Hyundai Motor India ने रचा इतिहास, July में 75,360 Units की Record Sales के साथ दर्ज की बंपर ग्रोथ
हुंदै मोटर इंडिया लिमिटेड (एचएमआईएल) की बिक्री जुलाई 2026 में 25.4 प्रतिशत बढ़कर 75, 360 इकाई रही। यह कंपनी की अब तक की सबसे अधिक मासिक बिक्री है। एचएमआईएल ने जारी बयान में कहा कि घरेलू बाजार में भी बिक्री अब तक की सर्वाधिक 54,210 इकाई रही, जो पिछले वर्ष के इसी माह से 23.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।
निर्यात 31.4 प्रतिशत वृद्धि के साथ 21,150 इकाई रहा। कंपनी के प्रबंध निदेशक (एमडी) एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) तरुण गर्ग ने कहा, ‘‘हमने नयी तिमाही की शुरुआत मजबूत प्रदर्शन के साथ की है।
जुलाई में कुल 75,360 इकाई की बिक्री (धरेलू और निर्यात 25.4 प्रतिशत सालाना आधार पर) कंपनी के इतिहास की सबसे बड़ी मासिक बिक्री है, जो ग्राहकों के हुंदै ब्रांड पर बढ़ते भरोसे को दर्शाती है।’’ उन्होंने कहा कि जुलाई में कंपनी का निर्यात पिछले 100 महीनों में सबसे अधिक रहा है। यह उपलब्धि ‘मेक इन इंडिया, मेड फॉर द वर्ल्ड’ के प्रति कंपनी की प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है।
ATF Price Hike: हवाई सफर होगा महंगा! विमान ईंधन की कीमतों में ₹5 प्रति लीटर की बढ़ोतरी
ATF price hike: देश में विमान यात्रा से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। बेंचमार्क दरों में आए अंतर के चलते विमान ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी गई है।
सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों से मिली जानकारी के अनुसार, इस बढ़ोतरी के बाद अब एटीएफ की दरें 110 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 115 रुपये प्रति लीटर हो गई हैं।
जुलाई की राहत के बाद फिर बढ़े दाम
एटीएफ की दरों में किया गया यह ताजा संशोधन 1 जुलाई को की गई कटौती के बिल्कुल विपरीत है। बता दें कि इससे पहले 1 जुलाई को एटीएफ के दामों में इसी अनुपात में कटौती की गई थी, लेकिन अब अगस्त की शुरुआत में कीमतों में दोबारा 5 रुपये प्रति लीटर का इजाफा कर दिया गया है।
कैसे तय होती हैं कीमतें?
एटीएफ और कमर्शियल गैस जैसी ऊर्जा कीमतें हर महीने की पहली तारीख को संशोधित की जाती हैं। इन कीमतों का निर्धारण अंतरराष्ट्रीय बाजार की बेंचमार्क कीमतों और विदेशी विनिमय दरों (फॉरेक्स रेट्स) के आधार पर किया जाता है। इसके अलावा, राज्यों में लागू स्थानीय करों जैसे वैट (VAT) के कारण इन दरों में राज्य-दर-राज्य थोड़ा अंतर भी देखने को मिलता है।
कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में कटौती
हालांकि, होटलों और रेस्तरां जैसे व्यावसायिक संस्थानों में इस्तेमाल होने वाले कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में बड़ी कटौती की गई है। शनिवार, 1 अगस्त को 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम सीधे 192 रुपये कम कर दिए गए हैं।
जानिए नए दाम और दिल्ली में कीमतें
सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों से मिली जानकारी के अनुसार, दिल्ली में 19 किलोग्राम का कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर अब 2,930 रुपये की जगह 2,738 रुपये में मिलेगा। वहीं, दूसरी ओर एटीएफ (ATF) की दरें 110 रुपये से बढ़कर 115 रुपये प्रति लीटर हो गई हैं।
यह लगातार दूसरा महीना है जब कमर्शियल एलपीजी के दामों में कटौती की गई है। इससे पहले 1 जुलाई को भी इसमें 183.5 रुपये की कटौती की गई थी। वहीं एटीएफ के मामले में यह संशोधन 1 जुलाई को की गई उतनी ही कटौती के विपरीत है।
पश्चिम एशिया संकट और कीमतों का उतार-चढ़ाव
1 जुलाई और 1 अगस्त को कमर्शियल एलपीजी दरों में की गई ये दो कटौतियां जून में पश्चिम एशिया संकट के कारण कीमतों के रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद आई हैं।
फरवरी के अंत में संघर्ष शुरू होने के बाद, कमर्शियल एलपीजी की कीमतें फरवरी में 1,740.50 रुपये से बढ़कर जून में 19 किलोग्राम के सिलेंडर पर 3,113.50 रुपये तक पहुंच गई थीं, यानी इसमें 1,373 रुपये की भारी बढ़ोतरी हुई थी।
इसके अलावा, 5 किलोग्राम वाले बाजार मूल्य वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत भी 808.50 रुपये से घटाकर 762 रुपये कर दी गई है।
घरेलू एलपीजी, पेट्रोल और डीजल के क्या हैं हाल?
घरेलू रसोईघरों में इस्तेमाल होने वाले घरेलू एलपीजी के दाम 14.2 किलोग्राम के सिलेंडर पर 942 रुपये पर अपरिवर्तित बने हुए हैं। घरेलू एलपीजी के दाम आखिरी बार 7 जून को 29 रुपये प्रति सिलेंडर बढ़ाए गए थे। पश्चिम एशिया संकट के कारण आपूर्ति बाधित होने और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों में उछाल के बाद मार्च में दरों में 60 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी।
देश की सबसे बड़ी तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के चेयरमैन ए.एस. साहनी ने शुक्रवार को कहा था कि लागत से काफी कम दरें होने के कारण प्रति 14.2 किलोग्राम घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर 503 रुपये का अंडर-रिकवरी या घाटा हो रहा है।
इसके अलावा, पेट्रोल और डीजल की कीमतें, जिनमें मई में लगभग 7.50 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी, वे भी स्थिर और अपरिवर्तित बनी हुई हैं। आपको बता दें कि हर महीने की पहली तारीख को अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क कीमतों और विदेशी विनिमय दरों के आधार पर ये कीमतें संशोधित की जाती हैं, जो स्थानीय वैट जैसे करों के आधार पर राज्य-दर-राज्य भिन्न होती हैं।
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