Explainer: NGO, ट्रस्ट और विदेशी फंडिंग... अगले सप्ताह संसद में आने वाले FCRA Bill का किस पर होगा असर?
FCRA Bill Explained in Hindi: संसद में समय-समय पर FCRA (Foreign Contribution Regulation Act) से जुड़े संशोधन विधेयक आते रहे हैं. जब भी सरकार इस कानून में बदलाव का प्रस्ताव लाती है, तब NGO, ट्रस्ट, शैक्षणिक संस्थानों और विदेशी फंडिंग पाने वाले संगठनों के बीच इसकी चर्चा बढ़ जाती है. कुछ लोग सरकार का विरोध भी करते हैं. बीते दिनों चर्चा में रहे सोनम वांगचुक समेत ऐसे कई लोग हैं जिनकी एनजीओ पर इस कानून के तहत सख्त कदम उठाए जा चुके हैं.
उधर, सरकार का कहना है कि विदेशी धन का इस्तेमाल पारदर्शी तरीके से हो और उसका दुरुपयोग न हो इसके लिए संशोधन किए जाते हैं. वहीं, कई सामाजिक संगठनों का मानना है कि बहुत सख्त नियम उनके कामकाज को प्रभावित कर सकते हैं, वह जो समाज सेवा का काम करते हैं उसमें बाधा होती है.
After the introduction of the FCRA Amendment Bill 2026 in Loksabha, which is likely to usurp the properties of majority and minority institutions such as schools, colleges, hospitals, medical institutions, and places of worship like temples, mosques, and churches, and scheduled… pic.twitter.com/vrEmDEO7m8
— P. Wilson (@PWilsonDMK) July 31, 2026
FCRA क्या है और उसका पूरा नाम क्या है?
FCRA का पूरा नाम Foreign Contribution (Regulation) Act यानी विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम है. बता दें यह कानून तय करता है कि भारत में कौन-से व्यक्ति, संस्था या संगठन विदेश से आर्थिक सहायता या दान ले सकता है और किन शर्तों के साथ ले सकता है. कई लोग विदेशी दान लेकर उसको गलत तरीके से निजी लाभ के लिए इस्तेताल करते हैं ये नियम उन पर लगाम कसता है. ये नियम विदेशी कंपनियों के भारत के खिलाफ अप्रत्यक्ष रूप से किए जा रहे कामों पर निगरानी करता है.
FCRA कानून कब बना था?
सबसे पहले यह कानून 1976 में लागू किया गया था. उस समय इसका मकसद यह सुनिश्चित करना था कि विदेशी धन का इस्तेमाल भारत की राजनीति और राष्ट्रीय हितों को प्रभावित करने के लिए न हो. लेकिन बाद में 2010 में नया FCRA कानून लागू किया गया, जिसने पुराने कानून की जगह ली. इसके बाद 2020 में इसमें कई अहम संशोधन किए गए थे.
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FCRA Bill और FCRA Act में क्या अंतर है?
लोग अक्सर इन दोनों को एक ही मान लेते हैं, जबकि दोनों अलग हैं. दरअसल, FCRA Act वह कानून है जो पहले से लागू है. वहीं, FCRA Bill उस कानून में बदलाव करने के लिए संसद में लाया गया प्रस्ताव होता है. बता दें जब संसद दोनों सदनों से बिल पास कर देती है और राष्ट्रपति की मंजूरी मिल जाती है, तब वही संशोधन कानून बन जाता है.
विदेशी अंशदान (Foreign Contribution) किसे कहा जाता है?
जानकारी के मुताबिक यदि किसी भारतीय संस्था या व्यक्ति को विदेश से पैसा, सामान, सिक्योरिटी या किसी अन्य रूप में आर्थिक सहायता मिलती है, तो उसे विदेशी अंशदान माना जाता है.ऐसी राशि लेने के लिए FCRA के नियमों का पालन करना जरूरी होता है. कई बार लोग गलत तरीके से विदेश से सामान या अंशदान लेते हैं जिन पर नकेल कसने के लिए ही ये नियम बनाया गया है.
Monday or Tuesday NDA to table FCRA bill in Lok Sabha. @AmitShah ???????????? pic.twitter.com/idp4dJpDh7
— Sachin More (@SM_8009) July 31, 2026
किन लोगों या संस्थाओं पर FCRA लागू होता है?
यह कानून मुख्य रूप से उन संस्थाओं पर लागू होता है जो विदेश से आर्थिक सहायता प्राप्त करती हैं। इनमें शामिल हैं......
-गैर-सरकारी संगठन (NGO)
-ट्रस्ट
-सोसायटी
-चैरिटेबल संस्थाएं
-शैक्षणिक और शोध संस्थान
-धार्मिक संगठन
खबर अपडेट की जा रही है
कैबिनेट ने 'समुद्र मंथन' योजना को दी मंजूरी, 84,084 करोड़ रुपए से बढ़ेगी भारत की ऑफशोर ऊर्जा क्षमता
नई दिल्ली, 31 जुलाई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने समुद्र मंथन (नेशनल ऑफशोर एक्सप्लोरेशन स्कीम) को मंजूरी दे दी है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की इस केंद्रीय क्षेत्र की योजना को वित्त वर्ष 2030-31 तक लागू करने के लिए 84,084 करोड़ रुपए के बजट को स्वीकृति दी गई है।
एक आधिकारिक बयान में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बताया कि यह योजना देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, घरेलू तेल और गैस उत्पादन बढ़ाने, आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने और विकसित भारत के लक्ष्य को गति देने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।
मंत्रालय के अनुसार, यह योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस 2025 पर लाल किले से दिए गए उस विजन को साकार करेगी, जिसमें उन्होंने भारत की विशाल समुद्री ऊर्जा क्षमता का दोहन करने के लिए आधुनिक दौर के समुद्र मंथन की आवश्यकता पर जोर दिया था। इस योजना के माध्यम से समुद्र में मौजूद तेल और गैस संसाधनों की खोज और उत्पादन को नई गति मिलेगी।
समुद्र मंथन योजना के तहत ऑफशोर ऊर्जा खोज से जुड़े पूरे वैल्यू चेन को मजबूत किया जाएगा, जिसके अंतर्गत बड़े पैमाने पर उच्च गुणवत्ता वाले सीस्मिक डेटा का संग्रह, प्रोसेसिंग और विश्लेषण, गहरे और अति-गहरे समुद्री क्षेत्रों में तेजी से खोजी ड्रिलिंग, फ्रंटियर बेसिन में वैज्ञानिक ड्रिलिंग, साझा ऑफशोर उत्पादन और परिवहन अवसंरचना का विकास तथा एकीकृत ऑयल एंड गैस मैन्युफैक्चरिंग एंड सर्विसेज जोन की स्थापना की जाएगी।
इसके अलावा, योजना में डिजिटल प्रोग्राम मैनेजमेंट, क्षमता निर्माण, नई तकनीकों को अपनाने, हितधारकों के साथ समन्वय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे पहलुओं को भी शामिल किया गया है, ताकि देश में ऑफशोर तेल एवं गैस क्षेत्र के लिए एक मजबूत और आधुनिक इकोसिस्टम तैयार किया जा सके।
सरकार का अनुमान है कि इस योजना के जरिए 600 मिलियन मीट्रिक टन ऑयल इक्विवेलेंट (एमएमटीओई) से अधिक नए तेल एवं गैस भंडार खोजे जा सकेंगे। इससे देश में ऑफशोर एक्सप्लोरेशन गतिविधियों में तेजी आएगी और घरेलू स्तर पर तेल एवं गैस उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।
समुद्र मंथन योजना से बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। साथ ही, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती मिलेगी। सरकार का मानना है कि इस योजना से ऑफशोर ऊर्जा क्षेत्र में स्वदेशी विनिर्माण, आधुनिक तकनीक और सेवाओं का विकास होगा, जिससे भारत वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकेगा।
इसके अलावा, तेल एवं गैस खोज और उत्पादन से जुड़े पूरे वैल्यू चेन में बड़े निवेश आकर्षित होंगे, जिससे उद्योग, नवाचार और आर्थिक विकास को दीर्घकालिक गति मिलेगी।
सरकार ने कहा कि पिछले एक दशक में अपस्ट्रीम सेक्टर में कई बड़े सुधार किए गए हैं। इनमें लगभग पूरे ऑफशोर क्षेत्र को एक्सप्लोरेशन के लिए खोलना, कानूनी और अनुबंध संबंधी ढांचे का आधुनिकीकरण तथा राष्ट्रीय डेटा रिपॉजिटरी को मजबूत करना शामिल है।
इन सुधारों के आधार पर अब समुद्र मंथन योजना रणनीतिक सरकारी निवेश, अत्याधुनिक तकनीक और विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे के जरिए भारत में ऑफशोर तेल एवं गैस खोज के नए दौर की शुरुआत करेगी।
--आईएएनएस
डीबीपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
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