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Israel Gaza Peace Deal: "गाजा से हटेगी इजरायली सेना..." डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा, 'बोर्ड ऑफ पीस' में हुआ फैसला

गाजा में पिछले लंबे समय से जारी विनाशकारी युद्ध और मानवीय संकट के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद बड़ा कूटनीतिक दावा किया है। ट्रंप के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय संस्था 'बोर्ड ऑफ पीस' की मध्यस्थता में हमास और गाजा में सक्रिय अन्य सभी सशस्त्र समूहों के 'पूर्ण निरस्त्रीकरण' पर एक ऐतिहासिक समझौता हो गया है।

इस समझौते के लागू होने के साथ ही इजराइल की सेना चरणबद्ध तरीके से गाजा से अपनी वापसी शुरू करेगी। व्हाइट हाउस और राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे क्षेत्र में स्थायी शांति, सुरक्षा और पुनर्निर्माण की दिशा में एक क्रांतिकारी और ऐतिहासिक कदम बताया है।

क्या है 'बोर्ड ऑफ पीस' और गाजा में कैसे काम करेगी नई व्यवस्था?
'बोर्ड ऑफ पीस' 2026 में गठित एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है, जिसकी स्थापना गाजा युद्ध के बाद वहाँ पुनर्निर्माण, नागरिक प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी के लिए की गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस संस्था के संस्थापक अध्यक्ष हैं।

समझौते की रूपरेखा और भावी योजना:

  • हमास का निरस्त्रीकरण: हमास और अन्य चरमपंथी गुट अपने हथियार सौंपेंगे।
  • इजरायली सेना की वापसी: जैसे-जैसे निरस्त्रीकरण की प्रक्रिया पूरी होगी, इजरायली रक्षा बल (IDF) गाजा पट्टी से बाहर निकलेंगे।
  • नई फिलिस्तीनी सरकार: गाजा में एक नई और निष्पक्ष फिलिस्तीनी सरकार का गठन किया जाएगा, जो आम लोगों के जीवन को सामान्य बनाने और प्रशासन चलाने का काम करेगी।
  • अंतरराष्ट्रीय स्टेबलाइजेशन फोर्स: नई फिलिस्तीनी पुलिस और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल मिलकर गाजा की सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालेंगे, ताकि 7 अक्तूबर जैसे आतंकी हमलों की पुनरावृत्ति न हो सके।

मिस्र, कतर और तुर्किये की मध्यस्थता की सराहना
राष्ट्रपति ट्रंप ने इस ऐतिहासिक मुकाम तक पहुँचने में सहयोग देने के लिए मध्यपूर्व के तीन प्रमुख देशों-मिस्र, कतर और तुर्किये की मध्यस्थता की खुलकर तारीफ की। उन्होंने अपने "20-पॉइंट प्लान" का जिक्र करते हुए कहा कि एक साल पहले जहाँ भीषण युद्ध, मानवीय त्रासदी और बंधकों का संकट था, वहीं आज ऐतिहासिक प्रगति देखने को मिल रही है। व्हाइट हाउस ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर पोस्ट कर इसे दीर्घकालिक शांति की ओर एक मजबूत पड़ाव करार दिया है।

दावों के बीच जमीनी हकीकत: हमास की चुप्पी और गाजा में जारी हमले
हालांकि ट्रंप के इस बड़े ऐलान के बावजूद हमास या उसके शीर्ष नेतृत्व की ओर से तुरंत कोई आधिकारिक बयान या पुष्टि सामने नहीं आई है। वहीं दूसरी ओर, गाजा पट्टी में धरातल पर तनाव अभी भी बरकरार है। फिलिस्तीनी स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, गुरुवार को भी इजरायली हवाई हमलों में कम से कम छह लोगों की मौत हुई, जिनमें दो मासूम बच्चे शामिल थे। ऐसे में इस समझौते के धरातल पर पूर्ण रूप से लागू होने को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें टिकी हुई हैं।

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Black Sea Attack: यूक्रेन के चोर्नोमोर्स्क बंदरगाह पर जहाज के पास हमला, 13 भारतीय नाविक फंसे

नई दिल्ली/कीव। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच ब्लैक सी क्षेत्र में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। यूक्रेन के चोर्नोमोर्स्क बंदरगाह पर तैनात मालवाहक जहाज 'एमवी अमीर1' पर सवार 13 भारतीय नाविकों सहित कुल 15 क्रू सदस्य ड्रोन और मिसाइल हमलों के बीच फंसे हुए हैं।

फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया के अनुसार, जहाज के आसपास लगातार हवाई हमले हो रहे हैं, जिससे चालक दल की सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। यूनियन का कहना है कि नाविक हर समय संभावित हमले के डर में रह रहे हैं और स्थिति किसी भी समय और गंभीर हो सकती है।

भारत सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
यूनियन ने भारत सरकार, जहाज के फ्लैग स्टेट और संबंधित अंतरराष्ट्रीय समुद्री अधिकारियों से तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की है। साथ ही जहाज पर मौजूद सभी नाविकों को सुरक्षित निकालकर जल्द से जल्द स्वदेश वापस लाने की मांग की गई है।

ब्लैक सी में बढ़ा समुद्री सुरक्षा संकट
हाल के दिनों में ब्लैक सी क्षेत्र में ड्रोन और मिसाइल हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं। इसका असर व्यापारिक जहाजों और उन पर काम कर रहे समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा पर भी पड़ रहा है। युद्ध प्रभावित इलाकों में काम कर रहे भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं बढ़ गई हैं।

लगातार बनी हुई है चिंता
समुद्री संगठनों का कहना है कि मौजूदा हालात में जहाज पर मौजूद चालक दल की सुरक्षित निकासी सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। वहीं, भारतीय नाविकों के परिजन भी उनकी सुरक्षित वापसी का इंतजार कर रहे हैं। सरकार और संबंधित एजेंसियों की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
 

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