लगाया कि बाढ़ की पूर्व चेतावनी के बावजूद सरकार तत्काल पुनर्वास और राहत उपाय उपलब्ध कराने में विफल रही। शर्मिला ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, ‘‘बाढ़ से प्रभावित लोगों के प्रति सरकार ने उतनी चिंता नहीं दिखाई जितनी प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा करने में दिखाई है।
पूरे गांव जलमग्न हैं, हजारों लोग सब कुछ खो चुके हैं और लगभग 100 गांव बाढ़ के साये में जी रहे हैं।’’ उन्होंने सरकार की तैयारियों पर सवाल उठाते हुए पूछा कि संवेदनशील गांवों के लोगों को पहले से सुरक्षित स्थानों पर क्यों नहीं पहुंचाया गया और संभावित बाढ़ क्षेत्र की जानकारी होने के बावजूद पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन (आरएंडआर) पैकेज क्यों नहीं दिया गया। शर्मिला ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि वह बाढ़ पीड़ितों की परेशानी से अधिक प्रधानमंत्री मोदी की आलोचना को लेकर चिंतित है। उन्होंने पूछा कि प्रधानमंत्री मोदी की आलोचना से आहत होने वाले लोग क्या विस्थापित परिवारों का दर्द महसूस नहीं करते या जलमग्न गांवों से पलायन को मजबूर लोगों की पुकार नहीं सुनते।
एपीसीसी अध्यक्ष ने सरकार से बाढ़ की स्थिति सामान्य होने तक प्रभावित परिवारों को राहत केंद्रों में पुनर्वास, भोजन, आवश्यक वस्तुएं और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की।
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