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First Independence Day Story: दिल्ली की सड़कों पर 10 लाख से अधिक लोग; जानिए कैसी थी 15 अगस्त 1947 की वह पहली सुबह

​आज की पीढ़ी जिस खुली हवा में सांस ले रही है, अपने अधिकारों का उपयोग कर रही है और अपनी मर्जी से जीवन जीने के लिए स्वतंत्र है, यह व्यवस्था 80 साल पहले इतनी सहज नहीं थी। उस दौर में अंग्रेजों के हंटर और बूटों तले भारतीयों के स्वाभिमान को कुचला जाता था।

15 अगस्त 1947 की सुबह सदियों के संघर्ष, अनगिनत बलिदानों और स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों का साकार रूप बनकर आई थी। उस पहली सुबह को जीने वाली पीढ़ी के लिए यह केवल सत्ता का हस्तांतरण नहीं, बल्कि आत्मसम्मान का पुनर्जन्म था।

​14-15 अगस्त की मध्यरात्रि और धारा सभा के बाहर ऐतिहासिक सैलाब 
14 अगस्त की रात ठीक 12 बजे जैसे ही 15 अगस्त की तारीख ने जन्म लिया, पूरे देश में स्वतंत्रता का नया युग शुरू हो गया। प्रसिद्ध लेखक राजेंद्र लाल हांडा ने अपनी चर्चित पुस्तक 'दिल्ली में 10 वर्ष' में उस रात का आंखों देखा हाल बयां किया है। वे लिखते हैं कि रात करीब दो बजे स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू धारा सभा से निकलकर गवर्नर जनरल को आमंत्रित करने के लिए वायसराय भवन की ओर रवाना हुए थे।

उस समय धारा सभा के बाहर, हरी घासों पर, मुख्य सड़कों और सेक्रेटेरिएट के सामने के विशाल मैदानों में तिल रखने की भी जगह नहीं थी। मध्यरात्रि में उमड़ी दो से तीन लाख लोगों की भीड़ नेताओं के अभिनंदन में लगातार नारे लगा रही थी।

​'जन गण मन' और 'वंदे मातरम' की गूंज से भक्तिमय हुआ माहौल 
14-15 अगस्त की आधी रात को दिल्ली का वातावरण पूरी तरह अलौकिक हो चुका था। राजेंद्र लाल हांडा के संस्मरणों के अनुसार, उस रात गाए गए 'जन गण मन' और 'वंदे मातरम' के राष्ट्रीय गीतों की मधुर ध्वनि इतनी दिव्य और स्वर्गीय प्रतीत हो रही थी, जितनी पहले कभी महसूस नहीं हुई थी। वहां मौजूद लाखों नर-नारियों को ऐसा आभास हो रहा था मानो पावन गंगा की तरह स्वतंत्रता सीधे स्वर्ग से धरती पर उतर रही हो।

​फुटपाथों पर रात गुजारकर सुबह 8 बजे तिरंगा फहराने का इंतजार 
संसद भवन में रात तीन बजे तक शपथ ग्रहण और आधिकारिक समारोह संपन्न हुआ। इसके बाद कुछ लोग अपने घरों की ओर लौटे, लेकिन लाखों की संख्या में जनसमूह अगले दिन लाल किले पर तिरंगा लहराते देखने की उत्सुकता में वहीं खुले मैदानों, हरे लॉन और फुटपाथों पर सो गया।

15 अगस्त की सुबह आठ बजे पंडित जवाहरलाल नेहरू ने लाल किले के प्राचीर पर पहुंचकर ब्रिटिश शासन के प्रतीक 'यूनियन जैक' को उतारा और स्वतंत्र भारत का तिरंगा झंडा लहराया। हजारों साल पुरानी दिल्ली के इतिहास में किसी एक स्थान पर इतना विशाल और अभूतपूर्व जनसमूह पहले कभी नहीं देखा गया था।

​दिल्ली की सड़कों पर 10 लाख से अधिक लोगों का अभूतपूर्व हुजूम 
सरकारी आंकड़ों और तत्कालीन समाचार पत्रों के अनुसार, उस दिन लाल किले और आसपास के क्षेत्रों में 10 लाख से भी अधिक लोग मौजूद थे। दिल्ली गेट से लेकर कश्मीरी गेट तक और ऐतिहासिक जामा मस्जिद से लेकर लाल किले तक की समूची जमीन पर केवल इंसानों का सिर ही सिर नजर आ रहा था।

दोपहर एक बजे तक सभी सड़कें खचाखच भरी रहीं और इस ऐतिहासिक जनसैलाब को धीरे-धीरे सामान्य होने में चार घंटे से अधिक का समय लग गया था। कई लोगों के हाथों में तिरंगा नहीं था, लेकिन लाल किले पर लहराते राष्ट्रीय ध्वज की एक झलक पाकर ही लाखों आंखें नम और निहाल हो गई थीं।

​'फ्रीडम एट मिडनाइट' में दर्ज पूरे देश के जश्न की तस्वीर 
डोमिनिक लैपियेरे और लैरी कॉलिन्स ने अपनी ऐतिहासिक कृति 'फ्रीडम एट मिडनाइट' में 14 और 15 अगस्त 1947 के पलों को बेहद सजीव ढंग से उकेरा है। वे लिखते हैं कि 14 अगस्त की सुबह से ही देश के हर शहर, कस्बे और गांव-गांव में जश्न का माहौल था। दिल्ली के वाशिंदे अपनी साइकिलों, बसों, कारों और तांगों पर सवार होकर सड़कों पर निकल पड़े थे।

14 अगस्त को सूरज ढलते ही देशभर की सैन्य छावनियों, सरकारी भवनों और निजी इमारतों से यूनियन जैक को सम्मानपूर्वक उतारने की प्रक्रिया शुरू हो गई थी।

​अंग्रेज वायसरायों की तस्वीरों की जगह लहराया तिरंगा 
15 अगस्त की सुबह न केवल दिल्ली, बल्कि पूरे देश के सरकारी प्रतिष्ठानों और छावनियों में वही दृश्य देखने को मिला। जिन दफ्तरों में कभी अंग्रेज वायसरायों और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की तस्वीरें लगी रहती थीं, वहां अब पूरी गरिमा के साथ भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया जा रहा था। हर भारतीय के मन में सिर्फ एक ही भाव था कि 'अब हमारा मुल्क पूरी तरह आजाद है, हम किसी के गुलाम नहीं रहे और अपनी धरती पर अपना राज कायम हो चुका है'।

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आजादी-ए-जश्न Video: कन्याकुमारी से कश्मीर तक... पहाड़ों से समुद्र तक, शहरों से गांवों तक लहराया तिरंगा

Independence Day 2026: भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर पूरा देश देशभक्ति के रंग में रंगा नजर आ रहा है। पंजाब से बंगाल और कन्याकुमारी से कश्मीर तक तिरंगा शान से लहरा रहा है। पहाड़ों से लेकर समुद्र के किनारों तक और शहरों से लेकर गांवों तक आजादी का जश्न देखने को मिल रहा है। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी देशभक्ति के उत्साह में डूबे हैं। देखें स्वतंत्रता दिवस 2026 के जश्न का खास वीडियो।

आजादी के जश्न में देशभर की तस्वीरें और वीडियो सामने आ रहे हैं। कहीं तिरंगे की रोशनी से इमारतें जगमगा रही हैं तो कहीं लोग हाथों में तिरंगा लेकर देशभक्ति के उत्साह में नजर आ रहे हैं।

80वें स्वतंत्रता दिवस की तस्वीरें और वीडियो

आजादी के दिन ओडिशा का लोक भवन भी तिरंगे के रंगों से रोशन नजर आया। रोशनी, भव्यता और उत्साह से भरा यह नजारा 80वें स्वतंत्रता दिवस के जश्न और देश के गौरव को दर्शाता है।

गुवाहाटी में तिरंगा यात्रा में शामिल हुए हिमंत बिस्वा सरमा

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और राज्य बीजेपी अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने गुवाहाटी के ज्योति-बिष्णु कला मंदिर से निकाली गई तिरंगा यात्रा में हिस्सा लिया। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आयोजित इस यात्रा में देशभक्ति का उत्साह देखने को मिला।

तिरंगे की रोशनी से जगमगाए रेलवे स्टेशन

भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के जश्न में देश के कई प्रमुख रेलवे स्टेशन तिरंगे के रंगों से रोशन किए गए हैं। कन्याकुमारी, कोट्टायम और त्रिशूर रेलवे स्टेशन केसरिया, सफेद और हरे रंग की रोशनी से जगमगा उठे। इन स्टेशनों का यह खूबसूरत नजारा स्वतंत्रता दिवस के उत्सव और देशभक्ति की भावना को दर्शा रहा है।

तिरंगे के रंगों में रोशन हुई 112 फीट ऊंची आदियोगी प्रतिमा

कोयंबटूर, तमिलनाडु: भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर ईशा योग केंद्र में स्थित 112 फीट ऊंची आदियोगी प्रतिमा को तिरंगे के रंगों से रोशन किया गया। केसरिया, सफेद और हरे रंग की रोशनी में सजी आदियोगी प्रतिमा का नजारा बेहद आकर्षक दिखाई दिया।

यह रोशनी स्वतंत्रता दिवस की भावना, भारत की यात्रा और देश के प्रति गर्व को दर्शाती है।

स्रोत: ईशा फाउंडेशन

गुजरात: रंग-बिरंगी रोशनी से सजा वडोदरा
वडोदरा, गुजरात: आजादी के जश्न से पहले वडोदरा शहर को रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया। शहर की प्रमुख इमारतों और स्थानों पर की गई रोशनी ने स्वतंत्रता दिवस के उत्सव का माहौल और खास बना दिया।

पश्चिम बंगाल: रोशनी से जगमगाया कोलकाता
कोलकाता, पश्चिम बंगाल: 80वें स्वतंत्रता दिवस के जश्न से पहले कोलकाता को आकर्षक रोशनी से सजाया गया। शहर में जगह-जगह की गई सजावट से आजादी के जश्न का रंग नजर आया।

गोरखपुर: रामगढ़ ताल पर निकली तिरंगा यात्रा
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश: स्वतंत्रता दिवस से पहले रामगढ़ ताल पर तिरंगा यात्रा निकाली गई। इस दौरान रोइंग खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय ध्वज के साथ नाव चलाकर देशभक्ति का संदेश दिया।

मुंबई: तिरंगे की रोशनी में नहाया मंत्रालय और विधान भवन
मुंबई, महाराष्ट्र: स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले मुंबई की प्रमुख सरकारी इमारतों को तिरंगे के रंगों से रोशन किया गया। मंत्रालय, विधान भवन और BMC की इमारतें केसरिया, सफेद और हरे रंग की रोशनी में जगमगाती नजर आईं।

पुणे: तिरंगे के रंगों में रोशन हुआ उजानी बांध
इंदापुर, पुणे: स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले उजानी बांध को राष्ट्रीय ध्वज के रंगों से रोशन किया गया। बांध की रोशनी ने रात में शानदार नजारा पेश किया। खास बात यह रही कि बांध के 16 गेटों से भीमा नदी में छोड़े गए पानी पर तिरंगे का पैटर्न दिखाई दिया, जिसने इस दृश्य को और आकर्षक बना दिया।

स्रोत: जिला सूचना कार्यालय, पुणे

लेह: रंग-बिरंगी रोशनी से सजा बाजार
लेह, लद्दाख: स्वतंत्रता दिवस के जश्न से पहले लेह बाजार को रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया। रोशनी से जगमगाता बाजार आजादी के उत्सव के रंग में रंगा नजर आया।

श्रीनगर: तिरंगे की रोशनी से जगमगाया लाल चौक
श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर: स्वतंत्रता दिवस से पहले श्रीनगर के ऐतिहासिक लाल चौक को रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया। रोशनी से सजा लाल चौक आजादी के जश्न का आकर्षण बन गया।

जम्मू: तवी ब्रिज से बहू किले तक तिरंगे की रोशनी
जम्मू, जम्मू-कश्मीर: स्वतंत्रता दिवस से पहले जम्मू के प्रमुख स्थलों को तिरंगे की रोशनी से सजाया गया। तवी ब्रिज, तवी रिवर फ्रंट, बहू किला और डोगरा चौक केसरिया, सफेद और हरे रंग की रोशनी में जगमगाते नजर आए।

देश के अलग-अलग हिस्सों से सामने आ रहे ये दृश्य भारत की एकता, विविधता और तिरंगे के प्रति सम्मान की झलक दिखाते हैं।

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149 साल के टेस्ट इतिहास में पहली बार हुआ ऐसा, फील्डर ने फील्डिंग में छू लिया वो मुकाम जहां कोई नहीं पहुंचा

Joe Root World records: इंग्लैंड के दिग्गज बल्लेबाज जो रूट ने टेस्ट क्रिकेट के 149 साल के इतिहास में सबसे बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है. पाकिस्तान के खिलाफ पहले टेस्ट में अज़ान अवैस का कैच लपकते ही रूट टेस्ट फॉर्मेट में दुनिया के सबसे सफल फील्डर बन गए. यह उनके टेस्ट करियर का 219वां कैच था. इसके साथ ही उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के स्टीवन स्मिथ और भारत के राहुल द्रविड़ जैसे महान दिग्गजों को पीछे छोड़कर यह ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया. Fri, 21 Aug 2026 17:28:52 +0530

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