भारत की सबसे बड़ी विमानन कंपनियों में शामिल इंडिगो अब घरेलू बाजार के साथ-साथ लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में भी अपनी मौजूदगी मजबूत करने की तैयारी कर रही है। हालांकि कंपनी का कहना है कि उसकी प्राथमिकता अब भी भारत का घरेलू विमानन बाजार ही है। इसके बावजूद आने वाले वर्षों में नए विमानों की मदद से अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का तेजी से विस्तार करने की योजना बनाई गई है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, इंडिगो जल्द ही एयरबस ए321 एक्सएलआर विमानों को अपने बेड़े में शामिल करेगी। इसके बाद वर्ष 2028 से कंपनी को एयरबस ए350 चौड़े ढांचे वाले विमान मिलने शुरू होंगे। इन नए विमानों की मदद से कंपनी लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का विस्तार करेगी और विदेशों में अपनी पहुंच को और मजबूत बनाएगी।
इंडिगो के प्रबंध निदेशक और सह-संस्थापक राहुल भाटिया ने कहा कि कंपनी की पहचान आज भी एक घरेलू विमान सेवा के रूप में ही है। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार की योजना जरूर है, लेकिन कंपनी का मूल आधार भारत का घरेलू नेटवर्क ही रहेगा। उनके अनुसार, इंडिगो अभी भी अपने विशाल घरेलू संचालन को सबसे बड़ी ताकत मानती है और उसी के आधार पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में आगे बढ़ना चाहती है।
बता दें कि फिलहाल भारत के घरेलू विमानन बाजार में इंडिगो की हिस्सेदारी 66 प्रतिशत से अधिक है। देश के अधिकांश बड़े और छोटे शहरों में कंपनी की मजबूत उपस्थिति है। राहुल भाटिया का कहना है कि इसी व्यापक घरेलू नेटवर्क की मदद से यात्रियों को विभिन्न शहरों से जोड़कर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों तक पहुंचाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इंडिगो की लंबी दूरी की उड़ानों का मुख्य उद्देश्य भारतीय यात्रियों और दुनिया के अलग-अलग देशों में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना है। उनका मानना है कि बड़ी संख्या में भारतीय यात्री अभी भी विदेश यात्रा के लिए खाड़ी देशों की विमान सेवाओं का उपयोग करते हैं। ऐसे में भारतीय विमान कंपनियों के लिए यह एक बड़ा अवसर है कि वे भारतीय यात्रियों को सीधे भारत से दुनिया के विभिन्न देशों तक ले जाएं और विदेशों में रहने वाले भारतीयों को भी भारत से बेहतर हवाई संपर्क उपलब्ध कराएं।
गौरतलब है कि जब राहुल भाटिया से पूछा गया कि क्या इंडिगो भविष्य में खाड़ी देशों की प्रमुख विमान सेवाओं की तरह वैश्विक संपर्क केंद्र विकसित करना चाहती है, तो उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय जोड़ने वाली उड़ानें कंपनी की प्राथमिकता नहीं होंगी। उनका मानना है कि भारत में अभी भी घरेलू विमान यात्रा की अपार संभावनाएं मौजूद हैं और कंपनी का प्रमुख ध्यान उसी बाजार पर रहेगा।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में भारत को दुनिया के उन देशों से जोड़ने की योजना है, जहां बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय रहता है। उनके अनुसार, यह लक्ष्य पूरी तरह संभव है और कंपनी इसी दिशा में आगे बढ़ रही है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, आज इंडिगो के पास 430 से अधिक विमान हैं। कंपनी देश के 95 से अधिक घरेलू और 40 से अधिक अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों के लिए उड़ानें संचालित कर रही है। इसके अलावा कंपनी ने 900 से अधिक विमानों का ऑर्डर भी दिया हुआ है, जिनमें वर्ष 2028 से मिलने वाले एयरबस ए350 विमान भी शामिल हैं।
राहुल भाटिया ने कहा कि कंपनी की सबसे बड़ी ताकत कम लागत पर संचालन करना है और भविष्य में भी यही रणनीति जारी रहेगी। उन्होंने बताया कि इंडिगो फिलहाल अगली पीढ़ी की विमान तकनीक का इंतजार कर रही है। नई तकनीक आने के बाद ही कंपनी अगले बड़े विमान ऑर्डर पर फैसला करेगी। उनके अनुसार, मौजूदा योजनाओं के आधार पर इंडिगो वर्ष 2035 तक के विस्तार के लिए अच्छी स्थिति में है। वहीं कंपनी में तीन अगस्त से विमानन क्षेत्र के अनुभवी अधिकारी विली वॉल्श मुख्य कार्यकारी अधिकारी का पद संभालेंगे, जिससे कंपनी के भविष्य के विस्तार को नई दिशा मिलने की उम्मीद की जा रही है।
Continue reading on the app