रतलाम: ई-स्कूटी में हुआ ब्लास्ट, घर में लगी आग, झुलसी मां-बेटी का चल रहा इलाज
रतलाम की विंध्यवासिनी कॉलोनी में बुधवार तड़के 4 बजे एक बड़ा हादसा देखने को मिला। दरअसल, यहां घर में रखी हुई ई स्कूटी में विस्फोट हो गया। इसकी वजह से आग लग गई जो देखते ही देखते पूरे मकान में फैल गई।
इस हादसे में घर में सो रही आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और उनकी 16 साल की बेटी 60% तक झुलस गए हैं। आग इतनी भयानक थी कि घर का पूरा सामान जल गया है। घर के कूलर पंखे पिघल गए हैं।
ई स्कूटी में हुआ विस्फोट
जानकारी के मुताबिक परिवार ने 10 दिन पहले ही माणक चौक के एक शोरूम से 85000 रुपए में नई इलेक्ट्रॉनिक स्कूटी खरीदी थी। यह चार्जिंग पर भी नहीं लगी हुई थी लेकिन तड़के 4 बजे इसमें अचानक धमाका हुआ। धमाके की वजह से आग पूरे कमरे में फैल गई। इस घटना में स्कूटी पूरी तरह से जलकर खाक हो गई है, केवल लोहे का ढांचा बचा है।
पड़ोसियों ने की मदद
जब घर में आग लगी तब आंगनवाड़ी कार्यकर्ता बिंदुकुंवर उनकी छोटी बेटी अंतिम और बड़ी बेटी विजय लक्ष्मी सो रहे थे। अचानक धुएं और घबराहट की वजह से उनकी आंख खुली तो चारों तरफ आग लगी हुई थी। शोर मचाने पर पड़ोसियों ने काफी मशक्कत के बाद मां और दोनों बेटियों को घर से बाहर निकाला।
इस मामले में परिवार की बड़ी बेटी ने बताया कि सुबह जब नींद खुले तो स्कूटी में आग लगी हुई थी। यह देखकर सबसे पहले गैस की टंकी का बटन बंद किया लेकिन आगे भी गैस की टंकी रखी थी। उसके बाद ऊपर का गेट खोलने के लिए दौड़ी। इस दौरान छोटी बहन डर कर पीछे वाले कमरे में चले गई। नीचे आई तो मां छोटी बहन को लेने के लिए अंदर गई तभी आग तेज हो गई। इसके बाद दोनों मुझे जलते हुए बाहर आते दिखाई दिए। जैसे-जैसे दोनों का हाथ पकड़ कर उन्हें छत पर लेकर पहुंची। वहां से पड़ोसी की छत के जरिए नीचे उतर कर बाहर निकले।
समय से नहीं पहुंची एंबुलेंस
जैसे ही पड़ोसियों को घर में आग लगने की जानकारी लगी उन्होंने रसोई गैस का सिलेंडर बाहर निकाला। इसके बाद फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची नगर निगम के दमकलकर्मियों की टीम ने आग पर काबू पाया। इस मामले में पड़ोसियों का कहना है कि बार-बार कॉल करने के बाद भी डेढ़ घंटे तक एंबुलेंस नहीं आई। इसके बाद घायलों को निजी गाड़ी से रतलाम जिला अस्पताल ले जाएंगे। यहां प्राथमिक इलाज के बाद दोनों को गंभीर स्थिति में मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है। दोनों 60 फीसदी तक झुलस गई हैं। पुलिस यह जांच कर रही है कि जब स्कूटी चार्जिंग पर नहीं थी तो उसमें ब्लास्ट कैसे हो गया।
NEET पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, NTA को UPSC जैसी मजबूत परीक्षा व्यवस्था बनाने के निर्देश
NEET-UG पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में सुधार से जुड़े मामले की बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। शीर्ष अदालत ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली और परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि सिर्फ कागजी तौर पर सुधार पर्याप्त नहीं हैं। परीक्षा संचालन के लिए स्थायी, वैज्ञानिक और मजबूत संस्थागत व्यवस्था विकसित करना भी जरूरी है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने NTA में UPSC जैसी संस्थागत विशेषज्ञता और क्षमता विकसित करने की जरूरत पर जोर दिया। अदालत ने कहा कि सुधार किसी एक परीक्षा तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जो भविष्य में होने वाली सभी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की विश्वसनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित कर सके।
NTA की साइबर सुरक्षा पर भी सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने NTA की साइबर सुरक्षा, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, परीक्षा संबंधी डेटाबेस, तकनीकी विशेषज्ञता और रिसर्च एंड डेवलपमेंट को लेकर भी जानकारी मांगी। अदालत ने यह जानना चाहा कि क्या NTA के पास डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए समर्पित अधिकारी और विभाग हैं तथा क्या परीक्षा से जुड़े संवेदनशील डेटा के लिए सुरक्षित और स्वतंत्र तकनीकी व्यवस्था विकसित की जा रही है। अदालत ने एनटीए के मानव संसाधन और भौतिक ढांचे पर भी सवाल किए। इसमें वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति, उनके कार्यभार संभालने, सुरक्षित कार्यालय परिसर और परीक्षा संचालन के लिए जरूरी स्थायी इंफ्रास्ट्रक्चर से संबंधित जानकारी शामिल थी।
केंद्र ने बताया “NEET परीक्षा में कई स्तर की सुरक्षा”
सुनवाई में केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने NEET प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर परीक्षा केंद्र तक पहुंचने की प्रक्रिया के बारे में अदालत को जानकारी दी। सरकार के मुताबिक प्रश्नपत्र तैयार करने के लिए कई विषय विशेषज्ञ और मॉडरेटर काम करते हैं तथा विशेषज्ञों को यह जानकारी नहीं होती कि उनके तैयार किए गए सवालों में से कौन-से सवाल अंतिम प्रश्नपत्र में शामिल होंगे। सरकार ने यह भी बताया कि प्रश्नपत्रों के परिवहन के लिए इस्तेमाल होने वाले वाहनों में GPS ट्रैकिंग की व्यवस्था है और परीक्षा प्रक्रिया में कई सुरक्षा उपाय लागू हैं। केंद्र ने मौजूदा व्यवस्था को मजबूत और सुरक्षित बताते हुए अदालत के सामने अपनी दलील रखी।
तीन सप्ताह में हलफनामा दाखिल करने के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूर्व इसरो प्रमुख के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ समिति की परीक्षा सुधार संबंधी सिफारिशों और बाद में नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता वाली समिति की ओर से सुझाए गए सुधारों को लागू करने की स्थिति पर विस्तृत जानकारी मांगी है। अदालत ने केंद्र सरकार को इस संबंध में तीन सप्ताह के भीतर ताजा हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा है।
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