जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कुलगाम ज़िले में एक आतंकी हमले में दो मज़दूरों की हत्या की कड़ी निंदा की। एक्स पर एक पोस्ट में जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री ने इस घटना को कायरतापूर्ण और बेमतलब बताया और मारे गए लोगों के परिवारों को मुख्यमंत्री राहत कोष से 10 लाख रुपये की मुआवज़ा राशि देने की घोषणा की। एक्स पोस्ट में कहा गया मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की और दोहराया कि सरकार इस मुश्किल समय में उनके साथ मज़बूती से खड़ी है। शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर के कुलगाम ज़िले के केलम इलाके में आतंकवादियों की गोलीबारी में एक बाहरी मज़दूर की मौत हो गई और दूसरा घायल हो गया। घायल दूसरे मज़दूर की आज SKIMS अस्पताल में मौत हो गई। दोनों मज़दूर बीस-बाईस साल के थे और छत्तीसगढ़ के रहने वाले थे।
क्या रिएक्शंस आएं
इस हमले की निंदा करते हुए, डिप्टी सीएम सुरिंदर चौधरी ने ANI से कहा, "यह बहुत दुखद है। पहले पहलगाम और अनंतनाग में भी ऐसी घटनाएं हुई थीं, और अब रोजी-रोटी कमाने आए दो प्रवासी मजदूरों की हत्या कर दी गई है... हम ऐसी स्थिति में पहुंच गए हैं जहां हम बार-बार ऐसे हमलों की निंदा करते-करते थक चुके हैं। आर्टिकल 370 को हटाया गया और राज्य को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया, इस वादे के साथ कि आतंकवाद खत्म हो जाएगा। छह साल बाद भी अगर हत्याएं हो रही हैं।
J&K पुलिस और सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर दी है और दोषियों को सज़ा दिलाने के लिए ऑपरेशन शुरू कर दिया है। छत्तीसगढ़ के एक और घायल मज़दूर को तुरंत इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया है। पीड़ित परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं और मैं घायलों के जल्द ठीक होने की प्रार्थना कर रहा हूँ। J&K प्रशासन और पूरा देश इन परिवारों के साथ खड़ा है।
इस हमले के पीछे कौन है?
द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) एक ऐसा संगठन जिसे पाकिस्तान समर्थित लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का प्रॉक्सी और उससे निकला हुआ गुट माना जाता है। उसने इस हमले की ज़िम्मेदारी ली है। सोशल मीडिया पर फैल रहे संदेशों के अनुसार, इस समूह ने बाहरी लोगों और जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवानों पर और हमले करने की चेतावनी दी है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि यह वही समूह है जिसने 22 जुलाई को अनंतनाग में पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया था।
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