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नहीं रहे क्रिकेट से सबसे 'महान ऑलराउंडर' खिलाड़ी, 89 साल की उम्र में निधन, विराट-रोहित भी रह चुके हैं फैन

वेस्टइंडीज के 'महान ऑलराउंडर' खिलाड़ी गैरीफील्ड सोबर्स का 89 साल की उम्र में निधन हो गया है। वो अपने देश के लिए साल 1954-1973 तक इंटरनेशनल क्रिकेट में अपनी छाप छोड़ी। सोबर्स के निधन से खेल जगत में शोक की लहर है।

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Bakra Eid 2026: हज में शैतान को पत्थर क्यों मारा जाता है? जानिए इस रहस्यमयी परंपरा का सच

Bakra Eid 2026: ईद-उल-अजहा, जिसे आम भाषा में बकरीद कहा जाता है, इस्लाम धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह त्योहार पैगंबर इब्राहिम (अब्राहम) की आस्था और कुर्बानी की याद में मनाया जाता है। इसी समय मक्का में हर साल हज यात्रा भी होती है, जिसमें लाखों मुसलमान शामिल होते हैं। हज के दौरान कई धार्मिक रस्में निभाई जाती हैं, जिनमें से एक बेहद महत्वपूर्ण रस्म है- “शैतान को पत्थर मारना”। क्या है ये रस्म और क्या है इसके पीछे की वजह, जानिए...

‘रमी अल-जमारात’ क्या है?
इस रस्म को अरबी में “रमी अल-जमारात” कहा जाता है। इसका मतलब होता है “पत्थर फेंकना”। यह हज के दौरान मिना नामक स्थान पर किया जाने वाला एक प्रतीकात्मक धार्मिक कार्य है।

इसमें तीर्थयात्री तीन खंभों पर कंकड़ फेंकते हैं, जिन्हें शैतान का प्रतीक माना जाता है। इसका उद्देश्य बुराई, पाप और बहकावे से दूर रहने का संदेश देना है।

Stoning of the Devil facts

क्या है रस्म की धार्मिक कहानी
इस परंपरा की जड़ें पैगंबर इब्राहिम (अब्राहम) की कथा से जुड़ी हैं। मान्यता के अनुसार, जब अल्लाह ने इब्राहिम को अपने बेटे की कुर्बानी देने का आदेश दिया, तब शैतान ने उन्हें इस आदेश से रोकने और भ्रमित करने की कोशिश की।

लेकिन इब्राहिम ने शैतान की बातों में न आकर उसे पत्थर मारकर दूर किया और अपने ईमान पर डटे रहे। इसी घटना की याद में यह रस्म निभाई जाती है, जो विश्वास और धैर्य का प्रतीक मानी जाती है।

हज के दौरान यह रस्म कैसे होती है?
हज के दौरान तीर्थयात्री मिना घाटी में जाते हैं और तीन बड़े खंभों पर कंकड़ फेंकते हैं। आमतौर पर प्रत्येक खंभे पर कई कंकड़ फेंके जाते हैं, और यह प्रक्रिया क्रम से पूरी की जाती है। यह रस्म बुराई को त्यागने और आत्मिक शुद्धता की ओर बढ़ने का प्रतीक है।

बकरीद और इसकी वैश्विक परंपरा
हज के अंतिम दिनों में यह रस्म पूरी की जाती है, जो सीधे तौर पर ईद-उल-अजहा के त्योहार से जुड़ी होती है। इस दिन दुनिया भर के मुसलमान जानवरों की कुर्बानी देते हैं और उसका मांस जरूरतमंदों में बांटते हैं।

इस तरह बकरीद केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि त्याग, आस्था और मानवता का संदेश देने वाला अवसर माना जाता है।
 

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