NGT ने PPCB को जालंधर नगर निगम से 8.4 करोड़ जुर्माना वसूली में ढिलाई पर फटकारा
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) को कचरा प्रबंधन नियमों का उल्लंघन करने के लिए जालंधर नगर निगम से 8.4 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूलने में लापरवाही बरतने को लेकर फटकार लगाई है। अधिकरण जालंधर जिले के वारियाना गांव में कचरा निपटान स्थल पर अवैज्ञानिक तरीके से कचरा फेंकने और वहां जमा हुए पुराने कचरे के ढेर से जुड़े मामले की सुनवाई कर रहा था। एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ने 12 अगस्त को दिये गये फैसले में कहा कि पीपीसीबी ने एक रिपोर्ट दाखिल की है, जिसमें कहा गया है कि ठोस कचरा प्रबंधन नियमों का पालन न करने के लिए जालंधर नगर निगम पर 9.3 करोड़ रुपये का पर्यावरण मुआवजा लगाया गया है।
इस आदेश की प्रति मंगलवार को उपलब्ध कराई गई। आदेश में कहा गया है कि कुल जुर्माने की रकम में से, स्थानीय प्रशासन ने पंजाब निगम अवसंरचना विकास कंपनी के ज़रिये सिर्फ़ 90 लाख रुपये जमा किए हैं। अधिकरण ने कहा, ‘‘आठ करोड़ 40 लाख रुपये की वसूली अब भी बाकी है, लेकिन प्रतिवादी संख्या-पांच (पीपीसीबी) के जवाब से इस रकम को वसूलने की किसी गंभीर कोशिश का पता नहीं चलता है।’’ अधिकरण ने बोर्ड के वकील की इस बात का संज्ञान लिया कि दो हफ़्ते के अंदर उपायुक्त को एक सूचना भेजी जाएगी, ताकि बचा हुआ जुर्माना ज़मीन के लगान की बकाया राशि के तौर पर वसूला जा सके।
एनजीटी ने बोर्ड को यह भी निर्देश दिया कि वह संबंधित स्थल पर मौजूद पुराने कचरे की मात्रा का पता लगाने के लिए मौके पर जांच करे। इस मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को तय की गयी है।
CM Mohan Charan Majhi ने Odisha flood राहत के लिए 1000 करोड़ रुपये के सहायता पैकेज की घोषणा की
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने बाढ़ से प्रभावित इलाकों के लिए मंगलवार को 1,000 करोड़ रुपये के राहत पैकेज तथा स्थिति सुधरने तक जलमग्न क्षेत्रों से बाहर निकाले गये लोगों के लिए मुफ्त रसोईघर चलाने की घोषणा की। राज्य में एक माह के भीतर दो बार बाढ़ आई है। मुख्यमंत्री ने इसका कारण ‘जून से अब तक हुई 1,100 मिमी बारिश’ को बताया, जबकि अल नीनो मौसम पैटर्न के कारण कम बारिश का अनुमान लगाया गया था।
माझी ने कहा, ‘‘ओडिशा में पिछले 25 वर्षों में बारिश की यह मात्रा सबसे अधिक है।’’ उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्थिति से सफलतापूर्वक निपट रही है। माझी ने प्रेसवार्ता में कहा, ‘‘भारत मौसम विज्ञान विभाग की अल नीनो चेतावनी के आधार पर, हम सभी को राज्य में कम बारिश की उम्मीद थी। इसलिए, जलाशयों में पानी जमा करके रखने का निर्देश दिया गया था, ताकि मॉनसून के दौरान कम बारिश होने पर पानी की कमी न हो।’’ उन्होंने कहा कि लेकिन मॉनसून की शुरुआत के बाद से राज्य में लगभग 1100 मिमी बारिश हुई है जो राज्य में सामान्य से 34 प्रतिशत ज़्यादा वर्षा है।
उन्होंने बालासोर, भद्रक, जाजपुर, मयूरभंज, क्योंझर और केंद्रपाड़ा जिलों में बाढ़ की वर्तमान स्थिति की समीक्षा भी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में बाढ़ के दूसरे दौर से छह जिलों में अब तक लगभग 9.40 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार की प्राथमिकता है कि ऐसे में भी कोई हताहत न हो।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हालांकि बाढ़ प्रभावित इलाकों में करीब 100 लोगों को सांप ने काटा, लेकिन एंटी-वेनम इंजेक्शन आसानी से उपलब्ध होने के कारण वे सभी बच गए।’’ जहां बाढ़ के पहले दौर में कम से कम छह लोगों की मौत हुई थी, वहीं सरकार ने इस बार मरने वालों की संख्या की पुष्टि नहीं की थी। माझी ने कहा, ‘‘शुरुआती अनुमान के आधार पर 1,000 करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की गई है। बाढ़ प्रभावित जिलों से नुकसान का विस्तृत आकलन मिलने के बाद जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध करायी जाएगी।’’ मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पैकेज में फसल के नुकसान को लेकर किसानों को खेती से जुड़ी सब्सिडी, बीज की आपूर्ति, ‘लिफ्ट’ सिंचाई परियोजनाओं की मरम्मत और अपनी आजीविका गंवाने वालों को मदद देना शामिल है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारी बारिश के कारण राज्य में बाढ़ का यह दूसरा दौर आया है।
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