20 रुपये की रिश्वत, 30 साल तक चलता रहा मुकदमा, 1996 के केस पर सुप्रीम कोर्ट ने अब सुनाया फैसला
गुजरात में 20 रुपये की रिश्वत लेने से जुड़ा करीब 30 साल पुराना मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद खत्म हो गया. कोर्ट ने ग्राम पंचायत के एक क्लर्क और चपरासी की दोषसिद्धि रद्द करते हुए दोनों को बरी कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रिश्वत की मांग साबित हुए बिना सिर्फ रकम की बरामदगी दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं है.
जिम्बाब्वे फेरी हादसे में मरने वालों की संख्या 94 हुई, अफ्रीकी संघ ने जिम्बाब्वे के प्रति जताई संवेदना
Zimbabwe ferry accidents: जिम्बाब्वे में लेक करिबा में हुए फेरी हादसे ने देश को गहरे शोक में डाल दिया है। इस दुर्घटना में मरने वालों की संख्या बढ़कर 94 हो गई है। हादसे पर अफ्रीकी संघ (एयू) आयोग के अध्यक्ष महमूद अली यूसुफ ने जिम्बाब्वे की सरकार और वहां के लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की है।
यूसुफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संदेश में हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों और घटना में बचे लोगों के प्रति संवेदनाएं जताईं। उन्होंने कहा कि इस मुश्किल घड़ी में उनकी प्रार्थनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं। एयू प्रमुख ने प्रभावित परिवारों को इस गहरे दुख से उबरने के लिए हिम्मत, सांत्वना और शक्ति मिलने की कामना की। यूसुफ ने कहा कि एयू जिम्बाब्वे के लोगों और प्रभावित समुदायों के साथ एकजुटता से खड़ा है।
10 से कम लोग लापता
शिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, आधिकारिक आंकड़ों से पता चला है कि मंगलवार तक 77 यात्रियों को बचाया गया, 94 शव बरामद किए गए और 10 से भी कम लोग लापता हैं। एक कैबिनेट मंत्री ने बताया कि जिम्बाब्वे सरकार ने मंगलवार को लेक कराइबा में फेरी पलटने की घटना की औपचारिक जांच शुरू कर दी है।
11 अगस्त को हुआ था हादसा
कार्यवाहक सूचना, प्रचार और प्रसारण सेवा मंत्री मोनिका मुत्स्वांगवा ने जिम्बाब्वे की राजधानी हरारे में कैबिनेट के बाद मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि शुरुआती जांच से पता चलता है कि 11 अगस्त को लेक करिबा में पलटी यात्री फेरी में लगभग 180 यात्री और सामान लदा था, जो उसकी क्षमता से अधिक थे।
खबरों के मुताबिक, तेज लहरों की चपेट में आने के बाद नाव पलट गई। मुत्स्वांग्वा ने कहा कि सरकार ने इस बात पर ध्यान दिया है कि मौसम विभाग ने पहले ही चेतावनी जारी कर झील का इस्तेमाल करने वालों को नाव न चलाने की सलाह दी थी।
77 यात्रियों को बचाया गया था
मुत्स्वांग्वा ने बताया कि 18 अगस्त तक 77 यात्रियों को बचाया गया और 93 लोगों के शव बरामद किए गए, जबकि सात लोग, जिनके नाव पर होने की पुष्टि उनके रिश्तेदारों ने की थी, अभी भी लापता हैं। मुत्स्वांग्वा ने कहा कि सरकार ने औपचारिक जांच शुरू कर दी है, जिसमें नाव के ढांचे की जांच और संचालन व नियमों के पालन से जुड़े मुद्दों की पड़ताल शामिल है।
क्या था कारण?
उसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए स्थानीय सरकार और लोक निर्माण मंत्री डैनियल गार्वे ने इस दुर्घटना के लिए मानवीय भूल और नाव के कप्तान की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया। कप्तान ने मौसम विभाग की शुरुआती चेतावनियों को नजरअंदाज करते हुए यात्रा जारी रखी थी, जबकि विभाग ने नाव न चलाने की सलाह दी थी।
गार्वे ने उन अटकलों को खारिज कर दिया कि नाव चलने लायक नहीं थी। उन्होंने पुष्टि की कि नाव के पास परिवहन और बुनियादी ढांचा विकास मंत्रालय द्वारा जारी वैध फिटनेस सर्टिफिकेट था। कैबिनेट ने इस बात का पता लगाने के लिए पूरी जांच को मंजूरी दे दी है कि किन हालात में कप्तान ने शुरुआती चेतावनियों और सुरक्षा नियमों को नजरअंदाज किया।
(DISCLAIMER: पूरी खबर IANS न्यूज फीड से ली गई है. न्यूजनेशन खबर में किए गए किसी भी डेटा और फैक्ट्स की पुष्टि नहीं करता है.)
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