Responsive Scrollable Menu

रिलेशनशिप एडवाइज– पति साइलेंट ट्रीटमेंट देते हैं:झगड़ा हो तो बात नहीं करते, जब तक मैं माफी न मांगूं, क्या ये इमोशनल एब्यूज है?

सवाल- मेरी शादी को चार साल हो चुके हैं। हमारे बीच जब भी किसी बात पर लड़ाई होती है, पति कई दिनों तक मुझसे बात नहीं करते। न फोन उठाते हैं, न मैसेज का जवाब देते हैं। घर में भी सिर्फ काम भर की बातें करते हैं। अगर मैं बातचीत शुरू करने की कोशिश करूं तो इग्नोर कर देते हैं। इस दौरान मैं बहुत बेचैन रहती हूं। उनकी चुप्पी खत्म करने के लिए आखिर में माफी मांग लेती हूं, जबकि गलती पूरी तरह मेरी नहीं होती। क्या हर झगड़े के बाद इस तरह चुप्पी साध लेना इमोशनल एब्यूज है? ऐसे में मुझे क्या करना चाहिए? एक्सपर्ट-डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। हर शादी में मतभेद होते हैं। दो लोग साथ रहते हैं तो उनकी सोच, आदतें और उम्मीदें अलग होना स्वाभाविक है। इसलिए बहस होना किसी रिश्ते के खराब या कमजोर होने की निशानी नहीं है। असल बात यह है कि बहस के बाद क्या होता है। कुछ दंपती नाराज होते हैं, लेकिन थोड़ी देर बाद बैठकर बात कर लेते हैं। कुछ लोग गुस्सा शांत करने के लिए कुछ घंटे अकेले रहना पसंद करते हैं। यह भी सामान्य है। लेकिन अगर हर विवाद के बाद एक व्यक्ति- तो यह सिर्फ नाराजगी नहीं रह जाती। यहीं से रिश्ते में संवाद की जगह साइलेंट ट्रीटमेंट लेने लगता है। साइलेंट ट्रीटमेंट सिर्फ चुप्पी नहीं साइलेंट ट्रीटमेंट का मतलब केवल चुप रहना नहीं है। यह ऐसी चुप्पी है, जिसमें सामने वाले को यह महसूस कराया जाता है कि जब तक वह आपकी शर्त नहीं मानेगा, तब तक उसे भावनात्मक दूरी झेलनी पड़ेगी। साइलेंट ट्रीटमेंट का इमोशनल इफेक्ट कई लोग पूछते हैं कि अगर कोई कुछ बोल ही नहीं रहा, तो उसे गलत कैसे माना जाए? दरअसल, रिश्ते सिर्फ शब्दों से नहीं चलते। चुप्पी भी एक भाषा होती है। अगर कोई व्यक्ति यह कहे कि "मैं अभी बहुत गुस्से में हूं। मुझे कुछ घंटे चाहिए, फिर बात करेंगे।" तो यह रिश्ते को संभालने की कोशिश है। लेकिन अगर वह बिना कुछ बताए कई दिनों तक संपर्क ही खत्म कर दे, तो यह दूसरे व्यक्ति के भीतर असुरक्षा पैदा करता है। वह समझ नहीं पाता कि रिश्ता ठीक है या टूटने की कगार पर है। यही अनिश्चितता सबसे ज्यादा तकलीफ देती है। धीरे-धीरे व्यक्ति की पूरी ऊर्जा इस बात में लगने लगती है कि किसी तरह सामने वाला फिर से बात करने लगे। यहीं से शक्ति का संतुलन बदलने लगता है। साइलेंट ट्रीटमेंट क्यों खतरनाक अगर चुप्पी का इस्तेमाल पार्टनर को अपराधबोध कराने, सजा देने या अपनी बात मनवाने के लिए किया जाए, तो यह स्वस्थ संवाद नहीं है। यह भावनात्मक नियंत्रण का तरीका बन सकता है। यहीं पर आपके सवाल का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा आता है। आपने लिखा है कि "आखिर में मैं ही माफी मांग लेती हूं, जबकि गलती पूरी तरह मेरी नहीं होती।" यही इस पूरे रिश्ते का सबसे बड़ा संकेत है। शादीशुदा जिंदगी के रेड फ्लैग अगर शादी में हर विवाद का अंत इस तरह हो कि एक व्यक्ति सिर्फ इसलिए माफी मांग ले, ताकि दूसरा फिर से बात करने लगे, तो समस्या केवल झगड़े की नहीं रह जाती। यह रिश्ते का एक पैटर्न बन जाता है। मनोविज्ञान में इसे कोर्सिव कंट्रोल या इमोशनल मैनिपुलेशन कहते हैं। इसका उद्देश्य हमेशा सामने वाले को चोट पहुंचाना नहीं होता, लेकिन परिणाम यही होता है कि एक व्यक्ति धीरे-धीरे अपनी जरूरतों, भावनाओं और असहमति को दबाने लगता है। इसका मतलब यह नहीं कि हर साइलेंट ट्रीटमेंट इमोशनल एब्यूज है। लेकिन अगर यह व्यवहार हर विवाद के बाद, बार-बार और आपको झुकाने के लिए दोहराया जा रहा है, तो इसे सामान्य कहकर नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता। बदलाव की शुरुआत कैसे हो? अब सवाल यह है कि अगर आपके रिश्ते में ऐसा हो रहा है तो क्या किया जाए? सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि हर बार किसी भी तरह झगड़ा खत्म कर देना समाधान नहीं है। अगर हर विवाद का अंत सिर्फ इसलिए हो रहा है कि आप माफी मांग लें और सामने वाला फिर से बात करने लगे, तो असली समस्या वहीं की वहीं रह जाती है। अगली बहस में वही पैटर्न दोबारा दोहराया जाएगा। इसलिए कोशिश केवल बातचीत शुरू कराने की नहीं, बल्कि बातचीत का तरीका बदलने की होनी चाहिए। जब माहौल सामान्य हो, तब अपने पति से इस विषय पर बात करें। बातचीत की शुरुआत आरोप से नहीं, अपनी भावना से करें। उदाहरण के लिए, “जब कई दिनों तक बात बंद रहती है तो मुझे बहुत बेचैनी और असुरक्षा महसूस होती है। मैं चाहती हूं कि हम नाराज हों, लेकिन बातचीत बंद न करें।” ऐसी भाषा सामने वाले को कटघरे में खड़ा नहीं करती, बल्कि उसे आपकी भावनाएं समझने का मौका देती है। एक और बात का ध्यान रखें। अगर आपने कोई गलती की है तो माफी मांगने में कोई बुराई नहीं है। लेकिन सिर्फ चुप्पी खत्म कराने के लिए हर बार माफी मांगना धीरे-धीरे इस व्यवहार को मजबूत कर सकता है। सामने वाले को यह संदेश मिलने लगता है कि बिना कुछ कहे भी वह आपको झुका सकता है। स्वस्थ रिश्ते मतभेद को कैसे हैंडल करते हैं? ऐसा नहीं है कि स्वस्थ रिश्तों में मतभेद नहीं होते। होते हैं, लेकिन उन्हें संभालने के तरीके अलग होते हैं। उदाहरण के लिए– दो समझदार वयस्क आपसे में ऐसे नियम बना सकते हैं। ये छोटे-छोटे नियम रिश्ते में भरोसा और भावनात्मक सुरक्षा बढ़ाते हैं। प्रोफेशनल मदद कब जरूरी? अगर आपने कई बार इस बारे में बात की है, लेकिन हर विवाद के बाद वही व्यवहार दोहराया जाता है, तो इसे सामान्य मानकर टालना ठीक नहीं होगा। ऐसी स्थिति में कपल काउंसलिंग एक अच्छा विकल्प हो सकती है। अगर आपका पार्टनर इसके लिए तैयार न हो, तब भी आप अकेले किसी मनोवैज्ञानिक से मिल सकती हैं। इससे आपको अपनी भावनाओं को बेहतर ढंग से समझने और रिश्ते में स्वस्थ सीमाएं तय करने में मदद मिलेगी। अंतिम बात आपने अपने सवाल में लिखा है कि "इस दौरान मैं बहुत बेचैन रहती हूं।" यही इस पूरी स्थिति का सबसे अहम संकेत है। किसी भी रिश्ते का उद्देश्य आपको लगातार असुरक्षा, अपराधबोध या डर में रखना नहीं होना चाहिए। याद रखिए, एक स्वस्थ शादी में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन संवाद बंद नहीं होता। नाराजगी हो सकती है, लेकिन सम्मान बना रहता है। और सबसे महत्वपूर्ण बात, रिश्ता बचाने की जिम्मेदारी दोनों की होती है। अगर हर बार सिर्फ एक ही व्यक्ति झुकता रहे, माफी मांगता रहे और रिश्ता संभालता रहे, तो यह साझेदारी नहीं, बल्कि पावर का असंतुलन है। ऐसे पैटर्न को समय रहते पहचानना और उस पर खुलकर बात करना ही रिश्ते को बेहतर बना सकता है। ………………………… ये खबर भी पढ़ें… रिलेशनशिप एडवाइज- डेटिंग एप पर हसबैंड ढूंढ रही हूं:लेकिन यहां फ्रॉड हैं, अपने बारे में झूठ बताते हैं, सही आदमी को कैसे पहचानूं ऑनलाइन डेटिंग अब शादी के लिए पार्टनर खोजने का एक सामान्य तरीका बन चुकी है। कई बार यहां लोगों को अच्छे रिश्ते मिलते भी हैं। लेकिन फर्जी प्रोफाइल, गलत जानकारी, कैटफिशिंग और आर्थिक ठगी के मामले भी लगातार सामने आते हैं। पूरी खबर पढ़ें…

Continue reading on the app

जरूरत की खबर- चीनियों की सेहत का राज ‘ताई-ची’:योग, मेडिटेशन और मार्शल आर्ट भी, जानें इसके 10 हेल्थ बेनिफिट्स, करने का सही तरीका

एक्सरसाइज शब्द सुनते ही आपके दिमाग में क्या ख्याल आता है? दौड़ना, जिम में पसीना बहाना या तेज वर्कआउट? हर एक्सरसाइज में पसीना बहाना, तेज दौड़ना या भारी वजन उठाना जरूरी नहीं है। कुछ एक्सरसाइज ऐसी भी होती हैं, जिनमें शरीर का हर मूवमेंट धीमा और नियंत्रित होता है, ध्यान सांसों पर रहता है और दिमाग भी शांत होता है। ताई-ची (Tai Chi) ऐसी ही एक्सरसाइज है, जो चीन के पारंपरिक मार्शल आर्ट से विकसित हुई है। इसे ‘मेडिटेशन इन मोशन’ भी कहा जाता है। साल 2024, में ‘फ्रंटियर इन मेडिसिन’ जर्नल में एक मेटा-एनालिसिस पब्लिश हुई, जिसमें 22 स्टडीज को एनालाइज किया गया। इसके मुताबिक, रेगुलर ताई-ची करने से बॉडी बैलेंस और शारीरिक कार्यक्षमता बेहतर होती है। इससे बुजुर्गों में गिरने का रिस्क भी कम होता है। इसलिए ‘जरूरत की खबर’ में आज हम ताई-ची एक्सरसाइज के हेल्थ बेनिफिट्स पर बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- सुमित दुबे, फिटनेस कोच, वेटलॉस एक्सपर्ट, फाउंडर– SDF, दिल्ली सवाल- ताई-ची क्या है? जवाब- ताई-ची चीन की एक पारंपरिक एक्सरसाइज और मार्शल आर्ट है। इसमें शरीर को धीमी, नियंत्रित और लयबद्ध गति से मूव किया जाता है। साथ ही गहरी सांस लेने और मन को एकाग्र रखने पर जोर दिया जाता है। यही वजह है कि इसे फिजिकल और मेंटल हेल्थ, दोनों के लिए फायदेमंद माना जाता है। सवाल- ताई-ची और योग में क्या अंतर है? जवाब- ताई-ची और योग दोनों शरीर और मन के तालमेल पर काम करते हैं, लेकिन इनके अभ्यास का तरीका अलग है। दोनों का फर्क ग्राफिक में देखिए- सवाल- ताई-ची के हेल्थ बेनिफिट्स क्या हैं? जवाब- यह एक लो-इम्पैक्ट एक्सरसाइज है, जो फिजिकल और मेंटल हेल्थ दोनों के लिए फायदेमंद है। ताई-ची के सभी फायदे ग्राफिक में देखिए- सवाल- ताई-ची करने का सही तरीका क्या है? जवाब- शुरुआत में आसान मूवमेंट्स सीखें और सही तकनीक पर ध्यान दें। शुरुआती दिनों में किसी ट्रेनर की मदद लेना बेहतर है। ट्रेनर आपको सही टेकनीक सिखा सकता है। इससे गलत पोस्चर जैसी तकनीकी गलतियों से बचेंगे। ताई-ची का सही तरीका ग्राफिक में देखिए- सवाल- ताई-ची किन लोगों के लिए ज्यादा फायदेमंद है? जवाब- इसे हर उम्र के लोग कर सकते हैं। लेकिन कुछ लोगों के लिए यह ज्यादा फायदेमंद है, जैसेकि- सवाल- ताई-ची करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? जवाब- ताई-ची सुरक्षित एक्सरसाइज है, लेकिन इसे सही तकनीक और अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही करना चाहिए। सभी सावधानियां ग्राफिक में देखिए- ताई-ची एक्सरसाइज से जुड़े कॉमन सवाल-जवाब सवाल- ताई-ची हार्ट हेल्थ को कैसे सपोर्ट करती है? जवाब- ताई-ची में मूवमेंट्स कंट्रोल्ड होते हैं और गहरी सांस लेनी होती है। इससे ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। ब्लड प्रेशर कंट्रोल रखने में भी मदद मिलती है। ताई-ची से स्ट्रेस कम होता है, जो हार्ट हेल्थ के लिए बहुत जरूरी है। सवाल- ताई-ची जॉइंट्स और मसल्स हेल्थ को कैसे सपोर्ट करती है? जवाब- ताई-ची से जोड़ों का मूवमेंट बेहतर होता है और उन पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ता। नियमित अभ्यास से मांसपेशियां मजबूत होती हैं, शरीर का संतुलन बेहतर होता है और फ्लैक्सिबिलिटी बढ़ती है। सवाल- क्या ताई-ची से वजन कम करने में मदद मिलती है? जवाब- हां, ताई-ची कैलोरी बर्न करने में मदद करती है। लेकिन यह लो-इम्पैक्ट एक्सरसाइज है। इसलिए सिर्फ ताई-ची पर निर्भर रहना सही नहीं है। इसके साथ बैलेंस्ड डाइट और रेगुलर अन्य फिजिकल एक्टिविटी भी जरूरी है। सवाल- क्या ताई-ची शुरू करने के लिए किसी ट्रेनर की जरूरत होती है? जवाब- शुरुआत में ट्रेनर की मदद लेना बेहतर है। इससे सही पोस्चर, मूवमेंट और सांस लेने की तकनीक पता चलती है, जिससे चोट का जोखिम कम होता है। बुनियादी तकनीक सीखने के बाद अभ्यास आसान होता है। सवाल- ताई-ची कितनी देर करनी चाहिए? जवाब- शुरुआत 15-20 मिनट से करनी चाहिए। धीरे-धीरे इसे 30-60 मिनट तक बढ़ा सकते हैं। बेहतर परिणाम के लिए सप्ताह में कम-से-कम 3-5 दिन नियमित अभ्यास करना फायदेमंद है। सवाल- ताई-ची करने का सही समय क्या है? जवाब- इसका कोई एक तय समय नहीं है। इसे सुबह या शाम, अपनी सुविधा के अनुसार कर सकते हैं। लेकिन सुबह का समय सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि उस समय शरीर और मन, दोनों तरोताजा रहते हैं। ध्यान रखें, खाना खाने के तुरंत बाद ताई-ची न करें। सवाल- किन संकेतों पर एक्सरसाइज तुरंत रोक देनी चाहिए? जवाब- अगर ताई-ची करते समय काेई असहजता हो तो तुरंत अभ्यास रोक दें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से संपर्क करें, जैसेकि- सवाल- ताई-ची किन्हें नहीं करनी चाहिए? जवाब- कुछ लोगों को ताई-ची से परेशानी हो सकती है। इसलिए इन्हें ये एक्सरसाइज नहीं करनी चाहिए, जैसेकि- …………………….. जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- क्या कोलेस्ट्रॉल सचमुच हमारा दुश्मन है?: डॉक्टर से समझें गुड-बैड कोलेस्ट्रॉल का साइंस, ये कब जरूरी और कब खतरनाक कोलेस्ट्रॉल का नाम सुनते ही अक्सर दिमाग में एक ही बात आती है, यह शरीर के लिए नुकसानदायक है। लेकिन कहानी इतनी सीधी भी नहीं है। कोलेस्ट्रॉल हमारी कोशिकाओं, हार्मोन और विटामिन D के निर्माण के लिए जरूरी है। परेशानी तब शुरू होती है, जब शरीर में इसका संतुलन बिगड़ जाता है और खासतौर पर LDL यानी बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ने लगता है। पूरी खबर पढ़िए…

Continue reading on the app

  Sports

Shaheen Afridi की हैट्रिक का VIDEO, वनडे में पहली बार झटके 7 विकेट, टीम को बनाया चैंपियन

Shaheen Afridi 7 wicket: नेशनल चैंपियंस कप के फाइनल में शाहीन शाह अफरीदी ने एक के बाद एक 7 विकेट अपने नाम किए और ऐसा करते हुए अपने वनडे करियर का बेस्ट प्रदर्शन किया. Wed, 19 Aug 2026 07:19:21 +0530

  Videos
See all

Bel Patra Ke Upay: क्या है बेलपत्र ? जानें इसकी महिमा? | Shailendra Pandey | Bhagya Chakra #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-19T02:36:01+00:00

PAK Ex PM Imran Khan: इमरान पर Supreme Court के फैसले से Asim Munir- Shehbaz Sharif क्यों बैचेन? #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-19T02:38:31+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers