फिल्म ‘साहिया’ की सेंसर प्रक्रिया पर विवाद:प्रोड्यूसर ने CBFC पर देरी का आरोप लगाया,, बोर्ड बोला- प्रायोरिटी स्कीम खत्म हो चुकी
फिल्म ‘साहिया’ की सेंसर प्रक्रिया में कथित देरी को लेकर इसके प्रोड्यूसर और डायरेक्टर संजय शर्मा ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि फिल्म को प्रायोरिटी कैटेगरी में सबमिट किया गया था, लेकिन तय समयसीमा में प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। इससे फिल्म के रिलीज प्लान पर असर पड़ रहा है और प्रोड्यूसर्स को फाइनेंशियल नुकसान हो रहा है। बता दें कि फिल्म ‘साहिया’ की शूटिंग झारखंड के नेतरहाट क्षेत्र में की गई है। फिल्म में नीरज काबी, शांतनु माहेश्वरी और रिंकू राजगुरु मुख्य भूमिकाओं में हैं। वहीं, संगीत में सोना मोहपात्रा, जावेद अली, रिचा शर्मा, कृष्णा बेउरा और स्वानंद किरकिरे ने अपनी आवाज दी है। फिल्म के गीत समीर अंजन और स्वानंद किरकिरे ने लिखे हैं। संजय शर्मा ने कहा कि नियमों के अनुसार तत्काल श्रेणी में आवेदन करने पर कुछ ही दिनों के भीतर फिल्म की स्क्रीनिंग हो जानी चाहिए थी, लेकिन उनकी फिल्म की स्क्रीनिंग करीब डेढ़ महीने बाद की गई। उन्होंने कहा कि स्क्रीनिंग के दौरान यह बताया गया कि फिल्म में नक्सलवाद की पृष्ठभूमि होने के कारण इसे रिव्यू कमेटी के पास भेजा जाएगा। वहीं, संजय शर्मा का कहना है कि ‘साहिया’ नक्सलवाद पर आधारित फिल्म नहीं है, बल्कि जंगल की पृष्ठभूमि में बुनी गई एक पारिवारिक और मानवीय प्रेम कहानी है। फिल्म में किसी भी प्रकार की हिंसक विचारधारा या नक्सलवाद का समर्थन अथवा प्रचार नहीं किया गया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि स्क्रीनिंग के बाद 10 दिन से अधिक समय बीत जाने के बावजूद उन्हें अब तक यह जानकारी नहीं दी गई है कि फिल्म को औपचारिक रूप से रिव्यू कमेटी को भेजा गया है या नहीं। साथ ही, फिल्म के प्रमाणन को लेकर भी कोई अंतिम निर्णय नहीं मिला है। संजय शर्मा ने कहा कि अगर बोर्ड को किसी फिल्म पर कोई आपत्ति है, तो नियमों के हिसाब से उसकी सख्ती से जांच होनी चाहिए। हालांकि, यह प्रोसेस भी समय पर होना चाहिए, ताकि प्रोड्यूसर और डायरेक्टर को बेवजह देरी का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि ऐसी देरी से न सिर्फ फाइनेंशियल नुकसान होता है, बल्कि फिल्म की रिलीज स्ट्रेटेजी और प्रमोशनल कैंपेन पर भी असर पड़ता है। संजय शर्मा ने कहा कि उन्होंने पूरी मेहनत और समर्पण के साथ यह फिल्म बनाई है। इससे पहले वे दो शॉर्ट फिल्में बना चुके हैं, लेकिन ‘साहिया’ उनकी पहली बड़ी फीचर फिल्म है। उन्होंने कहा कि जब कोई नया प्रोड्यूसर-डायरेक्टर अपना सब कुछ लगाकर फिल्म बनाता है और फिर सर्टिफिकेशन प्रोसेस में महीनों की देरी होती है, तो यह बेहद निराशाजनक होता है। संजय शर्मा ने विश्वास जताया कि फिल्म को जल्द प्रमाणन मिलेगा और दर्शक इसे देख सकेंगे। उन्होंने दावा किया कि ‘साहिया’ इस साल की सबसे खूबसूरत प्रेम कहानियों में से एक साबित हो सकती है, क्योंकि इसकी कहानी जंगलों, नदियों और प्रकृति के बीच मानवीय रिश्तों को बेहद संवेदनशील तरीके से प्रस्तुत करती है। वहीं, इस मामले में CBFC का पक्ष जानने के लिए दैनिक भास्कर ने संबंधित अधिकारी से संपर्क किया। उनकी तरफ से मेल आया, कृपया ध्यान दें कि सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) एक क्वासी-ज्यूडिशियल बॉडी है। इसलिए बोर्ड किसी भी एक केस पर कमेंट नहीं करता है, खासकर उन मामलों में जहां प्रोसिजरल फॉर्मैलिटीज अभी भी चल रही हैं और एप्लीकेशन पर फाइनल प्रोसेसिंग CBFC ने पूरी नहीं की है।आप यह भी ध्यान दें कि सभी आवेदन संबंधित एक्ट और नियमों के तहत निर्धारित समय-सीमा के अनुसार ही प्रोसेस किए जाते हैं। प्रायोरिटी स्कीम अब लागू नहीं है, क्योंकि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने इसे कई सप्ताह पहले ही समाप्त कर दिया है। एप्लिकेंट फिल्म सर्टिफिकेशन के लिए तय ऑनलाइन पोर्टल पर फिल्म सर्टिफिकेशन के लिए किसी भी एप्लीकेशन का स्टेटस शुरू से आखिर तक ट्रैक कर सकते हैं। जवाब में आगे लिखा गया, प्रोसेस और इसके अलग-अलग स्टेज के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए, CBFC वेबसाइट पर फिल्म सर्टिफिकेशन के ऑनलाइन पोर्टल के FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल) और यूज़र गाइड देखी जा सकती है। फिल्म सर्टिफिकेशन के लिए किए गए किसी भी आवेदन की स्थिति एप्लिकेंट फिल्म प्रमाणन के लिए निर्धारित ऑनलाइन पोर्टल पर शुरू से अंत तक ट्रैक कर सकते हैं। प्रोसेस और उसके विभिन्न चरणों की अधिक जानकारी के लिए CBFC की वेबसाइट पर उपलब्ध FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न) तथा फिल्म सर्टिफिकेशन के ऑनलाइन पोर्टल की यूजर गाइड देखी जा सकती है।सादर,अध्यक्ष कार्यालयकेंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) वहीं, फिल्म को लेकर एक और विवाद सामने आया। फिल्ममेकर अविनाश दास ने सोशल मीडिया पर फिल्म के पोस्टर पर आपत्ति जताई। उनका दावा किया कि यह पोस्टर गलत, बिना अनुमति के जारी किया गया और विवादित है। उन्होंने कहा कि 'साहिया' का निर्देशन सिर्फ उन्होंने किया है, लेकिन पोस्टर में उनके नाम की स्पेलिंग गलत लिखी गई और उन्हें मिलने वाला कानूनी क्रेडिट भी कम करके दिखाया गया। वहीं, अविनाश दास ने सार्वजनिक बयान जारी कर दावा किया है कि फिल्म का डायरेक्शन केवल उन्होंने किया है और वह इसके को-प्रोड्यूसर भी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया और ट्रेड प्लेटफॉर्म्स पर जारी पोस्टर और प्रमोशनल मटीरियल गलत, भ्रामक और बिना उनकी अनुमति के प्रसारित किए जा रहे हैं। अविनाश दास के मुताबिक, पोस्टर पर 'A Film by Sanjay Sharma' और 'Directed by Sanjay Sharma and Abnav Das' लिखा गया है, जबकि सही क्रेडिट 'A Film by Avinash Das' और 'Directed by Avinash Das' होना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके नाम की स्पेलिंग भी गलत लिखी गई है। अविनाश दास ने इस मामले में IFTDA, IMPPA और CBFC में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है।
2 राज्य, दोनों में ही BJP की सरकार; केंद्र सरकार सुलझा पाएगी एक दशक पुरानी लड़ाई?
अधिकारियों ने बताया कि चूंकि ओडिशा, छत्तीसगढ़ और केंद्र तीनों जगह भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकारें हैं, इसलिए केंद्र ने दोनों राज्यों को मामले में तकनीकी परामर्श जारी रखने का सुझाव दिया है।
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