केरल सरकार का बड़ा फैसला: NEET Protest के खिलाफ दर्ज सभी केस होंगे वापस, Ramesh Chennithala ने दी जानकारी
केरल सरकार ने दिल्ली में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) आंदोलन के समर्थन में राज्य भर में हुए विरोध प्रदर्शनों के सिलसिले में दर्ज सभी मामले वापस लेने का फैसला किया है। गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। चेन्निथला ने यहां संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि यह फैसला लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन के अनुरोध पर लिया गया। उन्होंने कहा कि नीट में कथित अनियमितताओं को लेकर हो रहे विरोध-प्रदर्शनों के समर्थन में केरल भर में कई युवा संगठनों और राजनीतिक दलों ने प्रदर्शन आयोजित किए।
चेन्निथला ने कहा, “उन विरोध प्रदर्शनों के सिलसिले में कई मामले दर्ज किए गए थे। हमें इन मामलों को वापस लेने के लिए कई अनुरोध मिले। मुख्यमंत्री ने वे सभी अनुरोध मुझे भेजे, और मैंने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को निर्देश दिया है कि वे इनमें से किसी भी मामले में आगे कोई कार्रवाई न करें।” कई मामलों में हालांकि प्राथमिकी दर्ज की गई थीं, लेकिन ये विरोध प्रदर्शन राष्ट्रीय महत्व के मुद्दे पर किए गए थे और इनमें कोई हिंसा नहीं हुई थी।
उन्होंने कहा, “यह जन-मुद्दा उठाने वाला एक बड़ा सकारात्मक आंदोलन था। यहां तक कि उच्चतम न्यायालय ने भी इस मामले पर सकारात्मक रुख अपनाया। यहां कोई हिंसक घटना नहीं हुई। इसलिए, मैंने डीजीपी को निर्देश दिया है कि वे दर्ज किए गए किसी भी मामले में आगे की कार्रवाई न करें।” जब चेन्निथला से उन मामलों की संख्या के बारे में पूछा गया जिन्हें वापस लिया जाएगा, तो उन्होंने कहा कि निर्देश जारी किए गए हैं कि मामलों की संख्या चाहे जो भी हो, उनमें से किसी भी मामले में आगे कोई कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।
इसके अलावा, उन्होंने कहा कि जेलों के अंदर मादक पदार्थों के इस्तेमाल और बिक्री की शिकायतों के बाद, राज्य भर की जेलों में पुलिस और जेल विभाग की ओर से “ऑपरेशन तूफान” के तहत संयुक्त तलाशी अभियान जारी है। मादक पदार्थ की तस्करी में डिलीवरी करने वाले कर्मचारियों के कथित इस्तेमाल से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए चेन्निथला ने कहा कि सरकार ऐसी गतिविधियों से सख्ती से निपटेगी।
उन्होंने चेतावनी दी, “किसी भी हाल में मादक पदार्थ बांटने के लिए डिलीवरी करने वाले कर्मचारियों का इस्तेमाल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।” सतीशन के खिलाफ ‘पुनर्जनी’ विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) मामला बंद करने के सतर्कता विभाग के फैसले पर चेन्निथला ने कहा कि जांच एजेंसी को मुख्यमंत्री के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला।
उन्होंने कहा कि सतर्कता निदेशक ने सिर्फ यह कहा था कि एफसीआरए के कथित उल्लंघन राज्य एजेंसी के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते हैं और अगर जरूरत पड़ी, तो इनकी जांच केंद्रीय एजेंसियों को करनी होगी।
पूर्व सेना प्रमुख General VN Sharma का 96 वर्ष की आयु में निधन, सेना ने व्यक्त किया दुख
पूर्व सेना प्रमुख (सेवानिवृत्त) जनरल विश्वनाथ शर्मा का शुक्रवार को 96 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। भारतीय सेना ने यह जानकारी दी। जनरल शर्मा 30 जून 1988 से 30 जून 1990 तक सेना प्रमुख के पद पर रहे थे।
उन्होंने 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान लाहौर सेक्टर में मेजर के रूप में युद्ध में हिस्सा लिया था। पूर्व सेना प्रमुख ने बख्तरबंद रेजिमेंट की कमान संभाली और सेना में कई महत्वपूर्ण स्टाफ तथा प्रशिक्षण संबंधी जिम्मेदारियां निभाईं। जनरल शर्मा को 1965 के युद्ध के बाद ब्रिगेडियर के पद पर पदोन्नत किया गया।
सेना की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जनरल शर्मा ने उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र में एक माउंटेन ब्रिगेड की कमान संभाली और उन्हें उत्कृष्ट सेवा के लिए 1977 में अति विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया गया। उन्होंने बाद में राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्र में एक बख्तरबंद ब्रिगेड की कमान संभाली। वर्ष 1980 में जनरल शर्मा को मेजर जनरल के पद पर पदोन्नत किया गया और उन्होंने पश्चिमी क्षेत्र में एक माउंटेन डिवीजन की कमान संभाली।
वर्ष 1984 में वह लेफ्टिनेंट जनरल बने और पश्चिमी क्षेत्र में एक कोर की कमान संभाली। उत्कृष्ट सेवा के लिए उन्हें परम विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया गया। सेना अध्यक्ष जनरल धीरज सेठ के नेतृत्व में भारतीय सेना ने अनुभवी सैन्य अधिकारी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया।
सेना ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “सेना अध्यक्ष जनरल धीरज सेठ और भारतीय सेना के सभी रैंक के जवान परम विशिष्ट सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक, एडीसी और पूर्व सेना प्रमुख जनरल विश्वनाथ शर्मा के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हैं। भारतीय सेना उनके शोक संतप्त परिवार और प्रियजनों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदनाएं व्यक्त करती है।” रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी पूर्व सेना प्रमुख के निधन पर शोक जताया और कहा, “एक उत्कृष्ट सैनिक के रूप में जनरल शर्मा ने अटूट समर्पण, साहस और सम्मान के साथ देश की सेवा की।” उनका जन्म चार जून 1930 को हुआ था। जनरल विश्वनाथ शर्मा एक प्रतिष्ठित सैन्य परिवार से आते थे जिसने दो पीढ़ियों तक सशस्त्र सेनाओं में सेवा दी और देश को तीन जनरल दिए।
सेना के मुताबिक, “परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा के छोटे भाई होने के नाते विश्वनाथ शर्मा ने अपने परिवार के अद्भुत साहस और निस्वार्थ सेवा की विरासत को भी शानदार तरीके से आगे बढ़ाया।” मेजर सोमनाथ शर्मा, स्वतंत्र भारत के बाद पहला परमवीर चक्र प्राप्त करने वाले सैनिक थे। जानकारी के अनुसार, जनरल विश्वनाथ शर्मा ने नैनीताल के शेरवुड कॉलेज और देहरादून के प्रिंस ऑफ वेल्स रॉयल इंडियन मिलिट्री कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी के पांचवें रेगुलर पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया और चार जून 1950 को 16 लाइट कैवेलरी में शामिल हुए थे।
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