Maharashtra के Solapur में सोयाबीन मिलों ने बढ़ाए दाम, सोयाबीन तिलहन में आया सुधार
महाराष्ट्र के सोलापुर के तेल संयंत्रों के सोयाबीन का दाम बढ़ाने से शुक्रवार को सोयाबीन तिलहन के दाम में मजबूती रही। त्योहारों के मद्देनजर औद्योगिक मांग बढ़ने से पाम-पामोलीन तथा कम उपलब्धता के बीच ब्रांडेड कंपनियों की मांग बढ़ने से बिनौला तेल में भी सुधार आया। बाजार सूत्रों ने कहा कि उंचे दाम पर लिवाली कमजोर रहने के बीच सरसों तेल-तिलहन में गिरावट देखी गई। वहीं सुस्त कामकाज के बीच मूंगफली तेल-तिलहन, सोयाबीन तेल स्थिर रहे। मलेशिया एक्सचेंज दोपहर 3.30 बजे गिरावट के साथ बंद हुआ। यहां शाम का कारोबार बंद है। शिकॉगो एक्सचेंज में घट-बढ़ जारी है। कल रात यहां सुधार था। सूत्रों ने कहा कि सोलापुर में सोयाबीन के बड़े तेल संयंत्रों ने सोयाबीन तिलहन का खरीद दाम पहले के 7,620 रुपये क्विंटल से बढ़ाकर 7,660 रुपये क्विंटल कर दिया जिस कारण सोयाबीन तिलहन के दाम मजबूत रहे। दूसरी ओर लागत से नीचे बिकवाली के बीच सोयाबीन तेल के दाम स्थिर रहे। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से सहकारी संस्था, नेफेड को सोयाबीन की फसल बचा कर रखनी चाहिये क्योंकि अगली फसल अक्टूबर में आयेगी। सूत्रों ने कहा कि मलेशिया एक्सचेंज में गिरावट रहने के बावजूद सबसे सस्ता होने के बीच देश में नमकीन बनाने वाली कंपनियों की औद्योगिक मांग बढ़ने से सीपीओ और पामोलीन तेल के दाम में सुधार आया। कम उपलब्धता के बीच बांडेड कंपनियों की मांग में आई तेजी से बिनौला तेल के दाम में भी सुधार आया। ऊंचे दाम पर कमजोर बिकवाली से सरसों तेल-तिलहन में गिरावट आई। जबकि कमजोर कामकाज के बीच मूंगफली तेल-तिलहन के दाम स्थिर रहे। लागत से नीचे बिकवाली के बीच सोयाबीन तेल के दाम भी स्थिर रहे। तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे...
सरसों तिलहन - 8,225-8,275 रुपये प्रति क्विंटल। मूंगफली - 7,400-7,975 रुपये प्रति क्विंटल। मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 17,150 रुपये प्रति क्विंटल। मूंगफली रिफाइंड तेल - 2,700-3,000 रुपये प्रति टिन। सरसों तेल दादरी- 16,650 रुपये प्रति क्विंटल। सरसों पक्की घानी- 2,710-2,810 रुपये प्रति टिन। सरसों कच्ची घानी- 2,710-2,860 रुपये प्रति टिन। सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 15,750 रुपये प्रति क्विंटल। सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 15,600 रुपये प्रति क्विंटल। सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 12,225 रुपये प्रति क्विंटल। सीपीओ एक्स-कांडला- 13,875 रुपये प्रति क्विंटल। बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 16,750 रुपये प्रति क्विंटल। पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 15,750 रुपये प्रति क्विंटल। पामोलिन एक्स- कांडला- 14,550 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल। सोयाबीन दाना - 7,500-7,550 रुपये प्रति क्विंटल। सोयाबीन लूज- 7,350-7,450 रुपये प्रति क्विंटल।
Semicon 2.0: भारत के चिप विनिर्माण में अमेरिका, जापान और यूरोप की कंपनियां उत्सुक
भारत के सेमीकंडक्टर विनिर्माण कार्यक्रम ‘सेमिकॉन 2.0’ को लेकर अमेरिका, यूरोप, जापान, मलेशिया और सिंगापुर की कंपनियों ने खासी दिलचस्पी दिखाई है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अमितेश कुमार सिन्हा ने बताया कि सितंबर में होने वाले सेमिकॉन इंडिया सम्मेलन में दुनिया भर की कंपनियां हिस्सा लेंगी और भारत में साझेदारी एवं निवेश के अवसर तलाशेंगी।
सिन्हा ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम से इतर कहा कि जापान, अमेरिका, जर्मनी, नीदरलैंड, मलेशिया और सिंगापुर की कई कंपनियां इस कार्यक्रम में रुचि दिखा रही हैं। सरकार ने घरेलू स्तर पर सेमीकंडक्टर चिप की डिजाइन एवं विनिर्माण क्षमता को बढ़ाने के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये के ‘सेमिकॉन 2.0’ कार्यक्रम को मंजूरी दी है, जिसके दिशा-निर्देश अगले दो हफ्तों में जारी होने की उम्मीद है। सिन्हा ने कहा कि सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम कंपनियों के लिए प्रौद्योगिकी सहयोग और साझेदारी का बड़ा मंच बनेगा, जहां वे एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करने के अवसर तलाशेंगी।
उन्होंने कहा कि सरकार का चिप डिजाइन पर विशेष ध्यान है, जो कि समूची सेमीकंडक्टर मूल्य शृंखला का करीब 50 प्रतिशत हिस्सा है। भारत के पास इस क्षेत्र में बड़ी प्रतिभा है, जिसे प्रोत्साहन देकर फैबलेस उत्पाद कंपनियां विकसित की जा सकती हैं। फैबलेस कंपनी अपना चिप खुद डिजाइन करती है, लेकिन उस चिप के उत्पादन का काम किसी तीसरे पक्ष के चिप विनिर्माता को सौंप देती है।
सिन्हा ने यह भी कहा कि कई वैश्विक कंपनियां भारत आएंगी और कुछ कंपनियां इस दौर से दूर रह जाने के डर की वजह से भी निवेश करना चाहेंगी। मेमोरी चिप की वैश्विक किल्लत के सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकार की कोरियाई कंपनी एसके हाइनिक्स समेत कई प्रमुख कंपनियों के साथ बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा कि भारत में चिप विनिर्माण लागत कम हो सकती है और मौजूदा समय में मेमोरी चिप की कीमतें ऊंचे स्तर पर हैं, जिससे निवेश की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं।
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