आज यानी की 19 अगस्त को इंजीनियर, सामाजिक कार्यकर्ता और लेखक सुधा मूर्ति अपना 76वां जन्मदिन मना रही हैं। वह दुनिया की सर्वश्रेष्ठ सॉफ्टवेयर कंपनियों में से एक इंफोसिस के चेयरमैन नारायण मूर्ति की पत्नी हैं। भारत सरकार की ओर से सुधा मूर्ति के काम को ध्यान में रखते हुए उनको पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। तो आइए जानते हैं उनके जन्मदिन के मौके पर सुधा मूर्ति के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...
जन्म और परिवार
कर्नाटक के शिग्गौन में 19 अगस्त 1950 को सुधा मूर्ति का जन्म हुआ था। इनके पिता सर्जन थे और मां स्कूल टीचर थीं। ऐसे में सुधा का पालन-पोषण उनके नाना-नानी ने किया था। वह बचपन से ही पढ़ाई में तेज थीं। उन्होंने बीई इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इसके बाद इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस से कंप्यूटर साइंस में एम ई की परीक्षा पास की।
बता दें कि सुधा के कॉलेज में 600 स्टूडेंट्स पढ़ते थे। जिनमें 599 लड़के थे और सुधा एक अकेली लड़की थीं। उन्होंने कर्नाटक के सभी स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा शुरू कराने की सराहनीय पहल की थी।
सुधा ने लड़ी हक की लड़ाई
भारत की सबसे बड़ी ऑटो निर्माता कंपनी टाटा इंजीनियरिंग एंड लोकोमोटिव कंपनी में सुधा मूर्ति काम करने वाली पहली महिला इंजीनियर थीं। वह इस कंपनी में डेवलपमेंट इंजीनियर के रूप में शामिल हुई थीं। लेकिन यह नौकरी पाना उनके लिए इतना भी आसान नहीं था। दरअसल, जब सुधा मूर्ति टेल्को में डेवलपमेंट इंजीनियरिंग के पद पर आवेदन कर रही थीं, तो उन्होंने पाया कि इस पोस्ट के लिए महिला कैंडिडेट आवेदन नहीं कर सकती है।
तब उन्होंने जे आर डी टाटा के सामने इस मुद्दे को उठाया और वह कंपनी में नौकरी पाने वाली भारत की पहली महिला इंजीनियर बनीं। इसके बाद उन्होंने वालचंद ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज में सीनियर सिस्टम एनालिस्ट के पद पर ज्वाइन किया। इसके अलावा उन्होंने फिल्मों में भी काम किया। उनको सामाजिक कार्यों और साहित्य में योगदान के लिए भी जाना जाता है।
Infoys की शुरूआत
साल 1981 में सुधा मूर्ति के पति नारायण नौकरी छोड़कर खुद का बिजनेस शुरू करना चाहते थे। लेकिन सुधा इसके पक्ष में नहीं थीं, लेकिन उन्होंने नारायण को नहीं रोका। सुधा ने अपने पति को 10 हजार रुपए उधार दिए। इन्हीं पैसों से नारायण मूर्ति ने अपने 6 दोस्तों के साथ मिलकर इंफोसिस की नींव रखी गई।
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