नमो भारत कॉरिडोर के पास पतंग न उड़ाने की अपील, हादसा होने पर जान जाने की आशंका
एनसीआरटीसी आम जनता से अपील करता है कि नमो भारत कॉरिडोर और इसकी विद्युत आपूर्ति व्यवस्था के आसपास पतंग न उड़ाएँ. नमो भारत कॉरिडोर घनी आबादी वाले क्षेत्रों से होकर गुजरता है तथा इसके आसपास पतंग उड़ाने से हाई-वोल्टेज विद्युत प्रणाली की मौजूदगी के कारण सुरक्षा संबंधी जोखिम पैदा हो सकते हैं. नमो भारत ट्रेनें 25kV एसी ओवरहेड इक्विपमेंट (OHE) के माध्यम से संचालित होती हैं, जिसमें हर समय बिजली का प्रवाह रहता है.
OHE या पैंटोग्राफ को नुकसान होने की आशंका
पतंग की डोर, विशेष रूप से धातु मिश्रित या चाइनीज मांझा, ओवरहेड इक्विपमेंट (OHE) में उलझ सकता है या ट्रेन के पैंटोग्राफ के संपर्क में आ सकता है. पैंटोग्राफ वह उपकरण है, जो ओवरहेड सिस्टम से ट्रेन के संचालन के लिए बिजली प्राप्त करता है. ऐसी घटनाओं से OHE या पैंटोग्राफ को नुकसान पहुंच सकता है और ट्रेन सेवाएं बाधित हो सकती हैं. वहीं, इन हाई-वोल्टेज OHE के संपर्क में आने से आसपास पतंग उड़ाने वाले लोगों के लिए गंभीर और संभावित रूप से जानलेवा खतरा पैदा हो सकता है.
अलर्ट पर स्पेशल टीमें
सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने और नमो भारत सेवाओं के निर्बाध संचालन के लिए एनसीआरटीसी ने पूरे कॉरिडोर पर आवश्यक सुरक्षा और निगरानी के इंतजाम किए हैं. पतंग से जुड़ी घटनाओं की आशंका वाले क्षेत्रों में विशेष टीमें लगातार सतर्क रहती हैं. वहीं, ट्रेन ऑपरेटरों और स्टेशन स्टाफ को भी पटरियों और OHE के आसपास पतंग की डोर तथा अन्य किसी भी तरह की रुकावट पर विशेष सतर्कता बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं.
एनसीआरटीसी जनता से अपील करता है कि वे त्योहारों का जश्न पूरी जिम्मेदारी के साथ मनाएँ और नमो भारत कॉरिडोर को सुरक्षित रखने में सहयोग करें, ताकि सार्वजनिक सुरक्षा के साथ-साथ नमो भारत ट्रेनों का निर्बाध और सुगम संचालन भी सुनिश्चित किया जा सके.
UPI और RuPay को लेकर बड़ा बदलाव, राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद नए कानून से क्या बदलेगा?
डिजिटल पेमेंट और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े नियमों में बदलाव का रास्ता साफ हो गया है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) अधिनियम, 2026 और भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन से जुड़े कानून को मंजूरी दे दी है. संसद ने इन विधेयकों को 10 अगस्त को पारित किया था. राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद दोनों कानूनों के प्रावधानों को लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी.
UPI और RuPay पर MDR को लेकर नया कानूनी प्रावधान
भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम में संशोधन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू डिजिटल भुगतान पर लगने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR से जुड़ा है. नए प्रावधान के तहत सरकार को अधिसूचना के माध्यम से यह तय करने का अधिकार मिलेगा कि किन इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों या लेनदेन पर MDR नहीं लगाया जाएगा.
इसका मतलब यह है कि डिजिटल पेमेंट के अलग-अलग माध्यमों के लिए शुल्क व्यवस्था तय करने का कानूनी ढांचा अब अधिक स्पष्ट होगा. हालांकि, आम यूजर के लिए UPI भुगतान पर शुल्क लगाने की तत्काल व्यवस्था नहीं की गई है.
आम लोगों के लिए UPI भुगतान रहेगा मुफ्त
विधेयक पर चर्चा के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया था कि यूजर के लिए UPI भुगतान नि:शुल्क बना रहेगा. उनके अनुसार भविष्य में MDR का प्रावधान कुछ खास श्रेणियों के कारोबारी लेनदेन तक सीमित रखा जा सकता है.
फिलहाल UPI और RuPay डेबिट कार्ड से भुगतान करने वाले ग्राहकों से बैंक और भुगतान सेवा प्रदाता सीधे शुल्क नहीं लेते हैं. संशोधन के बाद शुल्क व्यवस्था से जुड़े निर्णय के लिए संबंधित भुगतान प्रणाली और उसकी संचालन व्यवस्था की भूमिका महत्वपूर्ण होगी.
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