'अगर हत्या करें तो बचेंगे कैसे?'... दोस्त से ली सलाह, फिर उसी को मार डाला; हरदोई डबल मर्डर केस का पर्दाफाश
Hardoi Double Murder Case: उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में संडीला इलाके के चर्चित दोहरे हत्याकांड का पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा कर दिया है. पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए दो बालिग आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि तीन बाल अपचारियों को पुलिस अभिरक्षा में लिया गया है. पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि इस पूरी खौफनाक वारदात की वजह एक बाल अपचारी की बहन और मृतक अरुण चौरसिया के बीच चल रहा प्रेम प्रसंग था.
बाल अपचारी अपनी बहन से अरुण की बातचीत बंद कराने की कई बार कोशिश कर चुका था. परिजनों और दोस्तों के मना करने के बावजूद अरुण नहीं माना और लगातार संपर्क में रहा. इससे नाराज होकर आरोपियों ने अरुण को रास्ते से हटाने की साजिश रच डाली. अरुण के साथ उसका दोस्त अभिषेक भी इस खौफनाक साजिश का शिकार बन गया. आरोपियों ने दोनों को कोल्ड ड्रिंक पार्टी करने के बहाने बुलाया और फिर मौत के घाट उतार दिया.
सुनियोजित तरीके से तैयार किया गया प्लान
पुलिस की पूछताछ में खुलासा हुआ कि मुख्य साजिश एक बाल अपचारी ने अपने साथी प्रमोद और कुलदीप के साथ मिलकर रची थी. हत्या की नियत से वारदात से दो दिन पहले ही खेत में लगा एक लंबा बांस काटकर दो मजबूत डंडे तैयार किए गए थे. इन डंडों को निर्माणाधीन पानी की टंकी के पास छिपाकर रख दिया गया था. योजना के अनुसार 29 जुलाई की शाम को आरोपी प्रमोद ने अरुण और अभिषेक को पार्टी करने का न्योता दिया.
दोनों दोस्त बिना किसी शक के पार्टी में जाने के लिए तैयार हो गए. रास्ते में सभी ने मिलकर कोल्ड ड्रिंक, प्लास्टिक के गिलास और नमकीन खरीदी. इसके बाद सभी लोग निर्माणाधीन इमारत की छत पर बैठकर पार्टी करने लगे. उन्हें इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि इमारत के नीचे पहले से ही तमंचा और बांस के डंडे छिपाकर रखे गए हैं.
पुलिस से बचने के लिए मांगी थी सलाह
पार्टी के दौरान ही आरोपी प्रमोद ने चालाकी से अभिषेक से पूछा कि अगर किसी की हत्या कर दी जाए तो पुलिस के पकड़े जाने से कैसे बचा जा सकता है. अभिषेक को इस साजिश का अहसास नहीं था, इसलिए उसने सलाह दी कि वारदात के समय अपना मोबाइल कभी बंद नहीं करना चाहिए. मोबाइल किसी दूसरे व्यक्ति को देकर उससे सामान्य बात कराते रहना चाहिए ताकि पुलिस लोकेशन ट्रेस न कर पाए.
आरोपियों ने हत्या के बाद ठीक इसी तरीके का इस्तेमाल किया. उन्होंने अपने मोबाइल फोन अपने भाइयों को थमा दिए और उन्हें फोन चालू रखने की हिदायत दी ताकि पुलिस को गुमराह किया जा सके और उनकी लोकेशन कहीं और दिखाई दे.
डंडों और ईंट से किया जानलेवा हमला
छत पर करीब एक घंटे तक पार्टी करने के बाद सभी लोग नीचे उतरे. नीचे पहुंचते ही पहले से तय योजना के तहत बाल अपचारी ने बांस के डंडे से अरुण के सिर पर ताबड़तोड़ वार करने शुरू कर दिए. अचानक हुए इस हमले से घबराकर अभिषेक अपनी जान बचाकर भागने लगा. हालांकि, कुलदीप और उसके अन्य साथियों ने अभिषेक को दौड़ाकर धक्का दे दिया और जमीन पर गिरा दिया.
इसके बाद प्रमोद और अन्य आरोपियों ने बांस के डंडों, ईंटों और पत्थरों से दोनों दोस्तों पर बेरहमी से हमला कर दिया. जब अरुण की सांसें चलती हुई दिखाई दीं, तो आरोपियों ने उसके चेहरे पर तमंचे से गोली मार दी ताकि उसकी मौके पर ही मौत हो जाए. हत्या करने के बाद आरोपियों ने दोनों के मोबाइल निकाल लिए और अपने हथियार छिपाकर फरार हो गए.
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सर्विलांस और सुराग से हुआ पर्दाफाश
पुलिस जांच के दौरान एक बड़ा सुराग तब मिला जब परिजनों ने बताया कि अरुण घर से निकलते वक्त प्रमोद के साथ पार्टी में जाने की बात कहकर गया था. पुलिस ने तुरंत प्रमोद को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की. सर्विलांस और तकनीकी साक्ष्यों की मदद से जब कड़ियां जोड़ी गईं, तो पूरी साजिश का पर्दाफाश हो गया.
पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर घटना में इस्तेमाल किया गया तमंचा, खोखा कारतूस, दोनों मृतकों के मोबाइल फोन, बांस के डंडे और पार्टी का सामान बरामद कर लिया है. पुलिस प्रशासन का कहना है कि पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा रही है.
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मैसूर में PM मोदी ने युवाओं को बताया देश की सबसे बड़ी ताकत, बोले- इन्हीं के दम पर बढ़ रही अर्थव्यवस्था
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मैसूरु में श्री रामकृष्ण आश्रम के स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक युवा केंद्र (विवेक स्मारक) के उद्घाटन के अवसर पर भारत के युवाओं की जमकर प्रशंसा की, उन्होंने युवाओं को देश की सबसे बड़ी शक्ति बताया और कहा कि वे ही 21वीं सदी के भारत के विकास की मुख्य धुरी हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत के युवा आज मैन्युफैक्चरिंग, इनोवेशन और डिजिटल इकॉनमी में देश की तेज़ी से हो रही तरक्की के पीछे मुख्य ड्राइविंग फ़ोर्स बनकर उभरे हैं, इसलिए भारत अपनी युवा शक्ति के दम पर वैश्विक पटल पर एक नई पहचान बना रहा है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के दूरदर्शी विज़न का भी ज़िक्र किया और ज़ोर देकर कहा कि शिक्षा, बराबरी और सेवा ही देश की तरक्की की सच्ची बुनियाद हैं, इन तीनों स्तंभों पर ही एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव है।
पीएम मोदी ने देश की प्रमुख उपलब्धियों को सीधे तौर पर युवाओं की काबिलियत से जोड़ा, उन्होंने बताया कि सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग के नए सफ़र में भारत तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और यह सब युवाओं की ही देन है। उन्होंने यह भी कहा कि आज भारत की इकॉनमी दुनिया में सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली इकॉनमी में से एक है, और इसका श्रेय भी भारत के युवाओं की ताकत को ही जाता है। प्रधानमंत्री ने गर्व से घोषणा की कि भारत अब अपने युवाओं के सामर्थ्य की वजह से दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन गया है, साथ ही यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फ़ोन बनाने वाला देश भी बन चुका है, जिसके मेड-इन-इंडिया डिजिटल सॉल्यूशन दुनिया भर के कई देशों को प्रेरणा दे रहे हैं।
भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का श्रेय युवाओं के सामर्थ्य को: पीएम मोदी
मैसूर में अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने स्वामी विवेकानंद जी के विचारों को भी याद किया और कहा कि स्वामी विवेकानंद जी युवाओं की शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का सबसे मजबूत आधार मानते थे। उन्होंने यह देखा था कि कैसे दुनिया के देश अपने युवाओं को शिक्षित बना रहे हैं, लेकिन उस समय दुर्भाग्य से भारत गुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ था और भारत के युवा भी इन जंजीरों से मुक्त नहीं थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि उस दौर से लेकर आज तक भारत के युवा ने एक लंबी और गौरवपूर्ण यात्रा तय की है, भारत का जो युवा कभी गुलामी की जंजीरों में था, आज वही युवा दुनिया के विकास को गति दे रहा है। उन्होंने फिर दोहराया कि आज भारत की अर्थव्यवस्था सबसे तेज गति से आगे बढ़ रही है, और यह सब भारत के युवाओं के सामर्थ्य की वजह से ही संभव हो पाया है। आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है, वो भी भारत के युवाओं के सामर्थ्य से ही विकसित हुआ है।
पीएम मोदी ने स्वामी विवेकानंद के जीवन में मैसूरु की भूमिका को किया याद
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि व्यक्ति से विभूति का निर्माण एकाएक नहीं होता, इसके लिए हमें जीवन की अनगिनत परीक्षाएं देनी होती हैं, साधनाएं करनी होती हैं, तप करना होता है, खुद को तपाना और खपाना पड़ता है। उन्होंने समझाया कि ख्याति के बाद तो संसार व्यक्ति के पीछे खड़ा होता है, लेकिन तप के समय महान विभूतियों को पहचानना आसान नहीं होता, जो साधक को उसकी तपस्या में पहचानता है, वही उसकी सिद्धि का सहभागी भी होता है। इसलिए, स्वामी विवेकानंद जी के जीवन में मैसूरु का इतना अहम योगदान था, करीब 130 वर्ष पहले स्वामी जी एक युवा संन्यासी के रूप में भ्रमण करते हुए यहां आए थे, तब उनकी प्रसिद्धि वैसी नहीं थी, लेकिन उनके विचार उतने ही ऊंचे थे। उस समय उन्हें जिन लोगों ने पहचाना और जो उनके साथ जुड़े, उनमें से एक प्रमुख मैसूरु के तत्कालीन महाराजा भी थे, जिन्होंने स्वामी जी के विचारों को समझा और उनका समर्थन किया।
स्वामी विवेकानंद जी ने भारतीय चेतना को आत्मसात किया था, उन्होंने शास्त्रों को आत्मसात किया था और यह सिखाया था कि वास्तव में वही जीता है, जो दूसरों के लिए जीता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाएं हों या प्राकृतिक आपदा में राहत कार्य, श्री रामकृष्ण आश्रम ने स्वामी विवेकानंद जी की इस विरासत को जीवंत रखा है और उनके आदर्शों का पालन किया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह विवेक स्मारक साधकों और श्रद्धालुओं के लिए आत्मिक उत्थान का एक महत्वपूर्ण तीर्थ बनेगा, जो लोगों को प्रेरणा देगा और उन्हें स्वामी विवेकानंद के दिखाए मार्ग पर चलने के लिए प्रोत्साहित करेगा। मैसूर में इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम से पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आंध्र प्रदेश के विजयनगरम स्थित भोगपुरम में कई विकास परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी थी, और वहां भी उन्होंने एक बड़े कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्र निर्माण के लिए अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई थी।
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