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Ranchi Hospital High Drama: अस्पताल में तिरंगा यात्रा से रोके गए देवेंद्र महतो; कमरे के बाहर भारी पुलिस बल तैनात, धक्का-मुक्की का आरोप

झारखंड में लोक सेवा आयोग (JPSC) और राज्य कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं व पेपर लीक के विरोध में चल रहा छात्र आंदोलन 22वें दिन भी पूरे उबाल पर रहा। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर रांची के सदर अस्पताल में उस समय तनाव की स्थिति बन गई जब भूख हड़ताल के चलते भर्ती छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो को छात्रों की तिरंगा यात्रा में भाग लेने से पुलिस ने रोक दिया।

अस्पताल के वार्ड से बाहर निकलने को लेकर पुलिसकर्मियों और समर्थकों के बीच तीखी नोकझोंक व धक्का-मुक्की की स्थिति पैदा हो गई।

अस्पताल के एचडीयू वार्ड के बाहर पुलिस का कड़ा पहरा
सदर अस्पताल में देवेंद्र नाथ महतो ने 15 अगस्त के दिन जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आयोजित ध्वजारोहण कार्यक्रम और छात्रों की तिरंगा यात्रा में शामिल होने की इच्छा जताई थी। जैसे ही उन्होंने अस्पताल से बाहर जाने का प्रयास किया, वहां पहले से तैनात भारी पुलिस बल ने उन्हें रोक दिया।

करीब एक घंटे तक वार्ड के बाहर गतिरोध बना रहा। प्रशासन ने उनके नाजुक स्वास्थ्य और सुरक्षा का हवाला देते हुए बाहर जाने की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया, जिसके बाद अस्पताल परिसर में अतिरिक्त सुरक्षा बलों को तैनात कर दिया गया।

'क्या अपने ही देश में तिरंगा फहराने की आजादी नहीं?'
पुलिस की इस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए देवेंद्र नाथ महतो ने सोशल मीडिया पर वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि वे कठिन शारीरिक परिस्थितियों के बावजूद शांतिपूर्ण तरीके से तिरंगा यात्रा और ध्वजारोहण में शामिल होना चाहते थे। उन्होंने प्रशासन को लिखित रूप में यह भी दिया था कि यदि उनकी सेहत को कोई नुकसान पहुंचता है तो इसकी जिम्मेदारी अस्पताल प्रबंधन की नहीं होगी।

महतो ने सवाल उठाते हुए कहा, "आखिर क्या यही आजादी है कि हम अपने ही देश में तिरंगा फहराने और तिरंगा यात्रा में शामिल होने के लिए भी स्वतंत्र नहीं हैं?" उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके और उनके साथियों के साथ बलपूर्वक धक्का-मुक्की की।

जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से छात्रों की भव्य तिरंगा यात्रा
अस्पताल में चले ड्रामे के बीच रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से हजारों आंदोलनकारी छात्रों ने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत तिरंगा यात्रा निकाली। हाथों में राष्ट्रीय ध्वज थामे छात्रों ने कचहरी चौक, न्यूक्लियस मॉल, लालपुर चौक, प्लाजा चौक, फिरायालाल चौक और शहीद चौक होते हुए शांतिपूर्ण मार्च निकाला।

आंदोलनकारी छात्रों ने स्पष्ट किया कि जब तक परीक्षा धांधली की निष्पक्ष सीबीआई जांच की मांग पूरी नहीं हो जाती, तब तक उनका लोकतांत्रिक सत्याग्रह अनवरत जारी रहेगा।

22 दिनों से जारी आंदोलन और तेज होती राजनीतिक हलचल
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। अस्पताल के बिस्तर से भी भूख हड़ताल जारी रखने वाले देवेंद्र महतो से मिलने कई राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि पहुंचे हैं, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री भी शामिल हैं। छात्र नेताओं का कहना है कि सीआईडी जांच में लगातार हो रहे खुलासों से उनके आरोपों की पुष्टि हो रही है, इसलिए सरकार को बिना किसी देरी के पूरे मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंप देनी चाहिए।

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घर में शंख जल क्यों माना जाता है इतना पवित्र? जानें इसके धार्मिक फायदे और सही इस्तेमाल

Shankh jal ka mahatva: हिंदू धर्म में शंख को अत्यंत पवित्र माना जाता है, और इसी वजह से शंख में रखे गए जल यानी "शंख जल" का भी धार्मिक अनुष्ठानों में विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि घर के हर कोने में शंख जल का छिड़काव करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और वातावरण शुद्ध व पवित्र बनता है। यही कारण है कि पूजा-पाठ और हवन जैसे शुभ अवसरों पर शंख जल का इस्तेमाल करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।

शंख जल को पवित्र मानने के पीछे की धार्मिक मान्यता
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, शंख को भगवान विष्णु का प्रिय प्रतीक माना जाता है, और यह समुद्र मंथन के दौरान उत्पन्न हुए दिव्य रत्नों में से एक है। मान्यता है कि जब जल को शंख में भरकर रखा जाता है, तो वह जल भी शंख की दिव्यता और पवित्रता को ग्रहण कर लेता है। इसी वजह से शंख जल को गंगाजल के समान ही पवित्र और शुद्धिकारी माना जाता है।

कथाओं में यह भी उल्लेख मिलता है कि शंख जल का छिड़काव करने से घर में देवी-देवताओं की कृपा बनी रहती है और वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

शंख जल तैयार करने की सही विधि
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, शंख जल तैयार करने के लिए स्वच्छ शंख में शुद्ध जल भरकर उसे कुछ समय के लिए रखा जाता है, ताकि जल शंख के गुणों को अवशोषित कर सके। मान्यता है कि इस जल में तुलसी पत्र मिलाना और भी अधिक शुभ माना जाता है। इसके बाद इस जल को पूजा स्थान, घर के मुख्य द्वार और हर कमरे के कोनों में छिड़का जाता है।

यह भी कहा जाता है कि सुबह स्नान करने के बाद शंख जल का छिड़काव करना विशेष रूप से फलदायी होता है, क्योंकि इस समय वातावरण शांत और पवित्र माना जाता है।

शंख जल के वैज्ञानिक लाभ भी हैं खास
धार्मिक महत्व के साथ-साथ शंख जल को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी लाभकारी माना जाता है। मान्यता है कि शंख में मौजूद प्राकृतिक खनिज तत्व जल में घुलकर उसे शुद्ध बनाने में सहायक होते हैं। इसके अलावा शंख जल के छिड़काव से वातावरण में मौजूद हानिकारक सूक्ष्म कीटाणु नष्ट होने की भी मान्यता है, जिससे घर का वातावरण स्वच्छ बना रहता है।

किन अवसरों पर होता है शंख जल का इस्तेमाल?
हिंदू परंपरा में शंख जल का इस्तेमाल कई खास अवसरों पर किया जाता है। गृह प्रवेश, नवरात्रि, हवन-यज्ञ और किसी भी बड़े धार्मिक अनुष्ठान से पहले पूरे घर में शंख जल का छिड़काव करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके अलावा कुछ मान्यताओं के अनुसार, नवजात शिशु के जन्म के बाद घर में शंख जल छिड़कने की भी परंपरा है, ताकि नवजात और परिवार को नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा मिल सके।

आज भी कई घरों में निभाई जाती है यह परंपरा
समय के साथ भले ही जीवनशैली में कई बदलाव आए हों, लेकिन शंख जल के इस्तेमाल की यह परंपरा आज भी अनेक हिंदू घरों में श्रद्धापूर्वक निभाई जाती है। खासतौर पर त्योहारों और शुभ अवसरों पर आज भी लोग घर की पवित्रता बनाए रखने के लिए शंख जल का छिड़काव करना नहीं भूलते।

डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक ग्रंथों और लोक-परंपराओं पर आधारित है। Haribhoomi.com इनकी किसी भी तरह की सटीकता या तथ्य की पुष्टि नहीं करता है। इन्हें केवल सामान्य जानकारी के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है। किसी भी उपाय या धार्मिक कर्मकांड को अपनाने से पहले संबंधित विषय के विद्वान से सलाह अवश्य लें।

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