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रूस पर यूक्रेन की बड़ी एयरस्ट्राइक, दनादन दागे 822 ड्रोन; धुआं-धुआं हुई फैक्ट्री

यूक्रेन ने रविवार को रूस के विभिन्न हिस्सों पर सैकड़ों ड्रोन से हमला बोल दिया। इस हमले में कम से कम छह लोगों की मौत हो गई। यह युद्ध शुरू होने के बाद से यूक्रेन का सबसे बड़े हवाई हमलों में से एक है…

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Commonwealth Games 2026: बिहार के झंडू कुमार ने CWG 2026 में जीता भारत का पहला मेडल, रोंगटे खड़े कर देगी संघर्ष की कहानी

Jhandu Kumar Commonwealth Games 2026: ग्लास्गो में चल रहे 2026 राष्ट्रमंडल खेलों (Commonwealth Games) में भारत के अभियान की शुरुआत बेहद शानदार और ऐतिहासिक रही है। बिहार के लाल झंडू कुमार ने देश के लिए इन खेलों का पहला मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है। उन्होंने पुरुषों की हेवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए देश को ब्रॉन्ज मेडल (कॉस्य पदक) दिलाया है। उनकी इस बड़ी उपलब्धि से न सिर्फ बिहार बल्कि पूरे देश का नाम भी रोशन हुआ है।

संघर्षों से भरा रहा है झंडू कुमार का सफर
इस मेडल के पीछे की कहानी जितनी गौरवशाली है, उतनी ही वह संघर्ष, त्याग और अटूट दृढ़ संकल्प से भरी हुई है। यह सफलता एक ऐसे शख्स की है जिसने कभी सब्जी बेचने और ई-रिक्शा चलाने का काम किया था, और आज अपनी कड़ी मेहनत के दम पर एक अंतरराष्ट्रीय एथलीट बन गया है।

झंडू कुमार मूल रूप से बिहार के नालंदा जिले के हरनौत बाजार के रहने वाले हैं और उनका संबंध एक बहुत ही साधारण परिवार से है, जो पहले एक छोटी सी सब्जी की दुकान चलाता था।

कोरोना काल में उठानी पड़ी थी भारी आर्थिक तंगी
जिंदगी हर मोड़ पर आसान नहीं होती, और झंडू कुमार की राह में भी कई मुश्किलें आईं। कोविड-19 महामारी के दौरान जब उनका पारिवारिक व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित हुआ, तब आर्थिक तंगी के कारण उन्हें अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए ई-रिक्शा चलाना पड़ा।

दिनभर लंबे समय तक कड़ी मेहनत करने और आर्थिक संकट से जूझने के बाद भी उन्होंने खेल के प्रति अपने जुनून को कभी मरने नहीं दिया। उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व करने का अपना सपना हमेशा जिंदा रखा।

कड़ी मेहनत और पक्के इरादे से तय किया सफर
काम और कड़े प्रशिक्षण (प्रैक्टिस) के बीच संतुलन बनाते हुए झंडू ने हर दिन सुबह और शाम को प्रतियोगिताओं के लिए पसीना बहाया। उनकी यह अटूट निष्ठा आखिरकार रंग लाई और उन्हें भारत के राष्ट्रमंडल खेल दल (Commonwealth Games Squad) में जगह मिल गई।

उन्होंने ग्लासगो 2026 में भारत को पहला मेडल दिलाकर साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो इंसान सबसे बड़ी बाधाओं को भी पार कर सकता है।

देश भर के युवाओं के लिए बने प्रेरणा स्त्रोत
सब्जी बेचने और ई-रिक्शा चलाने से लेकर राष्ट्रमंडल खेलों के पोडियम पर खड़े होने तक का झंडू कुमार का यह सफर हर उस इंसान के लिए एक मिसाल है जो बड़े सपने देखता है। उनकी यह प्रेरणादायक कहानी साबित करती है कि यदि कड़ी मेहनत और पक्के विश्वास का साथ हो, तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता। आज झंडू कुमार देश भर के उभरते हुए एथलीटों और युवाओं के लिए एक जीवंत प्रेरणा बन चुके हैं।

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  Sports

छह महीने सीखी उर्दू फिर गाया पाकिस्तानी राष्ट्रगान, कौन हैं सिंगर लॉरा राइट, जिसका भारत से भी कनेक्शन

ENG vs PAK 1st test: इंग्लैंड और पाकिस्तान के बीच हेडिंग्ले में शुरू हुए पहले टेस्ट से पहले ब्रिटिश सिंगर लॉरा राइट ने पाकिस्तानी राष्ट्रगान गाकर हर किसी का दिल जीत लिया. लॉरा ने बाद में बताया कि चंद मिनटों की इस परफॉर्मेंस के लिए लॉरा ने छह महीने तक उर्दू सीखी. Fri, 21 Aug 2026 09:04:57 +0530

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