किर्गिस्तान में भारत की स्वास्थ्य पहल, भाभाट्रॉन-2 मशीन से दस गुना अधिक मरीजों का इलाज
बिश्केक, 27 जुलाई (आईएएनएस)। किर्गिस्तान के स्वास्थ्य मंत्री दामिरबेक ओस्मोनोव और भारत के राजदूत बीरेंद्र सिंह यादव ने सोमवार को बिश्केक स्थित नेशनल सेंटर ऑफ ऑन्कोलॉजी एंड हेमाटोलॉजी का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने हाल ही में भारत की ओर से दिए गए नए कोबाल्ट-60 स्रोत के बाद वहां काम कर रही भाभाट्रॉन-2 कैंसर इलाज मशीन के संचालन के बारे में जानकारी ली।
किर्गिस्तान में भारतीय दूतावास के अनुसार, भाभाट्रॉन-2 कैंसर इलाज मशीन को पहले भी भारत सरकार ने देश की राजधानी स्थित नेशनल सेंटर ऑफ ऑन्कोलॉजी एंड हेमेटोलॉजी को उपहार के रूप में दिया था।
भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “किर्गिस्तान गणराज्य के स्वास्थ्य मंत्री महामहिम दामिरबेक ओस्मोनोव और राजदूत बीरेंद्र सिंह यादव ने नेशनल सेंटर ऑफ ऑन्कोलॉजी एंड हेमेटोलॉजी का दौरा किया और नए कोबाल्ट-60 स्रोत को लगाने के बाद भाभाट्रॉन-2 कैंसर इलाज मशीन के कामकाज के बारे में जानकारी ली। यह मशीन पहले भारत सरकार की ओर से बिश्केक के नेशनल सेंटर ऑफ ऑन्कोलॉजी एंड हेमेटोलॉजी को दी गई थी।”
दूतावास ने बताया कि कोबाल्ट-60 स्रोत को बदलने के बाद अब भाभाट्रॉन-2 मशीन एक दिन में पहले की तुलना में 10 गुना ज्यादा मरीजों का इलाज कर सकती है।
दूतावास ने कहा कि कोबाल्ट-60 स्रोत को बदलने का यह काम भारत सरकार और भारत के लोगों की ओर से किर्गिस्तान गणराज्य को दिया गया एक उपहार है।
पिछले हफ्ते विदेश मंत्रालय में राज्य मंत्री (एमओएस) कीर्ति वर्धन सिंह ने किर्गिस्तान के चोल्पोन अता शहर में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान किर्गिस्तान के विदेश मंत्री झीनबेक कुलुबाएव से मुलाकात की।
इस बैठक में दोनों मंत्रियों ने भारत-किर्गिस्तान साझेदारी में हुई प्रगति की समीक्षा की और दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की।
बैठक के बाद राज्य मंत्री सिंह ने एक्स पर लिखा, “किर्गिस्तान के विदेश मंत्री महामहिम झीनबेक कुलुबाएव से एससीओ विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान मिलकर खुशी हुई। हमने अपनी द्विपक्षीय साझेदारी में हुई प्रगति की समीक्षा की और प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। भारत-किर्गिस्तान रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की अपनी साझा प्रतिबद्धता को दोहराया।”
--आईएएनएस
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सरकार ने दी प्लास्टिक करेंसी छापने की मंजूरी, जानें पहले कौन से नोट बाजार में आएंगे
आने वाले दिनों में जल्द ही आपके हाथ में कागज के नहीं बल्कि प्लास्टिक के नोट होंगे. जी हां इन नोटों की खासियत होगी कि ये दिखने में अच्छे होंगे ही साथ ही इनके गलने, खराब होने की संभावना भी न के बराबर हो जाएगी. जी हां केंद्र सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसमें कम मूल्य वाले नोटों के लिए पॉलिमर यानी प्लास्टिक करेंसी का परीक्षण किया जाएगा. हालांकि, यह अभी सिर्फ ट्रायल के तौर पर होगा और इससे मौजूदा कागज के नोटों पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
सरकार ने साफ किया है कि देश में चल रहे पेपर नोट बंद करने की कोई योजना नहीं है. पॉलिमर नोट फिलहाल पुराने नोटों के साथ ही इस्तेमाल किए जाएंगे. अगर यह प्रयोग सफल रहता है, तो भविष्य में इन्हें बड़े पैमाने पर जारी करने पर विचार किया जा सकता है.
सबसे पहले 10 और 20 रुपए के नोट पर होगा परीक्षण
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने RBI के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. इसके तहत 10 और 20 रुपए मूल्य वर्ग के पॉलिमर नोटों को फील्ड ट्रायल के लिए जारी किया जाएगा. इन नोटों को देश के अलग-अलग हिस्सों में चलाकर देखा जाएगा कि भारतीय मौसम, तापमान, नमी और रोजमर्रा के इस्तेमाल में ये कितने टिकाऊ साबित होते हैं. RBI यह भी जांच करेगा कि आम लोगों के लेनदेन में इन नोटों को लेकर कैसी प्रतिक्रिया मिलती है.
छोटे मूल्य के नोट जैसे 10 और 20 रुपए के सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाते हैं और जल्दी खराब भी हो जाते हैं. ऐसे में पॉलिमर नोटों को अपनाने का उद्देश्य उनकी उम्र बढ़ाना और बार-बार छपाई की लागत को कम करना है.
कागज के नोटों से ज्यादा टिकाऊ होते हैं पॉलिमर नोट
पॉलिमर नोट खास तरह के प्लास्टिक से बनाए जाते हैं, जो सामान्य कागज के नोटों की तुलना में ज्यादा मजबूत और लंबे समय तक चलने वाले होते हैं. इन्हें पानी, धूल और नमी से कम नुकसान पहुंचता है.
भारत जैसे देश में जहां गर्मी, बारिश और अलग-अलग मौसम की स्थिति रहती है, वहां नोटों की मजबूती एक बड़ी चुनौती है. छोटे नोट अक्सर जेब, बाजार और रोजाना के लेनदेन में जल्दी फट जाते हैं या गंदे हो जाते हैं. पॉलिमर नोट इस समस्या को कम कर सकते हैं.
इसके अलावा, इन नोटों की लाइफ ज्यादा होने से सरकार और RBI को पुराने नोटों को बदलने और दोबारा छापने में होने वाला खर्च भी कम हो सकता है.
नकली नोटों पर रोक लगाने में भी मिलेगी मदद
RBI के अनुसार, पॉलिमर नोटों में आधुनिक सुरक्षा फीचर्स को आसानी से शामिल किया जा सकता है. इनमें पारदर्शी विंडो, विशेष सिक्योरिटी फीचर और अन्य तकनीकी उपाय लगाए जा सकते हैं, जिससे नकली नोट बनाना मुश्किल हो जाएगा.
देश में नकली मुद्रा की समस्या को देखते हुए सुरक्षित करेंसी सिस्टम हमेशा प्राथमिकता रहा है. पॉलिमर नोटों में मौजूद हाई सिक्योरिटी फीचर्स नकली नोटों की पहचान को भी आसान बना सकते हैं.
क्या खत्म हो जाएंगे कागज के नोट?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल कागज के नोटों को हटाने की कोई योजना नहीं है. पॉलिमर नोट केवल एक विकल्प के रूप में आजमाए जा रहे हैं. RBI का मानना है कि आने वाले समय में नकद भुगतान और डिजिटल पेमेंट दोनों साथ-साथ चलते रहेंगे. डिजिटल लेनदेन बढ़ने के बावजूद देश में नकदी का इस्तेमाल अभी भी बड़े स्तर पर होता है, खासकर छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में.
पहले भी हो चुका है पॉलिमर नोटों का प्रयोग
दुनिया के कई देशों में पॉलिमर नोट पहले से इस्तेमाल किए जा रहे हैं. इन देशों ने इन्हें ज्यादा सुरक्षित, टिकाऊ और पर्यावरण के लिहाज से बेहतर विकल्प के रूप में अपनाया है.
भारत में भी पहले कुछ स्थानों पर पॉलिमर नोटों को लेकर परीक्षण किए गए थे. अब नए सिरे से 10 और 20 रुपए के नोटों का फील्ड ट्रायल किया जाएगा ताकि भारतीय परिस्थितियों के हिसाब से इसकी उपयोगिता को समझा जा सके. फिलहाल लोगों को नए नोटों के लिए थोड़ा इंतजार करना होगा, क्योंकि RBI के परीक्षण के बाद ही इनके बड़े पैमाने पर इस्तेमाल पर अंतिम फैसला लिया जाएगा.
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