Responsive Scrollable Menu

UP: मौत का कारण स्पष्ट नहीं… IPS की मां की संदिग्ध मौत पर SP का बयान, बोलीं- जेवरात अब भी गायब

अंबेडकरनगर में आईपीएस आशुतोष मिश्रा की मां की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत की पुलिस जांच जारी है. एसपी प्राची सिंह ने निष्पक्ष और गहन पड़ताल की बात कही है. मामले में हत्या-लूट का मुकदमा दर्ज है.

Continue reading on the app

भगवान को भोग लगाते समय क्यों जरूरी है तुलसी पत्र? जानें इसका धार्मिक महत्व और नियम

Bhagwan Ko Bhog lagane ka niyam: हिंदू धर्म में भोजन बनाने के बाद सबसे पहले उसका एक हिस्सा भगवान को अर्पित करने की परंपरा "भोग" या "नैवेद्य" कहलाती है। मान्यता है कि बिना भगवान को भोग लगाए घर के सदस्यों को भोजन ग्रहण नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसे अन्न के प्रति कृतज्ञता और भगवान के प्रति समर्पण व्यक्त करने का एक पवित्र तरीका माना जाता है।

भोग में तुलसी पत्र डालने का धार्मिक कारण
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, भगवान विष्णु और उनके अवतारों, खासकर भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित किए जाने वाले भोग में तुलसी पत्र डालना अनिवार्य माना जाता है। मान्यता है कि तुलसी के बिना भगवान विष्णु किसी भी भोग को स्वीकार नहीं करते, इसी वजह से खीर, हलवा या किसी भी मीठे व्यंजन में एक तुलसी पत्र जरूर डाला जाता है।

कथाओं में यह भी उल्लेख मिलता है कि तुलसी को देवी लक्ष्मी का ही एक स्वरूप माना जाता है, और भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है, इसी वजह से भोग में इसका होना अनिवार्य माना गया है।

भोग लगाने की सही विधि
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, भोग हमेशा स्वच्छ मन और शुद्ध वातावरण में तैयार करना चाहिए। मान्यता है कि भोजन बनाते समय भगवान का ध्यान करना और उसे बिना चखे भगवान को अर्पित करना विशेष रूप से आवश्यक माना जाता है। इसके अलावा भोग को हमेशा भगवान की मूर्ति या तस्वीर के सामने, स्वच्छ पात्र में रखकर अर्पित करना चाहिए।

यह भी मान्यता है कि भोग लगाते समय घंटी बजाना और "ॐ प्राणाय स्वाहा" जैसे मंत्रों का उच्चारण करना अत्यंत शुभ माना जाता है, जिससे भोग की पवित्रता और भी बढ़ जाती है।

किन चीजों का भोग नहीं लगाया जाता?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान को कभी भी लहसुन-प्याज से बना भोजन अर्पित नहीं किया जाता, क्योंकि इन्हें तामसिक भोजन की श्रेणी में रखा जाता है। इसके अलावा बासी भोजन का भोग लगाना भी वर्जित माना जाता है, केवल कुछ विशेष प्रसाद जैसे पंचामृत को इसका अपवाद माना जाता है। मान्यता है कि भगवान को हमेशा ताजा और सात्विक भोजन ही अर्पित करना चाहिए।

भोग के बाद प्रसाद बांटने की परंपरा
धार्मिक परंपराओं में यह भी बताया गया है कि भगवान को भोग अर्पित करने के कुछ समय बाद उसी भोजन को प्रसाद के रूप में परिवार और अन्य लोगों में बांटा जाता है। मान्यता है कि भगवान को अर्पित किया गया भोजन प्रसाद बनकर और भी अधिक पवित्र हो जाता है, जिसे ग्रहण करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

आज भी हर घर में निभाई जाती है यह परंपरा
समय के साथ भले ही जीवनशैली में कई बदलाव आए हों, लेकिन भगवान को भोग लगाने की यह परंपरा आज भी अधिकतर हिंदू घरों में श्रद्धापूर्वक निभाई जाती है। चाहे रोजाना की रसोई हो या किसी बड़े त्योहार का प्रसाद, भोजन में तुलसी पत्र डालकर भगवान को भोग अर्पित करना आज भी एक अनिवार्य धार्मिक रस्म मानी जाती है।

डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक ग्रंथों और लोक-परंपराओं पर आधारित है। Haribhoomi.com इनकी किसी भी तरह की सटीकता या तथ्य की पुष्टि नहीं करता है। इन्हें केवल सामान्य जानकारी के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है। किसी भी उपाय या धार्मिक कर्मकांड को अपनाने से पहले संबंधित विषय के विद्वान से सलाह अवश्य लें।

Continue reading on the app

  Sports

आर्मागेडन में टूटा प्रज्ञाननंदा का सपना, वेस्ली सो ने मारी बाजी, सिंकफील्ड कप में दूसरी पोजिशन पर भारतीय स्टार

भारतीय ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञाननंदा सिंकफील्ड कप शतरंज टूर्नामेंट में दूसरे स्थान पर रहे. अंतिम दौर की क्लासिकल बाजी में नीदरलैंड के अनीश गिरी के खिलाफ ड्रॉ के बाद प्रज्ञाननंदा और अमेरिका के वेस्ली सो के बीच टाईब्रेकर हुआ। दोनों रैपिड गेम भी ड्रॉ रहे, जिसके बाद मुकाबला आर्मागेडन तक पहुंचा. Thu, 20 Aug 2026 11:31:10 +0530

  Videos
See all

Weather Update: समंदर में ZERO, 21 राज्यों में तूफान | Rain Alert | Monsoon | Mayank Mishra | N18G #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-20T05:47:12+00:00

8th Pay Commission News: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ा अपडेट, बढ़ेगी सैलरी! | Employee | Salary #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-20T05:30:05+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers