कौन हैं पिया डांडिया? भारतीय मूल की बेटी कैसे पहुंची अमेरिकी कांग्रेस की रेस में, जानिए...
Pia Dandiya: अमेरिका की राजनीति में भारतीय मूल के लोगों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है. इसी कड़ी में फ्लोरिडा से पिया डांडिया का नाम तेजी से चर्चा में आया है. भारतीय मूल की अमेरिकी और पूर्व स्कूल प्रिंसिपल पिया डांडिया ने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से डेमोक्रेटिक पार्टी का प्राइमरी चुनाव जीत लिया है. इस जीत के बाद अब उनकी नजर नवंबर में होने वाले आम चुनाव पर है, जहां उनका मुकाबला रिपब्लिकन उम्मीदवार और पूर्व मरीन सैनिक केसी अस्कर से होगा.
प्राइमरी में पिया डांडिया की शानदार जीत
पिया डांडिया ने डेमोक्रेटिक प्राइमरी में 68.6 प्रतिशत वोट हासिल किए. उन्होंने अपनी प्रतिद्वंद्वी वकील कायसिया अर्ली को स्पष्ट अंतर से पीछे छोड़ दिया, जिन्हें 31.4 प्रतिशत वोट मिले. इस नतीजे ने पिया के अभियान को मजबूती दी है और अब वह नवंबर के चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवार के खिलाफ मैदान में उतरेंगी. अपनी जीत के बाद पिया ने समर्थकों का आभार जताते हुए कहा कि उनका अभियान केवल चुनाव जीतने तक सीमित नहीं था. उनका फोकस छात्रों, परिवारों और फ्लोरिडा के उस युवा वर्ग के भविष्य पर रहा, जिसे बेहतर अवसरों की जरूरत है. उन्होंने अपने संदेश में कहा कि वह अपने छात्रों, अपने बेटे और जिले में बड़े हो रहे बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए चुनाव लड़ रही हैं. साथ ही उन्होंने महंगाई, भ्रष्टाचार और सरकारी व्यवस्था में सुधार को भी अपने अभियान के प्रमुख मुद्दों में शामिल किया है.
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डेमोक्रेटिक पार्टी ने दी बधाई
पिया डांडिया की जीत के बाद डेमोक्रेटिक नेशनल कमेटी ने भी उन्हें बधाई दी. पार्टी ने उनके शिक्षा क्षेत्र के अनुभव और समुदाय के साथ लंबे समय से जुड़े रहने को उनकी बड़ी ताकत बताया. डेमोक्रेटिक पार्टी के मुताबिक, पिया कांग्रेस में पहुंचने के बाद कामकाजी परिवारों के लिए जीवन-यापन की बढ़ती लागत को कम करने, स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने और परिवारों को आर्थिक राहत देने जैसे मुद्दों पर काम करना चाहती हैं.
पहले दूसरे जिले से चुनाव लड़ने की थी तैयारी
पिया डांडिया ने शुरुआत में फ्लोरिडा के 21वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से चुनाव लड़ने की योजना बनाई थी. यहां उनका मुकाबला रिपब्लिकन नेता ब्रायन मास्ट से होने की संभावना थी. हालांकि, बाद में उन्होंने अपनी राजनीतिक रणनीति बदली और साउथ फ्लोरिडा के 22वें जिले से चुनाव लड़ने का फैसला किया. 22वां जिला नए चुनावी परिसीमन के बाद बनाया गया क्षेत्र है. खास बात यह है कि यहां कोई मौजूदा सांसद चुनाव मैदान में नहीं था, जिससे पिया के लिए अपनी राजनीतिक पहचान बनाने का अवसर और मजबूत हुआ.
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कौन हैं पिया डांडिया?
पिया डांडिया पहली पीढ़ी की अमेरिकी हैं और उनका परिवार भारतीय मूल का है. उनका जन्म और पालन-पोषण फ्लोरिडा के पाम बीच काउंटी में हुआ. राजनीति में आने से पहले उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में लंबा काम किया. उन्होंने शिक्षक के रूप में अपने करियर की शुरुआत की और बाद में हाई स्कूल प्रिंसिपल बनीं, पिया ने कम आय वाले परिवारों से आने वाले छात्रों के लिए एक हाई स्कूल की स्थापना भी की. उनका उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा और करियर के अवसर उपलब्ध कराना था, जिनके लिए उच्च शिक्षा तक पहुंच आसान नहीं थी.
उनके स्कूल से पढ़ने वाले छात्रों की उपलब्धियां भी उनके शिक्षा मॉडल की सफलता को दिखाती हैं. अभियान से जुड़ी जानकारी के अनुसार, स्कूल से स्नातक करने वाले सभी छात्रों को कॉलेज में प्रवेश मिला और लगभग 86 प्रतिशत छात्र निम्न आय वाले परिवारों से थे. महज 28 वर्ष की उम्र में स्कूल की संस्थापक प्रिंसिपल बनने के कारण वह अमेरिका की कम उम्र की हाई स्कूल प्रिंसिपलों में भी शामिल रही हैं.
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नवंबर के चुनाव पर टिकी निगाहें
अब पिया डांडिया के सामने असली राजनीतिक परीक्षा नवंबर में होगी. उनका मुकाबला रिपब्लिकन उम्मीदवार केसी अस्कर से है। अगर वह आम चुनाव जीतने में सफल रहती हैं, तो यह सिर्फ उनकी व्यक्तिगत राजनीतिक उपलब्धि नहीं होगी, बल्कि अमेरिकी कांग्रेस में दक्षिण एशियाई समुदाय के प्रतिनिधित्व के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जाएगा. पिया के सामने शिक्षा, परिवारों की आर्थिक स्थिति, स्वास्थ्य सेवाएं और सरकारी जवाबदेही जैसे मुद्दे हैं. अब देखना होगा कि प्राइमरी में मिली बड़ी जीत को वह नवंबर के आम चुनाव में भी समर्थन में बदल पाती हैं या नहीं. फ्लोरिडा की इस सीट का परिणाम आने वाले महीनों में अमेरिकी राजनीति में भारतीय मूल के प्रतिनिधित्व की दिशा के लिए भी खासा महत्वपूर्ण हो सकता है.
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सेबी द्वारा विनियमित संस्थाओं द्वारा एआई का उपयोग करना उनकी स्वयं की जिम्मेदारी है: चेयरमैन तुहिन कांत पांडे
नई दिल्ली, 19 अगस्त (आईएएनएस)। वित्तीय बाजारों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और उन्नत प्रौद्योगिकी के बढ़ते उपयोग के बीच भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने बुधवार को स्पष्ट किया है कि सेबी के विनियमन के दायरे में आने वाली सभी संस्थाएं अपने द्वारा उपयोग किए जाने वाले एआई और मशीन लर्निंग उपकरणों के लिए पूरी तरह जिम्मेदार रहेंगी, चाहे वे इनका विकास स्वयं करें या किसी तीसरे पक्ष से प्राप्त करें।
फिक्की यानी फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एफआईसीसीआई) की तरफ से मुंबई में आयोजित फिक्की कैपाम 2026 के 23वें संस्करण को संबोधित करते हुए पांडे ने कहा, एआई और टेक्नोलॉजी के उपयोग के साथ, सेबी द्वारा विनियमित प्रत्येक संस्था उस एआई या मशीन लर्निंग उपकरण के लिए पूरी तरह जवाबदेह रहेगी जिसका वह उपयोग करती है, चाहे वह आंतरिक रूप से विकसित किया गया हो या बाहरी स्रोत से लिया गया हो।
उन्होंने कहा कि वित्तीय बाजारों में तकनीक का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन निवेशकों के हितों की सुरक्षा और बाजार की विश्वसनीयता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी। इसी उद्देश्य से सेबी ऐसी नियामकीय व्यवस्था विकसित कर रहा है जो नवाचार को प्रोत्साहित करे, लेकिन जवाबदेही और पारदर्शिता से समझौता न करे।
सेबी अध्यक्ष ने बताया कि बाजार अवसंरचना संस्थानों की तकनीकी मजबूती का आकलन करने के लिए एक सूचना प्रौद्योगिकी सुदृढ़ता सूचकांक विकसित करने की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य महत्वपूर्ण प्रणालियों की क्षमता और जोखिम-प्रतिरोधकता को मापने के लिए एक वस्तुनिष्ठ ढांचा तैयार करना है।
उन्होंने कहा, हम बाजार अवसंरचना संस्थानों के लिए एक सूचना प्रौद्योगिकी सुदृढ़ता सूचकांक की संभावना का अध्ययन कर रहे हैं, जिससे महत्वपूर्ण प्रणालियों की मजबूती का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जा सके।
पांडे के अनुसार, भारत के आर्थिक विकास के अगले चरण में टेक्नोलॉजी की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने कहा कि निवेश के अवसरों का विस्तार करने, वित्तपोषण के नए रास्ते बनाने और नियामकीय व्यवस्था को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने के लिए तकनीक का बुद्धिमत्तापूर्ण उपयोग आवश्यक है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि सेबी की नियामकीय रणनीति संतुलित, अनुपातिक और भविष्य उन्मुख नियमों पर आधारित है, ताकि बाजार का विकास भी हो और निवेशकों के हित तथा बाजार की निष्पक्षता भी सुरक्षित रहे।
सेबी अध्यक्ष ने कहा कि भारत में वित्तीय परिसंपत्तियों में निवेश की संस्कृति को और व्यापक तथा गहरा बनाने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि म्यूचुअल फंड और सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) ने बड़ी संख्या में घरेलू परिवारों को बाजार आधारित निवेश से जोड़ा है और इससे भारतीय पूंजी बाजार की मजबूती बढ़ी है। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि अभी भी पूंजी बाजार में निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने की काफी संभावनाएं मौजूद हैं।
पांडे ने कहा, भारत के पूंजी बाजारों में बड़ा परिवर्तन आया है। अब वे केवल आर्थिक गतिविधियों का प्रतिबिंब नहीं हैं, बल्कि स्वयं आर्थिक वृद्धि के महत्वपूर्ण चालक बन चुके हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि तेजी से बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था निवेश के नए अवसर पैदा करेगी। ऐसे में जरूरत इस बात की है कि पूंजी बाजार अधिक गहरे, नवोन्मेषी और व्यापक बनें, जबकि उनकी निष्पक्षता, सुरक्षा और विश्वसनीयता भी बनी रहे।
उन्होंने कहा, मुख्य प्रश्न यह है कि हम ऐसे बाजार कैसे विकसित करें जो अधिक गहरे और अधिक नवोन्मेषी हों, लेकिन साथ ही अधिक निष्पक्ष, सुरक्षित और भरोसेमंद भी बने रहें।
--आईएएनएस
डीबीपी
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