BofA survey में भारत निवेशकों का सबसे कम पसंदीदा बाजार बना, 32% फंड मैनेजरों का रुख घटा
भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र में निवेशकों की पसंद के मामले में इंडोनेशिया, फिलिपीन और चीन से भी पीछे है तथा सबसे कम पसंदीदा बाजार बन गया है। अमेरिकी ब्रोकरेज कंपनी के सर्वेक्षण में यह जानकारी दी गई। बोफा ग्लोबल रिसर्च के कोष प्रबंधकों द्वारा किए गए सर्वेक्षण में कहा गया है कि अगस्त के पहले पखवाड़े में भारत को लेकर कम निवेश रुख रखने वाले कोष प्रबंधकों की संख्या बढ़कर 32 प्रतिशत हो गई।
इसके मुकाबले इंडोनेशिया के लिए यह आंकड़ा 27 प्रतिशत, फिलिपीन के लिए 23 प्रतिशत और चीन के लिए 18 प्रतिशत रहा। इस सर्वेक्षण में कुल 98 कोष प्रबंधकों ने हिस्सा लिया। ये कोष प्रबंधक सामूहिक रूप से 272 अरब अमेरिकी डॉलर की परिसंपत्तियों का प्रबंधन करते हैं।
सर्वेक्षण में कहा गया, ‘‘भारतीय शेयर बाजारों में कृत्रिम मेधा (एआई) से जुड़े निवेश अवसरों का स्पष्ट अभाव सबसे बड़ी चिंता बना हुआ है। इसके बाद कमजोर आर्थिक वृद्धि को प्रमुख जोखिम माना गया है।’’ सर्वेक्षण में कहा गया है कि एआई से जुड़े अवसरों की कमी को लेकर चिंतित कोष प्रबंधकों का अनुपात अगस्त में बढ़कर 32 प्रतिशत हो गया, जो एक महीने पहले 28 प्रतिशत था। सुधारों को लेकर भी आशंकाएं बढ़ी हैं।
अगस्त में 18 प्रतिशत कोष प्रबंधकों ने सुधारों की कमी को चिंता का विषय बताया, जबकि जुलाई के सर्वेक्षण में यह आंकड़ा 16 प्रतिशत था। हालांकि, कमजोर आर्थिक वृद्धि को लेकर चिंता जताने वाले कोष प्रबंधकों का अनुपात अगस्त में घटकर 18 प्रतिशत रह गया, जो जुलाई में 20 प्रतिशत था। बोफा के सर्वेक्षण के मुताबिक, अगस्त में एशिया-प्रशांत क्षेत्र में ताइवान निवेशकों का सबसे पसंदीदा बाजार रहा, जहां 55 प्रतिशत प्रतिभागियों ने ताइवान के प्रति अधिक निवेश रुख जताया।
जापान 50 प्रतिशत के साथ दूसरे और दक्षिण कोरिया 23 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर रहा।
Gold Demand में सुधार से जुलाई में बढ़ा आयात, WGC ने जताई मजबूती की उम्मीद
देश में सोने की मांग में सुधार के संकेत मिल रहे हैं। सोने की अपेक्षाकृत कम और स्थिर कीमतों को खरीदारी के अवसर के रूप में देखे जाने से आगामी त्योहारी मौसम में बिक्री मजबूत रहने की उम्मीद बढ़ी है। विश्व स्वर्ण परिषद (डब्ल्यूजीसी) ने यह संभावना जताई है।
डब्ल्यूजीसी की ‘इंडिया गोल्ड मार्केट अपडेट’ रिपोर्ट कहती है कि आभूषणों की मांग में सुधार हुआ है और शादी-विवाह से इतर भी सोने की खरीदारी बढ़ी है। कीमतों में उतार-चढ़ाव के बाद उपभोक्ताओं की खरीदारी बढ़ने से खुदरा विक्रेताओं और विनिर्माताओं ने त्योहारी मौसम से पहले अपना स्टॉक बढ़ाना शुरू कर दिया है। उद्योग से मिली जानकारी के अनुसार, पहले टाली गई खरीदारी अब बाजार में लौट रही है।
इससे दुकानों पर ग्राहकों की आवाजाही बढ़ी है और आभूषण कारोबार में मांग सुधरी है। सोने के गहने बनाने वालों को भी मिलने वाले ऑर्डर बढ़ गए हैं। डब्ल्यूजीसी ने कहा कि पुराने सोने की अदला-बदली अब भी खरीदारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
कीमतों में तेजी के दौरान भौतिक सोने में निवेश की मांग कुछ कम हुई, लेकिन यह अब भी मजबूत बनी हुई है। हाल में कीमतों में फिर तेजी आने से निवेशकों की सोने में दिलचस्पी भी बढ़ी है। सोने का आयात भी जुलाई के दौरान बढ़ा।
लगातार दो महीने की कमजोरी के बाद जुलाई में सोने का आयात मूल्य बढ़कर 4.16 अरब डॉलर हो गया, जो जून के 1.97 अरब डॉलर की तुलना में दोगुने से अधिक है। मात्रा के लिहाज से आयात जून के करीब 20 टन से बढ़कर इसके 40-45 टन रहने का अनुमान है। डब्ल्यूजीसी ने कहा कि आयात में यह बढ़ोतरी त्योहारी मौसम से पहले भौतिक मांग और खुदरा विक्रेताओं तथा विनिर्माताओं द्वारा स्टॉक जमा करने का संकेत देते हैं।
इसके साथ, पुराने आभूषणों की जगह नए आभूषण लेने से आने वाला पुनर्चक्रित सोना भी आपूर्ति में योगदान दे रहा है। इसके बावजूद, कुल माल आयात में सोने की हिस्सेदारी करीब पांच प्रतिशत रही, जबकि जनवरी-मार्च के दौरान इसका औसत 11 प्रतिशत था। डब्ल्यूजीसी ने कहा कि ऊंची सोने की कीमतें आगे भी आभूषणों की खरीद को प्रभावित कर सकती हैं।
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