सिरोंज मंडी में 580 बोरी सरकारी गेहूं जब्त, ट्रक बदलते समय पकड़ा गया स्टॉक
विदिशा के सिरोंज कृषि मंडी में उस समय हड़कंप मच गया, जब प्रशासन ने एक ट्रक से दूसरे ट्रक में पलटी जा रही करीब 580 बोरी गेहूं जब्त कर ली। कार्रवाई उमेश ट्रेडिंग कंपनी के यहां की गई।
मौके पर मौजूद गेहूं को जब्त करने के साथ संबंधित ट्रक को भी प्रशासन ने अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद गेहूं और वाहन को एसडीएम कार्यालय लाया गया, जहां अब इसके दस्तावेज और स्टॉक रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
सिरोंज कृषि मंडी में ऐसे पकड़ा गया 580 बोरी गेहूं
सिरोंज कृषि मंडी में प्रशासन को गेहूं के संदिग्ध परिवहन की जानकारी मिली थी। इसके बाद एसडीएम के नेतृत्व में कार्रवाई की गई। टीम उमेश ट्रेडिंग कंपनी के यहां पहुंची तो वहां एक ट्रक से दूसरे ट्रक में गेहूं की बोरियां पलटी जा रही थीं। मौके पर बड़ी मात्रा में गेहूं देखकर अधिकारियों ने इसकी जांच शुरू की। गिनती और शुरुआती जांच के बाद करीब 580 बोरी गेहूं जब्त किया गया।
सरकारी गेहूं की पैकिंग और टैगिंग मिलने से बढ़े सवाल
नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारी ने जब्त गेहूं की शुरुआती जांच की। इसमें बोरियों की पैकिंग और टैगिंग सरकारी होने की बात सामने आई है। अगर आगे की जांच में भी यह पुष्टि हो जाती है कि 580 बोरी गेहूं सरकारी स्टॉक का ही हिस्सा है, तो प्रशासन को इसके पूरे रिकॉर्ड की पड़ताल करनी होगी।
सरकारी स्टॉक का हिसाब आमतौर पर रिकॉर्ड में दर्ज रहता है। इसलिए जांच में यह देखा जाएगा कि भगवानपुर सोसायटी के पास वर्ष 2022-23 में कितना गेहूं आया था और उसमें से कितना गेहूं रिकॉर्ड के अनुसार जारी या परिवहन किया गया।
शमशाबाद की भगवानपुर सोसायटी के स्टॉक से जुड़ा बताया जा रहा गेहूं
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक जब्त गेहूं शमशाबाद की भगवानपुर सोसायटी के वर्ष 2022-23 के सरकारी स्टॉक का बताया जा रहा है। ऐसे में प्रशासन के सामने कई सवाल हैं। अगर यह गेहूं वास्तव में भगवानपुर सोसायटी का सरकारी स्टॉक है, तो वह सिरोंज की कृषि मंडी में निजी ट्रेडिंग कंपनी तक कैसे पहुंचा?
क्या इसे किसी अनुमति के तहत यहां लाया गया था? क्या इसके लिए परिवहन के जरूरी कागजात मौजूद थे? या फिर गेहूं को बिना उचित दस्तावेज के कहीं और ले जाया जा रहा था? इन सवालों के जवाब संबंधित रिकॉर्ड की जांच के बाद ही मिलेंगे।
ट्रक चालक वसीम से पूछताछ
कार्रवाई के दौरान ट्रक चालक वसीम से भी पूछताछ की गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार चालक ने पूछताछ में गेहूं को शमशाबाद के व्यापारी मनु माहेश्वरी का बताया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक मनु माहेश्वरी शमशाबाद नगर परिषद अध्यक्ष प्रदीप माहेश्वरी के पुत्र हैं।
हालांकि किसी व्यक्ति का नाम पूछताछ में सामने आना अपने आप में आरोप साबित नहीं करता। इस मामले में संबंधित पक्ष का जवाब और दस्तावेज सामने आना बाकी है। प्रशासन अब यह जांच करेगा कि व्यापारी का जब्त गेहूं से क्या संबंध था और उसके पास सरकारी स्टॉक से जुड़े कोई वैध दस्तावेज थे या नहीं।
करीब 7 लाख रुपये का है जब्त गेहूं
प्रशासन के अनुसार जब्त किए गए 580 बोरी गेहूं की अनुमानित कीमत करीब 7 लाख रुपये बताई जा रही है। इतनी बड़ी मात्रा में गेहूं मिलने के बाद प्रशासन ने इसे अपने कब्जे में लेकर रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी है। गेहूं की सही मात्रा, कीमत और स्टॉक की स्थिति भी जांच के दौरान स्पष्ट की जाएगी।
मामले में गेहूं के अलावा ट्रक से जुड़े दस्तावेज भी देखे जा रहे हैं। वाहन किसके नाम पर है और उसे किसने भेजा था, इसकी जानकारी भी जांच में महत्वपूर्ण होगी। अगर दस्तावेजों में कोई गड़बड़ी मिलती है तो उसके आधार पर आगे कार्रवाई की जा सकती है।
एक ट्रक से दूसरे ट्रक में क्यों पलटा जा रहा था गेहूं?
इस पूरे मामले में सबसे अहम सवालों में से एक यह है कि गेहूं को एक ट्रक से दूसरे ट्रक में क्यों पलटा जा रहा था। किसी भी माल को एक वाहन से दूसरे वाहन में बदलने के पीछे सामान्य कारोबारी कारण भी हो सकते हैं। लेकिन अगर माल सरकारी स्टॉक का है, तो उसके ट्रांसफर के लिए नियम और दस्तावेज महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
इसी वजह से प्रशासन यह जानने की कोशिश कर रहा है कि गेहूं को पलटने की प्रक्रिया किस उद्देश्य से की जा रही थी। अगर इसके लिए जरूरी अनुमति या दस्तावेज मौजूद थे तो मामला अलग हो सकता है। वहीं अगर कोई रिकॉर्ड नहीं मिला तो प्रशासन को आगे की कार्रवाई करनी पड़ सकती है।
गेहूं के स्टॉक रिकॉर्ड से खुलेगा पूरा राज
सिरोंज मंडी में हुई कार्रवाई के बाद अब जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा स्टॉक रिकॉर्ड है। प्रशासन यह पता करेगा कि भगवानपुर सोसायटी के सरकारी रिकॉर्ड में वर्ष 2022-23 का कितना गेहूं दर्ज है। इसके बाद यह देखा जाएगा कि उस स्टॉक में से कितना गेहूं कब और किसके नाम पर जारी किया गया।
अगर रिकॉर्ड में 580 बोरी गेहूं की जानकारी मिलती है तो उसके परिवहन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जाएगी। वहीं अगर रिकॉर्ड में इतनी मात्रा का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता है तो मामला और गंभीर हो सकता है। इसके साथ ही बोरियों पर लगे टैग, पैकिंग और अन्य पहचान संबंधी जानकारी का भी रिकॉर्ड से मिलान किया जाएगा।
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