EPFO History: पुराना PF अकाउंट नहीं मिल रहा? ईपीएफओ का नया फीचर मिनटों में बताएगा नौकरी की हिस्ट्री
आज के समय में नौकरी बदलना आम बात है, लेकिन हर नई नौकरी के साथ कर्मचारी को नया पीएफ मेंबर आईडी मिल जाता है। कई साल बाद जब कर्मचारी पीएफ ट्रांसफर, निकासी या पेंशन से जुड़े काम के लिए आवेदन करता, तब पता चलता है कि उसका कोई पुराना पीएफ अकाउंट रिकॉर्ड में नहीं दिख रहा या किसी पुराने नियोक्ता की जानकारी गायब है।
ऐसी परेशानी को दूर करने के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने सर्विस हिस्ट्री फीचर शुरू किया। इसकी मदद से कर्मचारी अपने यूएएन (Universal Account Number) से जुड़े सभी रोजगार और पीएफ रिकॉर्ड एक ही जगह देख सकते हैं।
अब नौकरी की हिस्ट्री आसानी से देख सकेंगे
यह सुविधा ईपीएफओ मेंबर ई-सेवा पोर्टल पर उपलब्ध है। कर्मचारी अपने यूएएन और पासवर्ड से लॉगिन करने के बाद व्यू टैब में जाकर सर्विस हिस्ट्री विकल्प चुन सकते। यहां उन्हें वर्तमान और पुराने सभी नियोक्ताओं का नाम, मेंबर आईडी, जॉइनिंग डेट और एग्जिट डेट जैसी जानकारी दिखाई देती है। इससे पुराने दस्तावेज खोजने की जरूरत नहीं पड़ती और पूरी नौकरी का रिकॉर्ड एक ही स्क्रीन पर मिल जाता है।
यह फीचर उन कर्मचारियों के लिए खास तौर पर फायदेमंद है, जिनके पुराने नियोक्ता ने नौकरी छोड़ने की तारीख (Exit Date) अपडेट नहीं की या पुराना पीएफ अकाउंट सही तरीके से यूएएन से लिंक नहीं हुआ। ऐसी गलतियां कई साल तक सामने नहीं आतीं, क्योंकि नए नियोक्ता की ओर से PF जमा होता रहता है, लेकिन पीएफ ट्रांसफर, निकासी या पेंशन का दावा करते समय यही छोटी-सी कमी बड़ी परेशानी बन सकती है।
यदि सर्विस हिस्ट्री में किसी पुराने नियोक्ता की जानकारी नहीं दिखती या एग्जिट डेट दर्ज नहीं है, तो कर्मचारी समय रहते अपने पुराने नियोक्ता से संपर्क कर रिकॉर्ड अपडेट करा सकते हैं। ऐसा जल्दी करना बेहतर होता है, क्योंकि वर्षों बाद कंपनी से रिकॉर्ड निकलवाना मुश्किल हो सकता है।
PFO Service History के फायदे
- यूएएन से जुड़े सभी पुराने और नए पीएफ अकाउंट की जानकारी एक जगह मिलेगी।
- पुराने नियोक्ता का नाम, मेंबर आईडी, जॉइनिंग और एग्जिट डेट देख सकेंगे।
- पीएफ ट्रांसफर और निकासी में आने वाली दिक्कतों का पहले ही पता चल जाएगा।
- एक से अधिक यूएएन होने की स्थिति की पहचान करने में मदद मिलेगी।
- रिकॉर्ड समय रहते सही कराकर भविष्य की परेशानी से बचा जा सकेगा।
ईपीएफओ ने कर्मचारियों को केवायसी जांचने को कहा
ईपीएफओ ने कर्मचारियों को सलाह दी है कि सर्विस हिस्ट्री देखने के साथ-साथ अपने नो-योर कस्टमर की भी जांच कर लें। आधार, PAN, बैंक खाता और मोबाइल नंबर सही व अपडेट होना जरूरी है। इन्हीं जानकारियों में गड़बड़ी होने पर अक्सर PF क्लेम और ट्रांसफर में देरी होती है।
यदि किसी कर्मचारी ने अभी तक अपना UAN एक्टिवेट नहीं किया है, तो पहले उसे सक्रिय करना होगा। इसके बाद मेंबर ई-सेवा पोर्टल पर पासबुक देखने, ऑनलाइन क्लेम करने, क्लेम स्टेटस ट्रैक करने और प्रोफाइल अपडेट करने जैसी कई सुविधाएं भी मिल जाती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि रिटायरमेंट के लिए जमा होने वाला PF कई दशकों की बचत होती है। इसलिए जिन लोगों ने अपने करियर में कई बार नौकरी बदली है, उन्हें समय निकालकर अपनी सर्विस हिस्ट्री जरूर जांचनी चाहिए। इससे भूले हुए PF अकाउंट खोजने के साथ-साथ भविष्य में क्लेम के समय होने वाली परेशानियों से भी बचा जा सकता है।
(प्रियंका कुमारी)
निफ्टी में आखिरी मिनटों का बड़ा खेल: क्लोजिंग ऑक्शन में 150 अंक उछला इंडेक्स, एक्सपायरी पर ट्रेडर्स को लगा झटका
मुंबई। शेयर बाजार में लागू किए गए क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम (सीएएस) के दूसरे दिन भी निवेशकों और ट्रेडर्स की मुश्किलें कम नहीं हुईं। निफ्टी 50 में कारोबार के अंतिम कुछ मिनटों में करीब 150 अंकों की अचानक उछाल देखने को मिली। खासतौर पर निफ्टी की साप्ताहिक एक्सपायरी के दिन इस बदलाव ने कई ऑप्शन पोजिशन के अंतिम नतीजे बदल दिए। 50 शेयरों वाले निफ्टी इंडेक्स की शुरुआत गैप-डाउन रही। इससे पिछले कारोबारी सत्र की बढ़त लगभग खत्म हो गई और दिन बढ़ने के साथ इंडेक्स में गिरावट और बढ़ती गई। दोपहर 3:20 बजे निफ्टी 24,463 के स्तर पर था, जो 310 अंक यानी 1.3 प्रतिशत नीचे था। हालांकि, आधिकारिक क्लोजिंग के समय निफ्टी 24,615 पर बंद हुआ। यानी अंतिम कुछ मिनटों में इंडेक्स में करीब 151 अंकों की उछाल दर्ज हुई।
सेंसेक्स में रहा अपेक्षाकृत सामान्य कारोबार
निफ्टी के मुकाबले सेंसेक्स में पूरे कारोबारी सत्र के दौरान ज्यादा स्थिर कारोबार देखने को मिला। सेंसेक्स मामूली बढ़त के साथ खुला, लेकिन अंत में 0.3 प्रतिशत की गिरावट के साथ 78,429 पर बंद हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि समय के साथ क्लोजिंग ऑक्शन में बाजार की भागीदारी और लिक्विडिटी बढ़ने पर दोनों एक्सचेंजों के क्लोजिंग स्तरों में दिखाई देने वाला अंतर कम हो सकता है। हालांकि, नई बाजार व्यवस्था में कभी-कभी दोनों एक्सचेंजों के बीच अंतर बने रहना संभव है।
एनएसई पर सीएएस कारोबार का बड़ा हिस्सा
क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम के तहत एनएसई पर करीब 1,542 करोड़ रुपये का टर्नओवर दर्ज किया गया, जो कुल बाजार हिस्सेदारी का 99.4 प्रतिशत था। इसके मुकाबले BSE पर केवल 9.4 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ और उसकी हिस्सेदारी 0.6 प्रतिशत रही। सीएएस का प्रभाव व्यक्तिगत ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट्स में सबसे ज्यादा दिखाई दिया। इसकी वजह यह भी थी कि उसी दिन निफ्टी 50 की साप्ताहिक एक्सपायरी थी। निफ्टी 24,600 पुट ऑप्शन इसका एक उदाहरण रहा। यह दोपहर 3:24 बजे तक 100 रुपये से ऊपर कारोबार कर रहा था, लेकिन इंडेक्स के अंतिम स्तर पर तेजी से ऊपर जाने के बाद आधिकारिक क्लोजिंग पर इसकी वैल्यू खत्म हो गई।
24,500 कॉल ऑप्शन में करीब पांच गुना उछाल
दूसरी तरफ, निफ्टी 24,500 का वीकली कॉल ऑप्शन दोपहर 3:15 बजे करीब 30 रुपये पर कारोबार कर रहा था। अंतिम सेटलमेंट तक इसकी कीमत लगभग पांच गुना बढ़ गई। यह उछाल नियमित कारोबार के दौरान लगातार खरीद-बिक्री के कारण नहीं आया था। इसका मुख्य कारण क्लोजिंग ऑक्शन में निफ्टी के अंतिम क्लोजिंग स्तर में करीब 150 अंकों का अचानक बदलाव था। इससे कई ट्रेडर्स को ऐसे ऑप्शन सेटलमेंट का सामना करना पड़ा, जिनकी कीमतें नियमित कारोबारी घंटों में दिखाई दे रही कीमतों से काफी अलग थीं।
3:15 बजे के स्तर को क्लोज मानना पड़ा भारी
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के अजय चौरे ने कहा कि पिछले दिन सीएएस का असर मुख्य रूप से अनुमानित यानी नॉटशनल नुकसान के रूप में दिखाई दिया था। लेकिन साप्ताहिक एक्सपायरी के दिन यही असर वास्तविक नुकसान में बदल गया। उनके मुताबिक, कुछ ट्रेडर्स 3:15 बजे निफ्टी के करीब 24,450 के स्तर को देखकर अपनी ओपन पोजिशन बनाए हुए थे। उन्हें उम्मीद थी कि इसके बाद ऑप्शन प्रीमियम में गिरावट जारी रहेगी और करीब 50 से 60 अंकों के प्रीमियम वाले कुछ ऑप्शन एक्सपायरी तक शून्य हो जाएंगे। इसी उम्मीद में कई ट्रेडर्स शॉर्ट पोजिशन में बने रहे। लेकिन कैश मार्केट की अंतिम क्लोजिंग में निफ्टी करीब 150 अंक ऊपर एडजस्ट होकर 24,615 पर पहुंच गया। इसका असर कॉल राइटर्स के साथ-साथ कुछ पुट राइटर्स पर भी पड़ा।
ज्यादा ओपन इंटरेस्ट से बढ़ा वास्तविक नुकसान
एक्सिस सिक्यूरिटीज के राजेश पालविया के अनुसार, एट द मनी काल में करीब 33 लाख शेयर का ओपन इंटरेस्ट था। दूसरे काल और पुट स्ट्राइक में भी बड़ी मात्रा में आउटस्टैंडिंग ओपन इंटरेस्ट मौजूद था। ऐसे में निफ्टी में इतनी बड़ी अंतिम उछाल केवल सैद्धांतिक बदलाव नहीं रहती, बल्कि ट्रेडर्स के वास्तविक Profit and Loss पर सीधा असर डालती है। ट्रेडर्स के लिए बड़ी समस्या यह रही कि उन्होंने 3:15 बजे के स्तर को प्रभावी क्लोजिंग मान लिया, जबकि वास्तविक आधिकारिक सेटलमेंट अभी क्लोजिंग ऑक्शन के जरिए तय होना बाकी था। पालविया ने कहा कि आगे एक्सपायरी से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट्स में ट्रेडर्स को अपनी पोजिशन पहले स्क्वायर-ऑफ करने की जरूरत पड़ सकती है। सामान्य दिनों में नॉटशनल नुकसान को संभाला जा सकता है, लेकिन एक्सपायरी के दिन कैश मार्केट में आखिरी समय की रीप्राइसिंग सीधे वास्तविक नुकसान में बदल सकती है।
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