जबलपुर: वाहन चेकिंग में पुलिस पकड़ा 20 किलो गांजा, फरार चालक की तलाश जारी
जबलपुर पुलिस के हाथ एक बड़ी सफलता लगी है। दरअसल, शुक्रवार रात वाहन चेकिंग के दौरान पुलिस ने डॉक्टर का लोगो लगी हुई एक कार से 20 किलो गांजा बरामद किया है। जानकारी के मुताबिक कार चालक ओड़िशा से नशीला पदार्थ लेकर छत्तीसगढ़ होते हुए मध्य प्रदेश में दाखिल हुआ था।
जबलपुर से होते हुए यह किसी दूसरे जिले की तरफ जा रहा था। मुखबिर की सूचना के आधार पर खमरिया थाना पुलिस ने अमझर घाटी के नीचे वाहन चेकिंग शुरू की। उसी दौरान ये वाहन पुलिस की पकड़ में आया है। हालांकि, ड्राइवर अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गया।
चेकिंग पॉइंट देख दौड़ाई कार
जब पुलिस ने वाहन चेकिंग शुरू की तो चेकिंग पॉइंट देखकर ड्राइवर ने कार को जंगल की ओर दौड़ा दिया। इस दौरान वह रास्ता भटक गया और कार कीचड़ में फंस गई। पुलिस ने पीछा किया तो कार तो मिली लेकिन ड्राइवर मौके से फरार हो गया था।
कार में मिला 20 किलो गांजा
जब कीचड़ में फंसी हुई कार की पुलिस ने तलाशी ली तो उसमें दो-दो किलो गांजा के दस पैकेट रखे हुए थे। पुलिस ने कुल मिलाकर 20 किलो गांजा बरामद किया है जिसकी कीमत 5 लाख रुपए से ज्यादा बताई जा रही है। अब कार नंबर के आधार पर चालक की तलाश की जा रही है। इस पर छत्तीसगढ़ की नंबर प्लेट लगी हुई है।
मुखबिर ने दी थी सूचना
जबलपुर एसपी संपत उपाध्याय के निर्देश पर सीएसपी सतीश कुमार साहू की नेतृत्व में खमरिया थाना पुलिस द्वारा वाहन चेकिंग की जा रही थी। तभी प्रधान आरक्षक आरती सोनकर को मुखबिर ने सूचना दी कि एक कार में लाखों रुपए का गांजा जबलपुर लाया जा रहा है। इसी आधार पर पुलिस ने चेकिंग शुरू की।
पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक का नंबर CG04 HB6745 को जब्त किया गया है जो छत्तीसगढ़ का नंबर है। इस पर डॉक्टर का लोगो बना हुआ है। जबलपुर होते हुए तस्कर किसी अन्य जिले की तरफ जा रहा था। पुलिस ने काफी दूर तक कार का पीछा कर उसे जब्त किया।
जानवर को लगी टक्कर
इस मामले में पुलिस द्वारा बताया गया कि वाहन चालक ने भागने के दौरान सड़क पर बैठे जानवर को टक्कर मार दी जिससे उसकी मौत हो गई। ग्रामीणों ने काफी दूर तक कार का पीछा किया। कार तो बरामद कर ली गई लेकिन चालक पकड़ में नहीं आया है। पुलिस चालक की तलाश में जुटी हुई है।
इंदौर से साइबर फ्रॉड का बड़ा मामला आया सामने, 15 करोड़ के बिजनेस लोन का झांसा देकर कारोबारी से की गई डेढ़ करोड़ की ठगी
इंदौर में बड़े कारोबारियों को निशाना बनाकर साइबर ठगी करने वाले गिरोह का नेटवर्क लगातार सामने आ रहा है। दरअसल ताजा मामले में एक कारोबारी को 15 करोड़ रुपये का बिजनेस लोन दिलाने का झांसा दिया गया और अलग-अलग बहानों से उससे डेढ़ करोड़ रुपये से ज्यादा वसूल लिए गए। शिकायत के बाद पुलिस और साइबर सेल पूरे मामले की जांच कर रही है।
दरअसल शुरुआती जांच में सामने आया है कि ठग खुद को वित्तीय सलाहकार या लोन उपलब्ध कराने वाले प्रतिनिधि बताते थे। वे आसान प्रक्रिया, कम समय में मंजूरी और बड़ी रकम का भरोसा देकर कारोबारियों का विश्वास जीतते थे। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क से और कितने लोग प्रभावित हुए हैं।
इंदौर साइबर फ्रॉड में कैसे फंसाए गए कारोबारी?
दरअसल पीड़ित कारोबारी के वकील के मुताबिक, गिरोह खास तौर पर उन उद्योगपतियों और कारोबारियों को निशाना बनाता था जिन्हें बैंकों से बड़ी राशि का लोन मिलने में दिक्कत होती थी। आरोप है कि ठग वीडियो कॉल के दौरान नकदी से भरे कार्टन दिखाते थे और दावा करते थे कि उनमें 15 करोड़ रुपये तैयार रखे हैं। इसके बाद प्रोसेसिंग फीस, एडवांस ब्याज, एनओसी, रजिस्ट्रेशन, लीगल चार्ज और अन्य औपचारिकताओं के नाम पर अलग-अलग किस्तों में पैसे जमा करवाए जाते थे। कारोबारी का यह भी आरोप है कि कुछ समय के लिए उसका मोबाइल लेकर उसमें मौजूद दस्तावेज, ई-मेल और अन्य डिजिटल जानकारी स्कैन की गई। बाद में उसके नाम से ऐसे दस्तावेज तैयार किए गए जिन पर उसने कभी हस्ताक्षर नहीं किए थे। जब लंबे समय तक लोन जारी नहीं हुआ और लगातार नई रकम मांगी जाती रही, तब उसे ठगी का एहसास हुआ। हालांकि सामाजिक बदनामी के डर से उसने तुरंत शिकायत दर्ज नहीं कराई।
200 से ज्यादा बैंक खाते रडार पर
वहीं इस मामले की सबसे अहम बात यह है कि जांच एजेंसियों को यह कोई अकेली घटना नहीं लग रही। इससे पहले भी 10 करोड़ रुपये के बिजनेस लोन के नाम पर एक कारोबारी से करीब एक करोड़ रुपये की ठगी का मामला सामने आया था। दोनों मामलों में ठगी का तरीका लगभग एक जैसा बताया जा रहा है। जांच में पता चला है कि ताजा मामले में वसूली गई रकम 200 से अधिक बैंक खातों में ट्रांसफर की गई, जिससे यह संकेत मिलता है कि यह एक संगठित अंतरराज्यीय साइबर नेटवर्क हो सकता है। जांच के दौरान कुछ दक्षिण भारतीय फिल्म कलाकारों से जुड़े कथित लिंक की भी पड़ताल की जा रही है, लेकिन फिलहाल पुलिस ने इस संबंध में किसी अभिनेता या अभिनेत्री की भूमिका की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इसी वजह से जांच एजेंसियां वित्तीय लेनदेन, बैंक खातों और डिजिटल सबूतों की गहराई से जांच कर रही हैं।
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