गॉडफ्रे फिलिप्स का शुद्ध मुनाफा पहली तिमाही में 44.3 प्रतिशत घटकर 198.39 करोड़ रुपये रहा
नयी दिल्ली, 27 जुलाई सिगरेट निर्माता कंपनी गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया ने सोमवार को बताया कि चालू वित्त वर्ष की जून तिमाही में उसका एकीकृत शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 44.3 प्रतिशत घटकर 198.39 करोड़ रुपये रह गया। कंपनी ने बताया कि करों में बढ़ोतरी के कारण उसका मुनाफा घटा। मोदी एंटरप्राइजेज की प्रमुख कंपनी गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया ने शेयर बाजार को बताया कि उसने एक साल पहले अप्रैल-जून तिमाही में 356.28 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया था।
कंपनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) शरद अग्रवाल ने कहा, वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में लागू की गई भारी कर वृद्धि के कारण पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में मुनाफा 44 प्रतिशत घट गया। वित्त वर्ष 2026-27 की जून तिमाही में परिचालन राजस्व दोगुना होकर 3,819.56 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 1,813.26 करोड़ रुपये था। कंपनी ने समीक्षाधीन तिमाही के दौरान 2,614 करोड़ रुपये का उत्पाद शुल्क दिया।
सरकार ने निजी बीएस-6 वाहनों के लिए पीयूसीसी वैधता बढ़ाकर तीन साल करने का प्रस्ताव दिया
नयी दिल्ली, 27 जुलाई सरकार ने वाहन मालिकों पर अनुपालन बोझ कम करने के लिए छह साल तक पुराने निजी भारत चरण-6 (बीएस-6) वाहनों के लिए प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसीसी) की वैधता को मौजूदा एक साल से बढ़ाकर तीन साल करने का प्रस्ताव दिया है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने एक मसौदा अधिसूचना में कहा कि छह से 10 साल तक पुराने बीएस-6 वाहनों को हर दो साल में अपने पीयूसीसी प्रमाणपत्र का नवीनीकरण कराना होगा और 10 वर्ष से अधिक पुराने वाहनों को हर छह महीने में ऐसा करना होगा। अधिसूचना के अनुसार बीएस-4 उत्सर्जन मानकों का अनुपालन करने वाले सभी मोटर वाहनों को हर छह महीने में अपने पीयूसीसी का नवीनीकरण कराना होगा।
इसके अलावा बीएस-1, बीएस-2 और बीएस-3 उत्सर्जन मानकों का अनुपालन करने वाले सभी मोटर वाहनों को हर तीन महीने में अपने पीयूसीसी का नवीनीकरण कराना होगा। बीएस या भारत चरण देश में वाहन उत्सर्जन मानकों से संबंधित है। इसके जरिये कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन और पार्टिकुलेट मैटर जैसे प्रदूषकों की सीमा तय की जाती है।
बीएस-4 वर्ष 2017 से 2020 तक लागू था। बीएस-6 अप्रैल, 2020 से लागू है। प्रदूषण नियंत्रण में तेजी लाने के लिए भारत ने बीएस-पांच को छोड़ दिया और सीधे बीएस-छह पर आ गया।
ये वाहन बहुत कम प्रदूषकों का उत्सर्जन करते हैं और इन्हें कम सल्फर वाले बीएस-छह ईंधन की आवश्यकता होती है।




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