Guru Purnima 2026: गुरु पूर्णिमा पर करें ये सरल उपाय, करियर, सुख-समृद्धि और गुरु कृपा पाने की है मान्यता
Guru Purnima 2026: भारतीय संस्कृति में गुरु को ज्ञान और जीवन का पथप्रदर्शक माना गया है। एक प्रसिद्ध दोहा है- 'गुरु बिन ज्ञान न उपजै, गुरु बिन मिलै न मोष। गुरु बिन लखै न सत्य को, गुरु बिन मिटै न दोष॥' इसका भावार्थ है कि गुरु के मार्गदर्शन के बिना न सच्चे ज्ञान की प्राप्ति होती है, न सत्य का बोध होता है और न ही जीवन की कमियां दूर हो पाती हैं। इसी कारण आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को मनाई जाने वाली गुरु पूर्णिमा गुरु-शिष्य परंपरा के सम्मान का विशेष पर्व मानी जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन गुरु, आचार्य और शिक्षकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के साथ पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व है। ज्योतिषीय मान्यताओं में भी गुरु पूर्णिमा को बृहस्पति ग्रह से जुड़े शुभ कार्यों और आध्यात्मिक साधना के लिए उत्तम माना गया है।
गुरु पूर्णिमा पर किए जाने वाले पारंपरिक उपाय
सुख-समृद्धि की कामना के लिए
गुरु पूर्णिमा के दिन घर की उत्तर-पूर्व (ईशान) दिशा की अच्छी तरह सफाई करें। इसके बाद हल्दी मिले जल से उस स्थान को शुद्ध करें और वहां घी का दीपक जलाकर भगवान एवं गुरु का स्मरण करें। मान्यता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा, शांति और समृद्धि का वास होता है।
करियर और कार्यक्षेत्र में उन्नति के लिए
इस दिन जरूरतमंद लोगों को पीले रंग की वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है। पीली दाल, पीले वस्त्र, केसर, पीले रंग की मिठाई या पीतल की उपयोगी वस्तुएं श्रद्धा से दान की जा सकती हैं। ऐसी मान्यता है कि इससे कार्यक्षेत्र में नए अवसर प्राप्त होते हैं।
गुरु ग्रह की कृपा के लिए
जिन लोगों की ज्योतिषीय मान्यताओं में गुरु ग्रह कमजोर माना जाता है, वे इस दिन गुरु यंत्र की स्थापना कर विधिपूर्वक पूजा कर सकते हैं। श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई उपासना को गुरु कृपा प्राप्त करने का माध्यम माना जाता है।
स्नान और दान का महत्व
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर किसी पवित्र नदी या उपलब्ध स्वच्छ जल में स्नान कर अन्न, वस्त्र, धन अथवा अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करना पुण्यदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इससे जीवन में सुख-समृद्धि और अन्न-धन की वृद्धि होती है।
गुरु मंत्र का जप
यदि आपके जीवन में गुरु हैं तो इस दिन उनका आशीर्वाद अवश्य लें। जिनका कोई आध्यात्मिक गुरु नहीं है, वे भगवान शिव या भगवान विष्णु का स्मरण कर उन्हें अपना गुरु मानकर पूजा कर सकते हैं। इसके बाद श्रद्धापूर्वक गुरु मंत्र का 108 बार जप करना शुभ माना जाता है।
धार्मिक मान्यता
गुरु पूर्णिमा केवल पूजा-पाठ का पर्व नहीं, बल्कि जीवन में ज्ञान, संस्कार और सही मार्ग दिखाने वाले सभी गुरुओं के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर भी है। इस दिन श्रद्धा, सेवा और दान जैसे कार्यों को विशेष महत्व दिया जाता है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। हरिभूमि.कॉम इसकी पुष्टि नहीं करता है।
कावड़ यात्रा में हर 15 से 20 किलोमीटर पर बनाए जाएंगे सुविधा केंद्र, श्रद्धालुओं के लिए भोजन की होगी व्यवस्था, CM मोहन यादव ने दिए निर्देश
मध्य प्रदेश पर्यटन विकास को नई रफ्तार देने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने धार्मिक पर्यटन, आदिवासी संस्कृति और पर्यटन सुविधाओं को लेकर कई अहम फैसले लिए हैं। दरअसल कांवड़ यात्रा में श्रद्धालुओं के लिए हर 15 से 20 किलोमीटर पर सुविधा केंद्र बनाने, भगोरिया उत्सव को राष्ट्रीय स्तर पर प्रमोट करने और होम-स्टे व निजी निवेश को बढ़ावा देने पर सरकार का विशेष फोकस रहेगा।
दरअसल मध्य प्रदेश सरकार अब पर्यटन को सिर्फ घूमने-फिरने तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है। पर्यटन विकास निगम की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों को बेहतर सुविधाओं के साथ देशभर में नई पहचान दिलाई जाए।
स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी फोकस
वहीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समीक्षा बैठक में कहा कि मध्य प्रदेश के पास धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पर्यटन की बड़ी संभावनाएं हैं। इन्हें बेहतर तरीके से विकसित करने के लिए विभागों के बीच समन्वय जरूरी है। उन्होंने पर्यटन विभाग, वन विभाग और संस्कृति विभाग को मिलकर काम करने के निर्देश दिए ताकि पर्यटकों को एक बेहतर अनुभव मिल सके। सरकार का मानना है कि पर्यटन बढ़ने से होटल, ट्रांसपोर्ट, स्थानीय बाजार, हस्तशिल्प और छोटे कारोबारियों को भी सीधा फायदा मिलेगा। इसी वजह से निवेश की मंजूरी देने की प्रक्रिया को तेज करने और निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। सरकार चाहती है कि पर्यटन से जुड़े प्रोजेक्ट तय समय में शुरू हों और उनका लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंचे।
कांवड़ यात्रा और भगोरिया उत्सव बने सरकार की प्राथमिकता
दरअसल बैठक में सावन के दौरान होने वाली कांवड़ यात्रा को लेकर विशेष तैयारियों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं के लिए हर 15 से 20 किलोमीटर पर भोजन प्रसादी और जरूरी सुविधाओं वाले केंद्र बनाए जाएं। इन केंद्रों पर पीने का पानी, विश्राम, प्राथमिक चिकित्सा और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया। उन्होंने धार्मिक संस्थाओं और सामाजिक संगठनों की भागीदारी बढ़ाने की बात कही ताकि व्यवस्थाएं अधिक प्रभावी बन सकें। वहीं, आदिवासी संस्कृति की पहचान माने जाने वाले भगोरिया उत्सव को राष्ट्रीय स्तर पर प्रमोट करने के निर्देश भी दिए गए। सरकार अगले वर्ष के भगोरिया उत्सव की तारीखें पहले से घोषित कर व्यापक प्रचार अभियान चलाना चाहती है, ताकि देश-विदेश से अधिक पर्यटक इस अनूठे सांस्कृतिक आयोजन का हिस्सा बन सकें। इससे आदिवासी संस्कृति को नई पहचान मिलने के साथ स्थानीय कारोबार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
मध्य प्रदेश पर्यटन विकास में होम-स्टे
वहीं मुख्यमंत्री ने ग्रामीण और वन क्षेत्रों में होम-स्टे मॉडल को मजबूत करने पर भी विशेष जोर दिया। उनका मानना है कि इससे पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति, खानपान और जीवनशैली को करीब से जानने का अवसर मिलेगा, जबकि गांवों में रहने वाले लोगों की आय भी बढ़ेगी। इसके साथ ही बड़े शहरों में निजी निवेश के जरिए आधुनिक कन्वेंशन सेंटर विकसित करने की योजना पर भी काम तेज किया जाएगा। राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के किनारे बनने वाले सुविधा केंद्रों में अस्पताल, ट्रॉमा सेंटर, पेट्रोल पंप, इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इन परियोजनाओं को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के जरिए विकसित करने पर भी विचार किया जा रहा है।
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