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उत्तराखंड में विकास की नई रफ्तार, सीएम धामी ने 28 करोड़ से अधिक की 8 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण किया

Uttarakhand Development Projects: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उधम सिंह नगर जिले के गदरपुर क्षेत्र की जनता को विकास की बड़ी सौगात दी है. गदरपुर बस स्टेशन में आयोजित एक बेहद भव्य कार्यक्रम के दौरान उन्होंने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच 2,830.07 लाख रुपये की कुल 8 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया. इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने फीता काटकर नवनिर्मित गदरपुर बस स्टेशन का आधिकारिक उद्घाटन भी किया. क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और आम लोगों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए इन सभी महत्वपूर्ण योजनाओं को तैयार किया गया है.

गदरपुर को मिली करोड़ों की विकास योजनाएं

मुख्यमंत्री ने गदरपुर क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को नई मजबूती देने के लिए 694.06 लाख रुपये की लागत से पूरी हो चुकी परियोजनाओं का लोकार्पण किया. इसके साथ ही उन्होंने 2,136.01 लाख रुपये की लागत वाली नई विकास योजनाओं का शिलान्यास भी किया. लोकार्पण की गई प्रमुख योजनाओं में 349.17 लाख रुपये की लागत से बना आधुनिक गदरपुर बस अड्डा, 275.70 लाख रुपये की लागत वाला विकास खंड गदरपुर का नया कार्यालय भवन और 69.19 लाख रुपये की लागत से बना हरिचंद्र-गुरुचंद्र बंग विशाल सामुदायिक भवन शामिल है. इन सभी निर्माण कार्यों के पूरा होने से स्थानीय जनता को बहुत बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.

सड़कों और आंतरिक मार्गों का होगा कायाकल्प

क्षेत्र के आवागमन को बेहतर बनाने के लिए कई नई सड़क निर्माण योजनाओं का शिलान्यास भी किया गया. इसमें गदरपुर में बाबा डल मंदिर से बौर जलाशय होते हुए गुलरभोज कूल्हा तिलपुरी वन बैरियर तक 1,839.70 लाख रुपये की लागत से बनने वाली कंक्रीट सड़क शामिल है. इसके अलावा रामजीवनपुर नंबर तीन, ग्राम मझरशिला, जयनगर कॉलोनी, गुरुनानकपुर और कुल्हा चौराहे के पास की अंदरूनी सड़कों पर लाखों रुपये की लागत से इंटरलॉकिंग टाइल रोड बनाई जाएगी. इन सभी रास्तों के बन जाने से ग्रामीणों को आने-जाने में किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा.

समयबद्ध काम और आधुनिक सुविधाओं पर जोर

जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार केवल शिलान्यास करके योजनाओं को भूलती नहीं है, बल्कि समय पर काम पूरा करके उनका लोकार्पण भी करती है. डबल इंजन सरकार की यही सबसे बड़ी पहचान है कि जिस काम का शिलान्यास होता है, उसका लोकार्पण भी तय समय में किया जाता है. नवनिर्मित बस स्टेशन में यात्रियों के लिए आधुनिक प्रतीक्षालय और किचन जैसी मूलभूत सुविधाएं दी गई हैं. वहीं नए ब्लॉक कार्यालय से ग्रामीणों को एक ही जगह पर सभी सरकारी सेवाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा.

पर्यटन और शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसर

मुख्यमंत्री ने बताया कि गुलरभोज को आने वाले समय में एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा. इससे स्थानीय युवाओं के लिए आजीविका और रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे. शिक्षा के क्षेत्र में भी क्षेत्र के अंदर बड़े कदम उठाए गए हैं. इसमें नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालय में छात्रावास, दिनेशपुर में आधुनिक ऑडिटोरियम, आईटीआई गुलरभोज में बालिका छात्रावास और आश्रम पद्धति कन्या विद्यालय का उच्चीकरण शामिल है. इसके साथ ही बौर डैम क्षेत्र में बाढ़ सुरक्षा और पेयजल के काम भी पूरे कराए गए हैं.

जनहित में लिए गए कई बड़े फैसले

अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य में चल रहे मतदाता सूची के पुनरीक्षण अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि यह पूरी तरह पारदर्शी प्रक्रिया है. उन्होंने राज्य में कड़े धर्मांतरण विरोधी कानून, नकल विरोधी कानून और भ्रष्टाचार पर कड़ी कार्रवाई को जनहित में उठाया गया कदम बताया. गदरपुर विधायक के अनुरोध पर मुख्यमंत्री ने चीनी मिल कर्मचारियों को सातवां वेतनमान दिलाने, गुलरभोज में जिप्सी परमिट व्यवस्था लागू करने और गदरपुर कॉलेज में दो नए स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम शुरू करने का भी सकारात्मक आश्वासन दिया. इसके बाद उन्होंने रुद्रपुर रिंग रोड का निरीक्षण कर अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए.

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अंकित शर्मा हत्याकांड: ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों को उम्रकैद, कोर्ट ने क्यों नहीं दी फांसी?

दिल्ली दंगों से जुड़े आईबी अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में कड़कड़डूमा कोर्ट ने फैसला सुना दिया है. अदालत ने आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा दी है. हालांकि, कोर्ट ने मामले को दुर्लभतम श्रेणी का नहीं मानते हुए मौत की सजा देने से इनकार कर दिया.

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  Sports

Who is Asmita Dey: कौन हैं अस्मिता डे? जिन्होंने CWG 2026 में जूडो का पहला गोल्ड जीतकर रचा इतिहास

Asmita Dey Biography: भारत की 22 वर्षीय जूडोका अस्मिता डे ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में इतिहास रच दिया है। उन्होंने ग्लासगो में खेले गए महिला 48 किग्रा वर्ग के फाइनल में कनाडा की हेइडी क्वैच को 2-1 से हराकर कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो का गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनने का गौरव हासिल किया। उनकी इस ऐतिहासिक जीत के साथ भारत को जूडो में पहला कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड भी मिला।

कौन हैं अस्मिता डे?

22 मार्च 2003 को त्रिपुरा के बेलोनिया में जन्मीं अस्मिता डे का सफर किसी प्रेरणादायक कहानी से कम नहीं है। साइकिल रिपेयर की दुकान चलाने वाले पिता की बेटी अस्मिता ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने सपनों को कभी नहीं छोड़ा। शुरुआती दिनों में उन्होंने 800 मीटर दौड़ में हिस्सा लिया, लेकिन एक कोच की सलाह पर उन्होंने जूडो को अपना करियर बनाया।

2015 में उन्होंने त्रिपुरा स्पोर्ट्स स्कूल में दाखिला लिया, जहां बीना देबनाथ और बाद में माणिक लाल देब की देखरेख में उन्होंने जूडो की बारीकियां सीखीं। स्कूल गेम्स और खेलो इंडिया प्रतियोगिताओं में लगातार शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) भोपाल के रीजनल सेंटर में ट्रेनिंग का मौका मिला।

ऐसे चमका इंटरनेशनल करियर

अस्मिता ने जुलाई 2022 में बैंकॉक में आयोजित एशियन कैडेट और जूनियर जूडो चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। इस दौरान उन्होंने चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और मलेशिया की खिलाड़ियों को हराया और अंतरराष्ट्रीय पदक जीतने वाली त्रिपुरा की पहली जूडोका बनीं।

इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

  • 2022: एशियन कैडेट एवं जूनियर चैंपियनशिप – ब्रॉन्ज
  • 2022: खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स – गोल्ड
  • 2023: एशियन ओपन (कुवैत) – सिल्वर
  • 2023: जूनियर एशिया कप (मकाऊ) – गोल्ड
  • 2024: कॉमनवेल्थ जूडो चैंपियनशिप – ब्रॉन्ज
  • 2025: अफ्रीकन ओपन (कैसाब्लांका) – गोल्ड
  • 2026: कॉमनवेल्थ गेम्स (ग्लासगो) – गोल्ड

TOPS स्कीम से मिला बड़ा सहारा

अस्मिता भारत सरकार की टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) की डेवलपमेंट एथलीट हैं। उन्होंने कई बार कहा है कि उनका अगला लक्ष्य भारत के लिए ओलंपिक मेडल जीतना है। जापान की दिग्गज जूडोका उटा आबे और भारतीय जूडो खिलाड़ी अवतार सिंह उनके प्रेरणास्रोत रहे हैं।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में रचा इतिहास

ग्लासगो में खेले गए महिला 48 किग्रा फाइनल में अस्मिता डे ने कनाडा की हेइडी क्वैच को 2-1 से हराया। पूरे मुकाबले में उन्होंने संयमित खेल दिखाया और 'यूको' के जरिए निर्णायक बढ़त हासिल कर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इस जीत के साथ वह कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो का गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गईं और भारतीय खेल इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया।

Fri, 31 Jul 2026 21:34:07 +0530

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