'तुम 6 महीने में मर सकते हो...', Ram Kapoor ने Lock Upp 2 में किया तीसरे सीक्रेट का खुलासा
Ram Kapoor Lock Upp 2: रियलिटी शो 'लॉक अप 2' में हर जजमेंट डे पर कंटेस्टेंट्स अपनी जिंदगी से जुड़े ऐसे राज खोल रहे हैं, जिन्हें सुनकर दर्शकों के साथ-साथ शो में मौजूद सभी लोग भी हैरान रह जाते हैं. हाल ही में शो से आकांक्षा चौधरी और पामेला सेरेना का सफर खत्म हुआ, लेकिन एलिमिनेशन से पहले आकांक्षा ने कास्टिंग काउच से जुड़ा अपना दर्द साझा किया. वहीं अब एक्टर राम कपूर ने भी अपनी जिंदगी का तीसरा और सबसे भावुक सीक्रेट बताया, जिसने सभी को भावुक कर दिया.
राम कपूर ने खुलासा किया कि करियर के सबसे सफल दौर में वो गंभीर डिप्रेशन, खराब सेहत और शराब की लत से जूझ रहे थे. उन्होंने बताया कि एक समय ऐसा भी आया जब डॉक्टर ने उन्हें साफ शब्दों में कह दिया था कि अगर उन्होंने अपनी लाइफस्टाइल नहीं बदली तो उनके पास जीने के लिए सिर्फ छह महीने ही बचेंगे.
शो के दौरान गुजर रहा था सबसे मुश्किल दौर
राम कपूर ने बताया कि उन्होंने करीब 27 साल तक इंडस्ट्री में काम किया, कई फिल्मों और टीवी शोज का हिस्सा बने लेकिन उनकी सबसे बड़ी पहचान 'बड़े अच्छे लगते हैं' से बनी. इसी शो के दौरान उनकी जिंदगी का सबसे कठिन दौर शुरू हुआ. उन्होंने कहा, "मैंने 27 साल काम किया है. इतने सालों में बहुत सारी फिल्में और शोज किए, लेकिन मेरी पहचान सिर्फ 'बड़े अच्छे लगते हैं' से बनी. एक बात मैंने पूरी दुनिया से छिपाकर रखी. यहां तक कि मेरी पत्नी को भी इसके बारे में पूरी जानकारी नहीं थी." राम ने बताया कि जिस समय उन्हें करियर की सबसे ज्यादा सफलता मिल रही थी, उसी समय वो अंदर ही अंदर डिप्रेशन से लड़ रहे थे.
'मैं टूटता चला गया'
राम कपूर ने कहा कि शो की सफलता के बाद उन्हें खूब पॉपुलेरिटी मिली. उनका किरदार घर-घर में पसंद किया जाने लगा, लेकिन इस दौरान उनका वजन लगातार बढ़ता गया और मानसिक स्थिति भी बिगड़ने लगी. उन्होंने बताया, "उस वक्त मुझे बहुत प्यार मिला. मैं सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले कलाकारों में शामिल हो गया था, लेकिन उसी दौरान मेरा वजन लगातार बढ़ रहा था और मैं मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुका था."
डॉक्टर ने दी थी मौत की चेतावनी
राम कपूर ने बताया कि बढ़ते वजन और खराब लाइफस्टाइल का असर उनकी सेहत पर गंभीर रूप से पड़ने लगा था. स्थिति इतनी खराब हो गई थी कि डॉक्टरों ने उन्हें चेतावनी दे दी. उन्होंने कहा, "डॉक्टर ने मुझे डायबिटिक स्ट्रोक का खतरा बताया. उन्होंने कहा कि अगर मैंने अपनी आदतें नहीं बदलीं तो मैं छह महीने के अंदर मर सकता हूं." राम के मुताबिक, उनकी डायबिटीज बेकाबू हो चुकी थी. उन्होंने कहा, "मैं दिन में तीन बार इंसुलिन लेता था. मेरा ब्लड शुगर 400 से 500 तक रहता था और कई बार 600 से भी ऊपर चला जाता था."
the way he literally jumped in the air to catch it like you can feel how badly he wanted to be in the game and he legit deserves every bit of it lets fckn goooo#lockupp2 #yogeshrawat pic.twitter.com/ncvTfmzHjw
— r3xyz (@ocyeanicbaby) July 26, 2026
शराब की लत और बिगड़ता व्यवहार
राम कपूर ने बताया कि उस समय वो लगातार 14-14 घंटे काम करते थे. काम, पैसा और शोहरत उनके लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता बन चुके थे. इसी दौरान उन्होंने शराब पीना शुरू कर दिया और धीरे-धीरे ये उनकी आदत बन गई. उन्होंने कहा, "मैं अपनी सेहत पर बिल्कुल ध्यान नहीं दे रहा था. मुझे सिर्फ काम, पैसा और फेम दिखाई दे रहा था. मैं सेट पर भी शराब पीता था. शूटिंग पर कई-कई घंटे लेट पहुंचता था और लोगों के साथ बहुत खराब व्यवहार करता था." राम ने खुद को याद करते हुए कहा, "मैं उस समय राक्षस बन गया था."
'मेरी वजह से शो बंद हो गया'
राम कपूर ने अपने व्यवहार पर अफसोस जताते हुए कहा कि उनकी खराब आदतों और नॉन-प्रोफेशनल रवैये का असर शो पर भी पड़ा. उन्होंने कहा, "मैं शूटिंग पर छह-छह घंटे की देरी से पहुंचता था. मेरी वजह से पूरी टीम परेशान रहती थी. मुझे लगता है कि उस शो के बंद होने की एक बड़ी वजह भी मैं ही था." राम का ये बयान सुनकर शो में मौजूद सभी लोग भावुक हो गए.
बच्चों ने बदल दी जिंदगी
राम कपूर ने अपने खुलासे के लास्ट में एक बेहद भावुक बात कही. उन्होंने बताया कि अगर उनके बच्चे नहीं होते तो शायद वह भी जिंदगी से हार मान लेते. उन्होंने कहा, "अगर मेरे बच्चे नहीं होते, तो शायद मैं भी अपनी जिंदगी खत्म करने की कोशिश करता." उनके इस बयान ने शो में मौजूद सभी लोगों को भावुक कर दिया.
ये भी पढ़ें: Explainer: क्या है सनी देओल की 'बंटवारा 1947' की कहानी? जिसमें दिखेगी बंटवारे के सबसे दर्दनाक दौर की झलक
EXPLAINER: कॉमनवेल्थ गेम्स में कब आया भारत का पहला मेडल? जानिए कैसा है इस इवेंट में भारत का इतिहास
Explainer On Commonwealth Games : कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का आयोजन ग्लासगो में आयोजित हो रहा है, जो अब खत्म होने को है. इस इवेंट में भारत का प्रदर्शन अच्छा देखने को मिला है. भारत ने अब तक 13 गोल्ड मेडल, 17 सिल्वर मेडल और 9 ब्रॉन्ज मेडल जीते हैं. आइए जानते हैं कि अब 39 मेडल्स के साथ भारत मेडल टैली में चौथे स्थान पर काबिज है. देखने वाली बात होगी कि इस बार भारत किस नंबर पर रहते हुए इवेंट का अंत करता है.
मगर, क्या आपको मालूम है कि कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का इतिहास कैसा रहा है? पहला मेडल भारत ने कब, किस इवेंट में जीता और भारत का बेस्ट प्रदर्शन कौन से संस्करण में आया. आइए इस आर्टिकल में इसके बारे में विस्तार से जानते हैं.
कॉमनवेल्थ गेम्स की कब हुई थी शुरुआत?
कॉमनवेल्थ गेम्स की शुरुआत 1930 में हुई थी. उस समय इन खेलों का नाम ब्रिटिश एम्पायर गेम्स था. पहले कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन 16 अगस्त से 23 अगस्त 1930 के बीच हैमिल्टन, ओंटारियो में हुआ था. पहले संस्करण में 11 देशों के करीब 400 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था। इन खेलों में एथलेटिक्स, बॉक्सिंग, लॉन बॉल्स, रोइंग, स्विमिंग, डाइविंग और रेसलिंग समेत कुल 6 खेलों की प्रतियोगिताएं आयोजित की गई थीं.
उद्घाटन समारोह हैमिल्टन के सिविक स्टेडियम में हुआ था. समय के साथ इन खेलों का नाम कई बार बदला गया. 1930 से 1950 तक इन्हें ब्रिटिश एम्पायर गेम्स, 1954 से 1966 तक ब्रिटिश एम्पायर एंड कॉमनवेल्थ गेम्स, 1970 से 1974 तक ब्रिटिश कॉमनवेल्थ गेम्स और 1978 से आधिकारिक तौर पर कॉमनवेल्थ गेम्स कहा जाने लगा.
“For a long time, my goal was simply to have the national anthem played, to make sure it was played for my weight category. Today, that dream finally came true.”
— The Khel India (@TheKhelIndia) August 2, 2026
“Hearing the national anthem was an incredibly emotional experience”
- Arundhati ???? pic.twitter.com/kBm243lBXC
2010 में हुआ था भारत में आयोजन
कॉमनवेल्थ गेम्स 2010 का आयोजन भारत की मेजबानी में हुआ था. ये पहला मौका था, जब भारत ने इस इवेंट की मेजबानी की थी, जिसके मुकाबले देश की राजधानी नई दिल्ली में किया गया था. 71 राष्ट्रमंडल देश और क्षेत्रों के 6,000 से अधिक खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया है. कुल 21 खेलों की 272 स्पर्धाएं आयोजित हुईं. भारत ने अपने इतिहास का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 38 स्वर्ण, 27 रजत और 36 कांस्य सहित 101 पदक जीते और पदक तालिका में दूसरा स्थान हासिल किया.
कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल के लिए करना पड़ा था 24 साल इंतजार
भारत ने पहली बार 1934 के लंदन कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लिया था. उसी साल भारत का पदकों का खाता भी खुला. पहलवान राशिद अनवर ने कुश्ती में सिल्वर मेडल जीतकर इतिहास रचा. हालांकि, भारत को पहला गोल्ड मेडल जीतने के लिए 24 साल तक इंतजार करना पड़ा. यह इंतजार साल 1958 में खत्म हुआ.
उस साल वेल्स के कार्डिफ शहर में कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन हुआ था. यहीं भारत के महान धावक मिल्खा सिंह ने देश को पहला गोल्ड मेडल दिलाया और नया इतिहास बना दिया. मिल्खा सिंह ने 440 गज की दौड़ में हिस्सा लिया था. इस मुकाबले में उन्होंने शानदार गति और दमदार प्रदर्शन दिखाया. उन्होंने 46.71 सेकंड में दौड़ पूरी कर पहला स्थान हासिल किया था और भारत के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स में पहला गोल्ड मेडल जीता था.
NEERAJ WINS THE SILVER AT CWG 2026 ????
— The Khel India (@TheKhelIndia) July 31, 2026
An incredible return from injury as he records a Season Best throw of 85.83m
THE CONSISTENCY NEVER STOPS! ???????????? pic.twitter.com/ZoAxWVTKhq
2030 में भारत फिर करेगा मेजबानी
कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 की मेजबानी भारत को मिल गई है. यह ऐतिहासिक आयोजन गुजरात के अहमदाबाद में होगा, जहां कॉमनवेल्थ स्पोर्ट की जनरल असेंबली में भारत की मेजबानी को मंजूरी दी गई. 2030 के खेल खास होंगे, क्योंकि कॉमनवेल्थ गेम्स की 100वीं वर्षगांठ होगी. भारत दूसरी बार कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी करेगा. इससे पहले 2010 में नई दिल्ली में इन खेलों का सफल आयोजन हुआ था.
2030 के संस्करण के लिए अहमदाबाद के आधुनिक खेल परिसरों और विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल किया जाएगा. इस आयोजन में 15 से 17 खेल शामिल किए जाने की योजना है, जबकि अंतिम खेल कार्यक्रम बाद में तय होगा. 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी को भारत के लिए वैश्विक खेल आयोजनों की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. यह आयोजन देश की खेल अवसंरचना को नई पहचान देगा और 2036 ओलंपिक की मेजबानी की भारत की महत्वाकांक्षा को भी मजबूती प्रदान करेगा.
INDIA IS AT 8TH PLACE AFTER DAY 3 ????????
— The Khel India (@TheKhelIndia) July 26, 2026
Three Medals for India today:
???? Mirabai Chanu
???? Rishikanta Singh
???? Raja Muthupandi pic.twitter.com/T9EL5wJfNO
भारत का बेस्ट सीजन कौन सा रहा
कॉमनवेल्थ गेम्स 2010 में मेजबान भारत ने 38 स्वर्ण, 27 रजत और 36 कांस्य सहित कुल 101 पदक जीते थे. यह पहली बार था जब भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स में 100 से अधिक पदक हासिल किए. इस शानदार प्रदर्शन के दम पर भारत पदक तालिका में दूसरे स्थान पर रहा, जबकि ऑस्ट्रेलिया पहले स्थान पर था. कंगारुओं ने भारत की मेजबानी में हुए इस इवेंट में 177 मेडल्स जीते थे, जिसमें 74 गोल्ड, 55 सिल्वर और 48 ब्रॉन्ज मेडल जीते थे.
| वर्ष | मेजबान | गोल्ड | सिल्वर | ब्रॉन्ज | कुल पदक | रैंक |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 2010 | नई दिल्ली (भारत) | 38 | 27 | 36 | 101 | 2 |
कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के मेडल्स
| वर्ष | मेजबान | गोल्ड | सिल्वर | ब्रॉन्ज | कुल |
|---|---|---|---|---|---|
| 1934 | लंदन | 0 | 0 | 1 | 1 |
| 1938 | सिडनी | 0 | 0 | 0 | 0 |
| 1958 | कार्डिफ | 2 | 1 | 0 | 3 |
| 1966 | किंग्स्टन | 3 | 4 | 3 | 10 |
| 1970 | एडिनबर्ग | 5 | 3 | 4 | 12 |
| 1974 | क्राइस्टचर्च | 4 | 8 | 3 | 15 |
| 1978 | एडमंटन | 5 | 5 | 5 | 15 |
| 1982 | ब्रिस्बेन | 5 | 8 | 3 | 16 |
| 1990 | ऑकलैंड | 13 | 8 | 11 | 32 |
| 1994 | विक्टोरिया | 6 | 11 | 7 | 24 |
| 1998 | कुआलालंपुर | 7 | 10 | 8 | 25 |
| 2002 | मैनचेस्टर | 30 | 22 | 17 | 69 |
| 2006 | मेलबर्न | 22 | 17 | 11 | 50 |
| 2010 | नई दिल्ली | 38 | 27 | 36 | 101 |
| 2014 | ग्लासगो | 15 | 30 | 19 | 64 |
| 2018 | गोल्ड कोस्ट | 26 | 20 | 20 | 66 |
| 2022 | बर्मिंघम | 22 | 16 | 23 | 61 |
ये भी पढ़ें: Commonwealth Games 2026: 13 गोल्ड, 17 सिल्वर, 9 ब्रॉन्ज... मेडल टैली में जानिए कौन से नंबर पर पहुंचा भारत
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation





















