नई दिल्ली: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा ने शुक्रवार को कहा कि देश में अब तक इबोला वायरस से संक्रमित किसी भी मरीज की पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार इस संभावित महामारी को लेकर पूरी तरह सतर्क है और आवश्यक एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं।
सरकार की सतर्कता पर जोर
नड्डा ने कहा, "हमें इबोला के किसी भी मामले की सूचना नहीं मिली है। हालांकि, हम स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं।" उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय स्थिति की निगरानी कर रहा है और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठनों के साथ समन्वय स्थापित कर रहा है।
जागरूकता और तैयारी
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि देश भर के अस्पतालों को इबोला के संभावित मामलों से निपटने के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया गया है। आइसोलेशन वार्ड स्थापित किए जा रहे हैं और स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। उन्होंने लोगों से किसी भी अफवाह पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर विश्वास करने की अपील की।
अंतरराष्ट्रीय स्थिति
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इबोला के प्रकोप को लेकर चिंता व्यक्त की है, खासकर पश्चिमी अफ्रीका में। भारत सरकार WHO के दिशानिर्देशों का पालन कर रही है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर काम कर रही है ताकि इस बीमारी के प्रसार को रोका जा सके।
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पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव के खिलाफ़ शुक्रवार, 31 जुलाई को संसद परिसर में राम मंदिर चंदा घोटाले को लेकर किए गए प्रदर्शन के मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है। यह शिकायत याचिकाकर्ता सूर्य मैथिल ने जहांगीरपुरी पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई गई। न्यूज़ एजेंसी ANI से बात करते हुए सूर्य मैथिल ने कहा कि पप्पू यादव ने भगवा का अपमान किया और संसद के बाहर उनके किए गए ड्रामे को राहुल गांधी, डिंपल यादव, अवधेश प्रसाद और INDIA गठबंधन के अन्य सांसदों का समर्थन मिला। इसमें पप्पू यादव ने भगवान राम लला विराजमान की तस्वीर तक अपने पैरों के नीचे रख दी... इससे सनातनियों की भावनाओं को ठेस पहुंची है।
कल पप्पू यादव ने संसद में राम मंदिर के कथित चंदा घोटाले पर चर्चा की विपक्ष की मांग को उजागर करने के लिए भगवा कपड़े पहने पुजारी के वेश में और हाथ में चंदा पेटी लेकर प्रदर्शन किया। लोगों का ध्यान खींचने के लिए पूर्णिया के सांसद ने हिंदू संत का वेश धारण किया और विरोध-प्रदर्शन के तहत चंदा इकट्ठा करने के लिए एक प्रतीकात्मक चंदा पेटी साथ रखी; उनका कहना था कि यह मंदिर के चंदे से जुड़ी कथित अनियमितताओं को दर्शाता है।
यह सांकेतिक विरोध तब हुआ जब विपक्ष ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर संसद मार्च के दौरान छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ अपना अभियान जारी रखा। लगातार दूसरे दिन, विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर के अंदर प्रदर्शन किया और ऐसे बैनर दिखाए जिनमें शाह की सदन में अनुपस्थिति पर सवाल उठाए गए थे। कुछ बैनरों पर लिखा था, "अमित शाह संसद से क्यों गायब हैं?" विपक्ष विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर कथित कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहा है; इस मुद्दे के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही में बार-बार बाधा आई है।
यह ताज़ा विरोध प्रदर्शन संसद द्वारा 'पब्लिक एग्ज़ामिनेशन्स (प्रिवेंशन ऑफ़ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026' को मंज़ूरी देने के एक दिन बाद हुआ है। लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों से यह बिल पास हो चुका है और अब कानून बनने के लिए इसे राष्ट्रपति की मंज़ूरी का इंतज़ार है। बिल पास होने के बावजूद, विपक्ष के सदस्यों का लगातार विरोध और हंगामा मॉनसून सत्र में छाया हुआ है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि अमित शाह या तो दोषी हैं या फिर अक्षम। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक स्वतंत्र जांच की मांग की है।
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