'मुझे बीच रास्ते में रोक लिया और...', ट्रांसजेंडर बनकर सड़कों पर घूम रहा था ये एक्टर, लड़कों ने की गंदी हरकत
Abhay Verma on becoming Transgender: 'मुंज्या' और 'किंगडम' जैसी फिल्मों से अपनी अलग पहचान बना चुके एक्टर अभय वर्मा 27 जुलाई को अपना जन्मदिन मना रहे हैं. कम समय में इंडस्ट्री में अपनी दमदार एक्टिंग से पहचान बनाने वाले अभय अपने किरदारों के लिए पूरी मेहनत करते हैं. यही वजह है कि एक फिल्म की तैयारी के दौरान उन्होंने ऐसा एक्सपेरिमेंट किया, जिसने उन्हें जिंदगी का एक कड़वा सच दिखा दिया. ट्रांसजेंडर का किरदार निभाने के लिए जब वो असली लुक में मुंबई की सड़कों पर निकले, तब उनके साथ ऐसी घटना हुई जिसे वो आज भी नहीं भूल पाए हैं.
अभय वर्मा की पर्सनल लाइफ
अभय वर्मा का जन्म 27 जुलाई 1998 को हरियाणा के पानीपत में हुआ था. एक्टर ने बताया था कि जब वो आठवीं क्लास में थे तो संजय लीला भंसाली की फिल्म 'गोलियों की रासलीला: रामलीला' देखने के लिए गए थे. फिल्म देखकर अभय वर्मा हिल गए थे और इसके बाद अभय ने भी एक्टर बनने का सपना देखा. जबकि इससे पहले उनका एक्टिंग में आने का कोई प्लान नहीं था. फिर 19 साल की उम्र में एक्टर बनने के लिए अभय मुंबई आए और कड़ी मेहनक की. उन्होंने पहले एड में काम किया था. इसके बाद वो वेब सीरीज और फिल्मों में दिखाई दिए.
फिल्म में बने ट्रांसजेंडर
अभय वर्मा ने साल 2023 में आई फिल्म 'सफेद' (Safed) में ट्रांसजेंडर का रोल प्ले किया था. इस रोल को सिर्फ मेकअप या एक्टिंग तक सीमित रखने के बजाय उन्होंने इस किरदार में खुद को पूरी तरह से ढालने की कोशिश की और बनारस में ट्रांसजेंडर की तरह रहने लगे. फिर एक दिन रात को एक्टर घर जा रहे थे तो कुछ लड़कों ने उन्हें सड़क पर घेर लिया था. उन्हें लगा कि लोग शायद उन्हें पहचान लें, लेकिन कुछ ही मिनटों में उनके साथ गलत व्यवहार होने लगा.
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लड़कों ने की जबरदस्ती करने की कोशिश
अभय ने एक पुराने इंटरव्यू में बताया था- 'मुझे बीच रास्ते में रोक लिया और ट्रांसजेंडर समझकर मुझसे बदसलूकी करने लगे थे. उन लोगों को फिर मैने बताया कि मैं ट्रांसजेंडर नहीं हो, बल्कि अपने रोल के लिए ऐसा कर रहा हूं. उसके बाद उन लोगों ने मुझे जाने दिया था.' अभय ने कहा था कि इस एक्सपीरियंस ने उन्हें समझा दिया था कि ट्रांसजेंडर को अपनी की जिंदगी में किस तरह के भेदभाव और उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है.
अभय वर्मा को मिली ये सीख
अभय वर्मा ने कहा था कि ये सिर्फ एक एक्टिंग एक्सरसाइज नहीं थी, बल्कि उनके लिए जिंदगी का बड़ा सबक था। उन्होंने महसूस किया कि जिन लोगों को समाज अक्सर नजरअंदाज कर देता है, उन्हें हर दिन बिना किसी गलती के अपमान और गलत व्यवहार झेलना पड़ता है. उन्होंने ये भी कहा था कि इस एक्सपीरियंस के बाद उनके अंदर ट्रांसजेंडर समुदाय के प्रति सम्मान और बढ़ गया था. यही वजह रही कि उन्होंने अपने किरदार को पूरी ईमानदारी के साथ निभाया.
'मुंज्या' से मिली बड़ी पहचान
हालांकि अभय वर्मा ने अपने करियर की शुरुआत छोटे-छोटे रोल से की थी, लेकिन उन्हें देशभर में पहचान फिल्म 'मुंज्या' से मिली. इस हॉरर-कॉमेडी फिल्म में उनकी परफॉर्मेंस को दर्शकों ने काफी पसंद किया. इसके बाद वो लगातार नए और अलग-अलग तरह के किरदारों में नजर आ रहे हैं. अभय का मानना है कि एक एक्टर की असली पहचान तभी बनती है, जब वो अपने किरदार के साथ पूरी तरह ईमानदार रहे और उसके पीछे की भावनाओं को समझने की कोशिश करे.
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Commonwealth Games 2026 में भारतीय एथलीटों ने बिखेरा जलवा, झंडू कुमार और मुथुपंडी राजा समेत चानू-ऋषिकांत ने जीते मेडल
Commonwealth Games 2026 : कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय एथलीटों का जलवा बरकरार है. अब तक भारतीय एथलीट्स कुल 4 मेडल अपने नाम कर चुके हैं, जिसमें मीराबाई चानू का गोल्ड मेलड भी शामिल हैं. वहीं ऋषिकांत सिंह कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पदक जीतने वाले पहले एबल-बॉडीड में पहले भारतीय बने हैं. भारत के लिए बीती रात मुथुपंडी राजा ने 65 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग इवेंट में रजत पदक जीता. उन्होंने भारत को सिल्वर मेडल दिलाया. वहीं देश के लिए पुरुषों के पैरा पावरलिफ्टिंग इवेंट में भारतीय पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने कांस्य पदक जीता. उन्होंने देश को बॉन्ज मेडल दिलाकर भारत का नाम रोशन किया. तो आइए आज हम भारत के लिए अब तक पदक जीतने वाले सभी एथलीटों के बारे में जानते हैं.
राजा मुथुपंडी ने जीता सिल्वर मेडल
भारतीय वेटलिफ्टर राजा मुथुपंडी ने देश का नाम रोशन किया है. उन्होंने स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पुरुषों के 65 किलोग्राम भार वर्ग में कुल 286 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक (सिल्वर मेडल) अपने नाम किया है. ये भारत का दूसरा सिल्वर मेडल हैं. मुथुपंडी राजा ने स्नैच राउंड में अपने दूसरे प्रयास में 126 किलो वजन उठाकर बढ़त हासिल की थी. इसके बाद क्लीन एंड जर्क राउंड में भी उन्होंने दूसरे प्रयास में 160 किलो वजन उठा लिया. उन्होंने कुल 286 किलो वजन उठाकर भारत के लिए मेडल पक्का कर दिया. उन्हें 2019 में कोहनी की गंभीर चोट लगी थी और 2022 के बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में भी हिस्सा नहीं ले पाए लेकिन अब उन्होंने धमला मचा दिया है.
मुथुपंडी राजा ने भारत को सिल्वर मेडल दिलाने के बाद कहा कि, 'मैं स्वर्ण पदक जीतने के लक्ष्य के साथ उतरा था, लेकिन ट्रेनिंग के दौरान जैसा प्रदर्शन कर रहा था, वैसा नहीं कर सका. इसके बावजूद रजत पदक जीतकर खुश हूं. मैं भारतीय खेल प्राधिकरण (साई), इंडियन वेटलिफ्टिंग फेडरेशन और अपने कोच विजय शर्मा को इस पूरे सफर में मेरा साथ देने और इस मुकाम तक पहुंचने में मेरी मदद करने के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं'.
ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल 2026 में पुरुषों की 65 किग्रा वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में रजत पदक जीतने वाले श्री राजा मुथुपांडी जी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं..????????#Congratulations pic.twitter.com/iOS6HGmnez
— Harshal Shah (@Harshal1781) July 27, 2026
झंडू कुमार ने दिलाया भारत को बॉन्ज मेडल
भारतीय पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल 2026 में पुरुषों के हेवीवेट वर्ग में भारत के लिए कांस्य पदक जीता है. इसके साथ ही उन्होंने पैरा खेलों में भारत के मेडल टैली का खाता भी खोल दिया है. झंडू ने पहली कोशिश में 180 किलो वजन उठाया फिर उन्होंने इसलके बाद 196 किलो जन उठाया. उन्होंने पुरुषों के हेवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग वर्ग में 190 किलोग्राम वजन भारत के लिए बॉन्ज मेडल अपने नाम किया.
भारत को बॉन्ज मेडल दिलाने के बाद झंडू कुमार ने कहा कि, 'आज का दिन मेरे लिए बहुत खास है. मुझे जो प्यार और समर्थन मिला है, उसके लिए मैं सभी का आभारी हूं. यह मेरे लिए बेहद प्रेरणादायक है, भारत के लिए पदक जीतना और देश का तिरंगा ऊंचा लहराते देखना गर्व की बात है. देश के लिए मैंने पहला मेडल जीता. हालांकि, स्वर्ण पदक नहीं जीत पाने का थोड़ा अफसोस है. अगली बार और अधिक मेहनत करके गोल्ड जीतने की कोशिश करूंगा. यह मेडल देश के लिए बहुत जरूरी है. जब से साईं में सेलेक्शन हुआ, तब से हमने अच्छा प्रदर्शन किया. वर्ष 2025 में चीन में देश के लिए ब्रॉन्ज मेडल जीता था. इसके बाद थाईलैंड में जाकर ब्रॉन्ज मेडल देश को दिलाया. इस बार थोड़ी सी तकनीकी कमी रह गई; आगे उसको दूर करने की कोशिश करूंगा'.
???? बिहार के झंडू कुमार ने रचा इतिहास ????????
— KUMAR (@MyCric101) July 25, 2026
नालंदा के झंडू कुमार ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पैरा पावरलिफ्टिंग ब्रॉन्ज जीतकर भारत को पहला मेडल दिलाया।#CommonwealthGames #India #JhanduKumar #Bihar #ParaPowerlifting #BreakingNews pic.twitter.com/9Hf6Nsc7gT
भारत को मीराबाई चानू ने दिलाया गोल्ड
कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को पहला गोल्ड मेडल मीराबाई चानू ने वेटलिफ्टिंग में दिलाया. उन्होंने लगातार चौथी बार कॉमनवेल्थ गेम्स में मेडल जीता है. मीराबाई चानू ने ग्लासगो में 48 किलोग्राम भारवर्ग में गोल्ड मेडल दिया. चानू ने वेटलिफ्टर ने स्नैच और क्लीन एंड जर्क में कुल मिलाकर 190 किलो वजन उठाकर स्वर्ण पदक भारत को दिलाया. उनके नाम 2018, 2022 और अब 2026 गेम्स में भी गोल्ड मेडल दर्ज हो गया है. 2014 के इवेंट में उन्हें सिल्वर मेडल मिला था.
ऋषिकांत सिंह सिल्वर मेडल पर किया कब्जा
इससे पहले मणिपुर के वेटलिफ्टर ऋषिकांत सिंह चनामबम ने पुरुषों के 60 किलोग्राम भारोत्तोलन वर्ग में भारत को सिल्वर मेडल दिलाया. ऋषिकांत ने कुल 264 किग्रा वजन उठाकर रजत पदक अपने नाम किया. उन्होंने स्नैच राउंड में 121 किग्रा का भार उठाया वहीं क्लीन एंड जर्क राउंड में एक ही बार में 143 किग्रा वजन उठा पाए. उन्होंने इसके साथ ही भारत को मेडल दिला दिया.
कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की मेडल टैली
| क्रमांक | एथलीट | इवेंट | खेल | पदक |
|---|---|---|---|---|
| 1 | ऋषिकांत सिंह | मेंस 60 किग्रा | वेटलिफ्टिंग | ???? सिल्वर |
| 2 | झंडू कुमार | मेंस हेवीवेट | पैरा पावरलिफ्टिंग | ???? ब्रॉन्ज |
| 3 | मीराबाई चानू | वूमेंस 48 किग्रा | वेटलिफ्टिंग | ???? गोल्ड |
| 4 | मुथुपांडी राजा | मेंस 65 किग्रा | वेटलिफ्टिंग | ???? सिल्वर |
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