Commonwealth Games 2026 में भारतीय एथलीटों ने बिखेरा जलवा, झंडू कुमार और मुथुपंडी राजा समेत चानू-ऋषिकांत ने जीते मेडल
Commonwealth Games 2026 : कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय एथलीटों का जलवा बरकरार है. अब तक भारतीय एथलीट्स कुल 4 मेडल अपने नाम कर चुके हैं, जिसमें मीराबाई चानू का गोल्ड मेलड भी शामिल हैं. वहीं ऋषिकांत सिंह कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पदक जीतने वाले पहले एबल-बॉडीड में पहले भारतीय बने हैं. भारत के लिए बीती रात मुथुपंडी राजा ने 65 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग इवेंट में रजत पदक जीता. उन्होंने भारत को सिल्वर मेडल दिलाया. वहीं देश के लिए पुरुषों के पैरा पावरलिफ्टिंग इवेंट में भारतीय पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने कांस्य पदक जीता. उन्होंने देश को बॉन्ज मेडल दिलाकर भारत का नाम रोशन किया. तो आइए आज हम भारत के लिए अब तक पदक जीतने वाले सभी एथलीटों के बारे में जानते हैं.
राजा मुथुपंडी ने जीता सिल्वर मेडल
भारतीय वेटलिफ्टर राजा मुथुपंडी ने देश का नाम रोशन किया है. उन्होंने स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पुरुषों के 65 किलोग्राम भार वर्ग में कुल 286 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक (सिल्वर मेडल) अपने नाम किया है. ये भारत का दूसरा सिल्वर मेडल हैं. मुथुपंडी राजा ने स्नैच राउंड में अपने दूसरे प्रयास में 126 किलो वजन उठाकर बढ़त हासिल की थी. इसके बाद क्लीन एंड जर्क राउंड में भी उन्होंने दूसरे प्रयास में 160 किलो वजन उठा लिया. उन्होंने कुल 286 किलो वजन उठाकर भारत के लिए मेडल पक्का कर दिया. उन्हें 2019 में कोहनी की गंभीर चोट लगी थी और 2022 के बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में भी हिस्सा नहीं ले पाए लेकिन अब उन्होंने धमला मचा दिया है.
मुथुपंडी राजा ने भारत को सिल्वर मेडल दिलाने के बाद कहा कि, 'मैं स्वर्ण पदक जीतने के लक्ष्य के साथ उतरा था, लेकिन ट्रेनिंग के दौरान जैसा प्रदर्शन कर रहा था, वैसा नहीं कर सका. इसके बावजूद रजत पदक जीतकर खुश हूं. मैं भारतीय खेल प्राधिकरण (साई), इंडियन वेटलिफ्टिंग फेडरेशन और अपने कोच विजय शर्मा को इस पूरे सफर में मेरा साथ देने और इस मुकाम तक पहुंचने में मेरी मदद करने के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं'.
ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल 2026 में पुरुषों की 65 किग्रा वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में रजत पदक जीतने वाले श्री राजा मुथुपांडी जी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं..????????#Congratulations pic.twitter.com/iOS6HGmnez
— Harshal Shah (@Harshal1781) July 27, 2026
झंडू कुमार ने दिलाया भारत को बॉन्ज मेडल
भारतीय पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल 2026 में पुरुषों के हेवीवेट वर्ग में भारत के लिए कांस्य पदक जीता है. इसके साथ ही उन्होंने पैरा खेलों में भारत के मेडल टैली का खाता भी खोल दिया है. झंडू ने पहली कोशिश में 180 किलो वजन उठाया फिर उन्होंने इसलके बाद 196 किलो जन उठाया. उन्होंने पुरुषों के हेवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग वर्ग में 190 किलोग्राम वजन भारत के लिए बॉन्ज मेडल अपने नाम किया.
भारत को बॉन्ज मेडल दिलाने के बाद झंडू कुमार ने कहा कि, 'आज का दिन मेरे लिए बहुत खास है. मुझे जो प्यार और समर्थन मिला है, उसके लिए मैं सभी का आभारी हूं. यह मेरे लिए बेहद प्रेरणादायक है, भारत के लिए पदक जीतना और देश का तिरंगा ऊंचा लहराते देखना गर्व की बात है. देश के लिए मैंने पहला मेडल जीता. हालांकि, स्वर्ण पदक नहीं जीत पाने का थोड़ा अफसोस है. अगली बार और अधिक मेहनत करके गोल्ड जीतने की कोशिश करूंगा. यह मेडल देश के लिए बहुत जरूरी है. जब से साईं में सेलेक्शन हुआ, तब से हमने अच्छा प्रदर्शन किया. वर्ष 2025 में चीन में देश के लिए ब्रॉन्ज मेडल जीता था. इसके बाद थाईलैंड में जाकर ब्रॉन्ज मेडल देश को दिलाया. इस बार थोड़ी सी तकनीकी कमी रह गई; आगे उसको दूर करने की कोशिश करूंगा'.
???? बिहार के झंडू कुमार ने रचा इतिहास ????????
— KUMAR (@MyCric101) July 25, 2026
नालंदा के झंडू कुमार ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पैरा पावरलिफ्टिंग ब्रॉन्ज जीतकर भारत को पहला मेडल दिलाया।#CommonwealthGames #India #JhanduKumar #Bihar #ParaPowerlifting #BreakingNews pic.twitter.com/9Hf6Nsc7gT
भारत को मीराबाई चानू ने दिलाया गोल्ड
कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को पहला गोल्ड मेडल मीराबाई चानू ने वेटलिफ्टिंग में दिलाया. उन्होंने लगातार चौथी बार कॉमनवेल्थ गेम्स में मेडल जीता है. मीराबाई चानू ने ग्लासगो में 48 किलोग्राम भारवर्ग में गोल्ड मेडल दिया. चानू ने वेटलिफ्टर ने स्नैच और क्लीन एंड जर्क में कुल मिलाकर 190 किलो वजन उठाकर स्वर्ण पदक भारत को दिलाया. उनके नाम 2018, 2022 और अब 2026 गेम्स में भी गोल्ड मेडल दर्ज हो गया है. 2014 के इवेंट में उन्हें सिल्वर मेडल मिला था.
ऋषिकांत सिंह सिल्वर मेडल पर किया कब्जा
इससे पहले मणिपुर के वेटलिफ्टर ऋषिकांत सिंह चनामबम ने पुरुषों के 60 किलोग्राम भारोत्तोलन वर्ग में भारत को सिल्वर मेडल दिलाया. ऋषिकांत ने कुल 264 किग्रा वजन उठाकर रजत पदक अपने नाम किया. उन्होंने स्नैच राउंड में 121 किग्रा का भार उठाया वहीं क्लीन एंड जर्क राउंड में एक ही बार में 143 किग्रा वजन उठा पाए. उन्होंने इसके साथ ही भारत को मेडल दिला दिया.
कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की मेडल टैली
| क्रमांक | एथलीट | इवेंट | खेल | पदक |
|---|---|---|---|---|
| 1 | ऋषिकांत सिंह | मेंस 60 किग्रा | वेटलिफ्टिंग | ???? सिल्वर |
| 2 | झंडू कुमार | मेंस हेवीवेट | पैरा पावरलिफ्टिंग | ???? ब्रॉन्ज |
| 3 | मीराबाई चानू | वूमेंस 48 किग्रा | वेटलिफ्टिंग | ???? गोल्ड |
| 4 | मुथुपांडी राजा | मेंस 65 किग्रा | वेटलिफ्टिंग | ???? सिल्वर |
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एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट केवल 45 दिनों में 2013 के 26 अरब डॉलर के स्तर को कर चुके हैं पार : एसबीआई रिपोर्ट
नई दिल्ली, 27 जुलाई (आईएएनएस)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की विशेष योजना के तहत 30 सितंबर तक भारत में एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट 65-70 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है, जबकि यह कुल 80-85 अरब डॉलर के दायरे में रहने का अनुमान है। यह जानकारी सोमवार को जारी एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट में दी गई।
रिपोर्ट के अनुसार, 17 जुलाई तक 20 अरब डॉलर का पूंजी प्रवाह दर्ज किया गया, जिसमें 17.4 अरब डॉलर के एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट का प्रमुख योगदान रहा।
एसबीआई के समूह मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. सौम्य कांति घोष ने कहा, हमारा अनुमान है कि केवल 45 दिनों में ही एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट 2013 के 26 अरब डॉलर के स्तर को पार कर चुकी है।
आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, 17 जुलाई 2026 तक 17.4 अरब डॉलर के एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट जुटाए जा चुके हैं। रुझान बताते हैं कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (पीएसबी) इस जमा अभियान को आगे बढ़ाने में सबसे बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अगस्त और सितंबर 2026 में मैच्योर होने वाली मौजूदा एफसीएनआर जमाओं का बड़ा हिस्सा नई योजना के तहत अधिक ब्याज दरों के कारण दोबारा जमा (रिन्यू) किया जाएगा, जिससे एफसीएनआर (बी) में आने वाली राशि और बढ़ेगी।
प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, आधारभूत अनुमान के अतिरिक्त करीब 10 अरब डॉलर की अतिरिक्त राशि भी जुटाई जा सकती है। यह राशि मुख्य रूप से उन देशों से आने की संभावना है, जहां कर संबंधी रियायतें उपलब्ध हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा रुझान को देखते हुए यह माना जा सकता है कि 45 दिनों में जुटाई गई कुल राशि 2013 में तीन महीनों के दौरान जुटाई गई कुल राशि से आसानी से अधिक हो चुकी है।
हालांकि, व्यापक वित्तीय बाजार अब भी इस बात को लेकर उलझन में हैं कि इन पूंजी प्रवाहों का विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (एफसीए) की स्थिति से क्या संबंध है और इतनी मजबूत पूंजी आमद के बावजूद रुपए में कमजोरी क्यों बनी हुई है।
रिपोर्ट के अनुसार, बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक इस अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं। वे केवल जमा राशि के आधार पर ही नहीं, बल्कि विभिन्न देशों में फैले भरोसेमंद और उच्च साख वाले ग्राहकों के साथ अपने मजबूत संबंधों का लाभ उठाकर अतिरिक्त पूंजी प्रवाह सुनिश्चित कर रहे हैं। साथ ही, वे ऑनशोर और ऑफशोर रणनीतियों के संतुलित मिश्रण के जरिए अपनी रणनीति को लचीले ढंग से आगे बढ़ा रहे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में तनाव शुरू होने के बाद से विदेशी मुद्रा बाजार में आरबीआई का हस्तक्षेप कुछ हद तक अनियमित रहा है और पूरी क्षमता के साथ नहीं किया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया, रुपए ने 360 डिग्री का बदलाव देखा है। पहले यह बाहरी झटकों को अपने ऊपर लेकर अर्थव्यवस्था की रक्षा करने वाला शॉक एब्जॉर्बर था, लेकिन अब यह भूमिका कमजोर पड़ती दिख रही है। इसलिए जरूरी है कि रुपए को दोबारा उसी स्थिति में न पहुंचने दिया जाए और उसकी अंतर्निहित मजबूती बनाए रखी जाए, ताकि वह प्रतिस्पर्धात्मकता खोए बिना बाहरी झटकों का प्रभावी ढंग से सामना कर सके।
रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक व्यापार और आपूर्ति एवं मूल्य श्रृंखलाओं में बढ़ते तनाव, भू-राजनीतिक जोखिम और असंतुलित पूंजी प्रवाह को देखते हुए यह और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
--आईएएनएस
एबीएस
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