Heart Disease: लॉन्ग सिटिंग जॉब से बढ़ रहा हार्ट डिजीज का खतरा, एक्सपर्ट से जानें बचाव के तरीके
Heart Disease: आज के डिजिटलाइजेशन के दौर में गौर करें तो हममें से कई लोगों की जिंदगी ऑफिस वर्क, लैपटॉप और कंप्यूटर डेस्क तक ही सीमित होकर रह गई है। आजकल के ऑफिस कल्चर में व्यक्ति सेडेंटरी लाइफस्टाइल यानी एक ही स्थान और पोजिशन में बने रहने, डेस्क जॉब करने या घंटों एक ही जगह बैठकर काम करने के लिए मजबूर हो गया है। इसकी वजह से हार्ट अटैक ही नहीं, कई लाइफस्टाइल संबंधी बीमारियों की गिरफ्त में आता जा रहा है।
वैश्विक स्तर पर युवाओं में पिछले एक दशक में जिन बीमारियों के मामले सबसे अधिक रिपोर्ट किए गए हैं, हृदय रोग जैसी जानलेवा समस्याओं के मामले काफी तेजी से बढ़े हैं। यह खतरा उन लोगों में और भी अधिक देखा जा रहा है, जिनकी डेस्क जॉब है, यानी कि जिनके दिन का 8-9 घंटे का समय ऑफिस में बैठे-बैठे निकल जाता है।
स्मोकिंग जैसा खतरनाक
विशेषज्ञों का मानना है कि सिटिंग किल्स, मूविंग हील्स। सिटिंग इज द न्यू स्मोकिंग यानी ऑफिस में डेस्क जॉब करना या कुर्सी-टेबल पर देर तक एक जगह बैठे रहना सिगरेट पीने से भी ज्यादा खतरनाक है। मानव की शारीरिक संरचना पर गौर करें तो शरीर में समुचित मात्रा में ऑक्सीजन की सप्लाई और ब्लड सर्कुलेशन होने के लिए मूव करना बहुत जरूरी है।
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हर साल इससे लाखों लोगों की होती है मौत
ज्यादा देर तक बैठने से शरीर की नसें संकुचित होने लगती हैं, जिससे शरीर में ऑक्सीजन और ब्लड सर्कुलेशन में भी रुकावट होने से हार्ट अटैक या ब्रेन स्ट्रोक का खतरा रहता है। इसकी वजह से व्यक्ति कई बीमारियों की चपेट में आ जाता है और हर साल लाखों लोगों की मौत भी हो जाती है। हेल्थ एक्सपर्ट मानते हैं कि एक ही स्थान पर 6-7 घंटे बैठकर काम करने से हार्ट अटैक का खतरा तकरीबन 20 प्रतिशत बढ़ता है। वहीं इससे ज्यादा देर तक बैठकर काम करने पर हार्ट फेलियर का रिस्क 50 प्रतिशत तक बढ़ जाता है।
इस तरह बढ़ता है रिस्क
देखा जाए तो जो लोग बिना ब्रेक लिए लंबे समय तक एक ही जगह बैठे-बैठे काम करते हैं, वो अनजाने ही कई तरह की बीमारियों को न्यौता देते हैं। शारीरिक गतिविधि की कमी और ब्लड सर्कुलेशन की कमी के कारण हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो जाती है। यह हार्ट अटैक होने का मुख्य कारण है। लंबे समय तक बैठे रहने से कैलोरीज कम बर्न होती हैं, जिससे वजन बढ़ सकता है। अधिक वजन बढ़ने से दिल पर अधिक प्रेशर पड़ता है। हार्ट आर्टरीज सिकुड़ जाती हैं, उनमें कैल्शियम का जमाव बढ़ जाता है, जिससे नसों में ब्लड का प्रवाह रुक जाता है और कार्डियोवेस्कुलर डिजीज या हार्ट अटैक का खतरा रहता है। इसके साथ ही शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ने और डायबिटीज का खतरा भी रहता है। बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ने की वजह से शरीर के मेटाबॉलिक सिस्टम पर भी असर होता है। मेटाबॉलिक सिंड्रोम गड़बड़ाने से व्यक्ति को डायबिटीज होने का खतरा रहता है, जो आगे जाकर हार्ट डिजीज का कारण भी बनती है।
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कैसे करें बचाव
लंबे समय तक बैठे रहने से होने वाली समस्याओं से निजात पाने के लिए एक्टिव लाइफस्टाइल अपनाना जरूरी है। बहुत लंबे समय तक ऑफिस में बैठना आपकी मजबूरी हो सकती है, लेकिन इस दौरान छोटे-छोटे बदलाव लाकर आसानी से फिट रहा जा सकता है।
- काम करते हुए बीच-बीच में ब्रेक लेते रहें। अपने मोबाइल या घड़ी में हर 30 मिनट के बाद उठने का रिमाइंडर सेट कर लें ताकि आपको उठना याद रहे।
- हल्की-फुल्की एकसरसाइज करें या इधर-उधर टहलें। खड़े होकर चेयर स्क्वैट्स, हील्स अपलिफ्टिंग, नेक स्ट्रेचिंग, शोल्डर स्ट्रेचिंग, टोर्सो फिंगर स्ट्रेचिंग जैसी एक्सरसाइज करें।
- अगर उठना संभव ना हो, तो डेस्क योगा या कुर्सी पर बैठे-बैठे नेक स्ट्रेचिंग, शोल्डर स्ट्रेचिंग, टोर्सो फिंगर स्ट्रेचिंग जैसी एक्सरसाइज भी कर सकते हैं। इससे शरीर में ब्लड सर्कुलेशन ठीक बना रहता है और समस्याएं होने का रिस्क कम रहता है।
- संभव हो तो ऑफिस में स्टैंड-अप डेस्क का इस्तेमाल करें। या फिर बैठने के लिए एर्गोनॉमिक कुर्सी चुनें। इसकी सही ऊंचाई होगी, आपकी पीठ सीधी रहेगी और आप एक्टिव रहेंगे।
- फोन पर किसी से बात करते वक्त खड़े होकर या इधर-उधर टहलते हुए बात कर सकते हैं।
- किसी को-वर्कर को फोन या मैसेज देने के बजाय उनके डेस्क तक जाकर उनसे बात करके आ सकते हैं।
- लंच टाइम या टी-कॉफी ब्रेक में किसी एक जगह बैठे रहने के बदले चलते-चलते ब्रेक एंज्वॉय करें।
- लंच टाइम में सोशल मीडिया पर समय बिताने के बजाय किसी आउटडोर एक्टिविटी या हॉबी में समय बिताएं।
- वर्कप्लेस पर वर्कलोड को लेकर या किसी भी तरह की परेशानी हो तो को-वर्कर या दोस्तों से जरूर शेयर करें। स्ट्रेस मैनेज करने के लिए कुछ देर के लिए सही, मेडिटेशन और डीप ब्रीदिंग करें। बर्नआउट से बचने के लिए बीच-बीच में ब्रेक लेते रहें।
- यदि आप ऑफिस के नज़दीक रहते हैं तो काम पर पैदल या साइकिल से जाएं। यदि आप बस या ट्रेन लेते हैं तो बस स्टॉप या रेलवे स्टेशन तक पैदल जाने का प्रयास करें। ट्रेन या बस में खड़े होकर सफर करें।
- लिफ्ट के बजाय सीढ़ियां इस्तेमाल करें।
- डेली रूटीन में एक्सरसाइज जरूर करें। ज्यादा ना सही, अपनी सहूलियत के हिसाब से दिन मे कम से कम 20 मिनट वॉक, योगा, कार्डियोवेस्कुलर एक्सरसाइज जरूर करें।
- संतुलित और पौष्टिक आहार लें। अपना दोपहर का भोजन घर से लाने की कोशिश करें ताकि आपको बाहर से अनहेल्दी भोजन ना खाना पड़े। जितना हो सके हाइड्रेटेड रहें। काम के दौरान हाइड्रेशन जरूरी है। मीठे पेय और पेय पदार्थों से बचें।
- एल्कोहल और स्मोकिंग से दूर रहें।
[यह जानकारी डॉ. एस. सी. मनचंदा सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट सर गंगा राम अस्पताल, दिल्ली से बातचीत पर आधारित है।]
Healthy Heart: न्यूट्रिशस डाइट से हार्ट रहेगा हेल्दी, खानपान में शामिल करें ये जरूरी आहार
Healthy Heart: आज के दौर में गलत लाइफस्टाइल और अनहेल्दी डाइट की वजह से बहुत सारे पुरुष और महिलाएं हार्ट डिजीज का शिकार हो रहे हैं। इनसे बचाव के लिए आपको अपनी लाइफस्टाइल में सुधार के साथ ही खान-पान से संबंधित कुछ बातों का भी विशेष तौर से ध्यान रखना होगा।
डाइट में इन्हें करें शामिल
हेल्दी हार्ट के लिए आपको अपने आहार में साबुत अनाज, पुराना चावल, गेहूं, जौ और ओट्स को शामिल करना चाहिए। इनमें मौजूद फाइबर्स, दिल की सेहत के लिए फायदेमंद होता है। इसके अलावा मूंग, अरहर, सोयाबीन, मटर और मसूर की दाल को अपने भोजन में प्रमुखता से शामिल करें। इनमें मौजूद प्रोटीन सेहत के लिए फायदेमंद होता है। वहीं दैनिक आहार में पालक, गोभी, ब्रोकली, गाजर, टमाटर, लौकी, करेला, परवल और सीताफल जैसी सब्जियों को भी अपनी डाइट का जरूरी हिस्सा बनाएं, इनमें मौजूद विटामिंस और मिनरल्स हार्ट हेल्थ के लिए फायदेमंद होते हैं।
फ्रूट्स और ड्राई फ्रूट्स
यह तो हम सब जानते हैं कि फ्रूट्स और ड्राय फ्रूट्स का सेवन हेल्थ के लिए अच्छा होता है। लेकिन अगर आप अंगूर, अनार, सेब, चेरी, स्ट्रॉबेरी, संतरा, केला, अमरूद और नाशपाती जैसे फलों को अपनी डाइट में शामिल करें तो इससे हार्ट हेल्थ पर पॉजिटिव इफेक्ट पड़ता है। इनमें विटमिन-सी अच्छी मात्रा में पाया जाता है। इससे इम्यूनिटी बढ़ती है और बॉडी स्ट्रॉन्ग होती है। इसके अलावा आप अखरोट और बादाम को भी अपने नियमित आहार में शामिल करें, इनमें मौजूद गुड कोलेस्ट्रॉल, प्रोटीन और ओमेगा 3 फैटी एसिड हार्ट हेल्थ के लिए फायदेमंद होता है।
डेयरी प्रोडक्ट्स
हार्ट हेल्थ के लिए आप रेग्युलर बेस पर दूध-दही का सेवन कर सकते हैं। लेकिन फैटी मिल्क और पनीर के बजाय स्किम्ड मिल्क, फैट फ्री पनीर और दही का सेवन करें। चूंकि फैट, दिल की रक्तवाहिकाओं में जमा होकर हार्ट अटैक की आशंका को बढ़ा देता है, इसलिए स्किम्ड मिल्क और फैट फ्री पनीर का ही सेवन करें।
अगर खाते हैं नॉनवेज
अगर आप नॉनवेजीटेरियन हैं तो हार्ट हेल्थ के लिए आपको नॉनवेज छोड़ना जरूरी नहीं है। आप मछली, चिकन और अंडे का सफेद हिस्सा अपनी डाइट में शामिल रख सकती हैं। अंडे और चिकेन में मौजूद प्रोटीन और मछली में पाया जाने वाला ओमेगा 3 फैटी एसिड दिल की सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है।
इन चीजों को करें अवॉयड
- जंक फूड को डिब्बाबंद करते समय प्रिजर्वेटिव का इस्तेमाल किया जाता है, जो हार्ट हेल्थ के लिए बहुत हार्मफुल होता है। इसलिए जंक फूड से दूर रहें।
- मिठाई, चॉकलेट और केक-पेस्ट्री जैसी चीजों से दूर रहें। इनमें मौजूद चीनी और मैदा मोटापा बढ़ाने के लिए जिम्मेदार होता है। बढ़ता वजन हृदय रोग का कारण बन सकता है।
- डिब्बाबंद जूस, सॉफ्ट ड्रिंक और आइसक्रीम में मौजूद अधिक मीठा, डायबिटीज का कारण बनती है। खासतौर पर आइसक्रीम में कंसंट्रेटेड फॉर्म में फैट मौजूद होता है, जिससे डायबिटीज आशंका बढ़ जाती है और डायबीटिज हार्ट डिजीज के रिस्क को बढ़ाता है, इसलिए इनके सेवन से दूर रहें।
- खाने में नमक का उपयोग सीमित मात्रा में करें। बाजार में बिकने वाले चिप्स और नमकीन से भी दूर रहें क्योंकि इन चीजों को तैयार करने में भी अधिक मात्रा में नमक का इस्तेमाल किया जाता है। ज्यादा नमक के सेवन से ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है और हाई ब्लडप्रेशर के मरीजों में दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
- रेड मीट में बैड कोलेस्ट्रॉल ज्यादा मात्रा में पाया जाता है, जो हार्ट की ब्लड वेसेल्स में जमा हो जाता है, जिससे उसके ब्लड पंपिंग के काम में बाधा पहुंचती है। यह स्थिति हार्ट हेल्थ के लिए बहुत नुकसानदेह साबित होती है, इसलिए रेड मीट का सेवन ना करें।
[यह जानकारी डॉ. अदिति शर्मा, डाइटिशियन मणिपाल हॉस्पिटल, एनसीआर से बातचीत पर आधारित है। इसको अमल करने से पहले संबंधित एक्सपर्ट से संपर्क जरूर करें। हरिभूमि.कॉम इसके लिए जिम्मेदार नहीं होगा।]
प्रस्तुति: विनीता
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