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General Dheeraj Seth ने Nepal PM बालेंद्र शाह से मुलाकात की, सैन्य संबंधों पर हुई चर्चा

(शिरिष बी प्रधान) काठमांडू, 18 अगस्त भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने मंगलवार को नेपाल के प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री बालेंद्र शाह से मुलाकात की और आपसी हित के मुद्दों तथा सैन्य संबंधों को मजबूत करने के तौर- तरीकों पर चर्चा की। दोनों पड़ोसी देशों के रिश्तों में तनाव के बीच सिंह दरबार में प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के कार्यालय में हुई इस मुलाकात के दौरान नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव भी मौजूद रहे। प्रधानमंत्री सचिवालय के सूत्रों के मुताबिक बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने आपसी हित और द्विपक्षीय सैन्य संबंधों को मजबूत करने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।

इस महीने की शुरुआत में, प्रधानमंत्री शाह ने भारतीय राजदूत श्रीवास्तव के साथ अपनी पहली आमने-सामने की बैठक की थी और भारत के साथ देश के ‘ऐतिहासिक संबंधों’ को और मजबूत करने की आवश्यकता को रेखांकित किया था। इहाल के सप्ताह शाह ने विदेशी राजदूतों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आमने-सामने की मुलाकात न करने के अपने ही बनाए नियम से हटकर यह मुलाकात की। जनरल सेठ अपने नेपाली समकक्ष जनरल अशोक राज सिग्देल के निमंत्रण पर 17 से 19 अगस्त तक नेपाल की चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं।

उन्हें सोमवार को यहां एक समारोह में राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने नेपाली सेना के ‘मानद जनरल’ का दर्जा दिया। नेपाल और भारत 1950 से एक-दूसरे के सेना प्रमुखों को ‘जनरल’ का मानद पद देने की परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं। यह मानद पद देना एक अनोखी और लंबे समय से चली आ रही सैन्य परंपरा का हिस्सा है, जिसके तहत भारत और नेपाल एक-दूसरे की सेनाओं के प्रमुखों को ‘जनरल’ का मानद पद देते हैं।

जनरल सेठ ने सोमवार को सेना मुख्यालय में जनरल सिग्देल के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी की और आपसी हित के मुद्दों पर चर्चा की। जनरल सेठ ने सोमवार को नेपाली सेना के मुख्यालय में जनरल सिग्देल के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी की और आपसी हित के मुद्दों पर चर्चा की। काठमांडू में भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि भारतीय सेना प्रमुख का नेपाल दौरा ‘‘भारत और नेपाल के बीच रक्षा के क्षेत्र में अद्वितीय और समय की कसौटी पर खरे उतरे रिश्तों को फिर से मज़बूत करता है।

ये रिश्ते साझा मूल्यों, आपसी भरोसे और सेनाओं के बीच लंबे समय से चले आ रहे मजबूत संबंधों पर आधारित हैं।’’ नेपाली सेना के सूत्रों ने बताया कि जनरल सेठ ने मंगलवार को काठमांडू के पशुपतिनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना भी की।

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Russia ने जापानी राजदूत को किया तलब, Vladimir Putin की कुरील द्वीप यात्रा पर जताया कड़ा ऐतराज

रूस के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को जापान के राजदूत को तलब करके राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की कुरील द्वीप समूह की यात्रा की निंदा किए जाने पर विरोध जताया। कुरील प्रशांत महासागर में रूस के नियंत्रण वाला द्वीप समूह है, जबकि जापान भी इस पर दावा करता है। पिछले सप्ताह पुतिन ने इस द्वीप समूह के चार सबसे दक्षिणी द्वीपों में से एक इटुरुप का दौरा किया था।

जापान इसे अपना उत्तरी क्षेत्र कहता है। द्वितीय विश्व युद्ध के अंतिम दिनों में सोवियत संघ ने इन द्वीपों को जापान से अपने कब्जे में ले लिया था। इस विवाद के कारण दोनों देश अब तक औपचारिक रूप से शांति संधि पर हस्ताक्षर नहीं कर पाए हैं।

जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने कहा कि पुतिन की यह यात्रा ‘‘उत्तरी क्षेत्रों पर जापान के रुख के अनुरूप नहीं है’’ और ‘‘पूरी तरह अस्वीकार्य’’ है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन के मुद्दे को लेकर दोनों देशों के बीच पहले से तनावपूर्ण संबंधों को इस यात्रा से और नुकसान पहुंचा है तथा मॉस्को को इसके परिणाम समझने चाहिए। जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने कहा कि जापान इटुरुप की पुतिन की यात्रा का ‘‘कड़ा विरोध’’ करता है।

मंगलवार को रूस के उप विदेश मंत्री मिखाइल गालुजिन ने जापानी राजदूत अकीरा मुतो को तलब करके ताकाइची तथा मोतेगी के ‘‘रूस विरोधी’’ बयानों पर औपचारिक विरोध दर्ज कराया। विदेश मंत्रालय के अनुसार, गालुजिन ने मुतो से कहा, ‘‘दक्षिणी कुरील द्वीपों पर रूस की संप्रभुता और अधिकार क्षेत्र पूरी तरह निर्विवाद है।

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  Sports

David Warner के बाद Australia की सलामी जोड़ी पर संकट, Matt Renshaw लौटे और Labuschagne के लिए बढ़ी मुश्किलें

ऑस्ट्रेलिया की टीम को बांग्लादेश के खिलाफ घरेलू मैदान पर मिली शर्मनाक हार के बाद चयनकर्ताओं ने बड़ा फैसला लिया है। डार्विन में खेले गए पहले टेस्ट के बाद जैक वेदराल्ड को टीम से बाहर कर दिया गया है। अब उनकी जगह मैट रेनशॉ को अगले टेस्ट के लिए शुरुआती बल्लेबाज के तौर पर मौका मिलने की उम्मीद है।

जैक वेदराल्ड के लिए डार्विन टेस्ट की शुरुआत बेहद खराब रही थी। पहली गेंद पर उन्होंने ऑफ स्टंप से काफी बाहर जाती गेंद पर गलत शॉट खेलने की कोशिश की। इसके बाद अगली गेंद भी ज्यादा प्रभावी नहीं रही। तीसरी गेंद पर उन्होंने ऑफ स्टंप के करीब आई गेंद को काटने की कोशिश की, लेकिन गेंद बल्ले से लगकर विकेटों पर जा लगी। इस तरह छह मिनट से भी कम समय में उनकी पारी खत्म हो गई।

वेदराल्ड के लिए यह मुकाबला खास था क्योंकि डार्विन को उनकी घरेलू वापसी के लिए सही मंच माना जा रहा था। लेकिन वह मौके का फायदा नहीं उठा सके। छह टेस्ट में उनके नाम केवल एक अर्धशतक है और उनका बल्लेबाजी औसत 20.36 रहा है। ऐसे प्रदर्शन के बाद बांग्लादेश के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया की हार ने उनकी स्थिति और कमजोर कर दी।

बता दें कि ऑस्ट्रेलिया ने बांग्लादेश के खिलाफ मुकाबले में अपने तेज गेंदबाजों के दम पर दबाव बनाने की कोशिश की थी, लेकिन बांग्लादेश के शीर्ष क्रम ने उन्हें काफी आसानी से खेला। इसी वजह से चयनकर्ताओं के सामने ऊपरी क्रम में बदलाव का दबाव बढ़ गया। माना जा रहा है कि अगर ऑस्ट्रेलिया डार्विन में हार से बच जाता तो वेदराल्ड को एक और मौका मिल सकता था।

अब मैट रेनशॉ के लिए वापसी का रास्ता खुल गया है। रेनशॉ ने पिछले घरेलू सत्र में क्वींसलैंड के लिए शानदार प्रदर्शन किया था। उन्होंने शेफील्ड शील्ड में 46.09 की औसत से रन बनाए और दो शतक भी लगाए। इससे पहले वह ऑस्ट्रेलिया की एशेज टीम में वेदराल्ड से पीछे रह गए थे।

गौरतलब है कि रेनशॉ ने अब तक 14 टेस्ट खेले हैं और उनकी पिछली तीन टेस्ट पारियां मध्यक्रम में आई थीं। उनका आखिरी टेस्ट मैच 2023 की शुरुआत में दिल्ली में हुआ था। अब मैके में उन्हें फिर से पारी की शुरुआत करने की जिम्मेदारी मिल सकती है। इससे पहले उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के जोहानिसबर्ग में भी सलामी बल्लेबाज की भूमिका निभाई थी।

वॉर्नर के संन्यास के बाद से ऑस्ट्रेलिया अब तक नौ अलग-अलग सलामी बल्लेबाज आजमा चुका है। ऐसे में रेनशॉ के लिए यह मौका बेहद अहम है। उनके मार्गदर्शक उस्मान ख्वाजा भी लंबे अंतराल के बाद टेस्ट टीम में लौटकर सफल रहे थे और रेनशॉ उनसे प्रेरणा ले सकते हैं।

दूसरी ओर, मार्नस लाबुशेन पर भी दबाव बढ़ गया है। कोच और चयनकर्ता एंड्रयू मैकडोनाल्ड ने उन्हें साफ संकेत दिया है कि टीम में जगह बनाए रखने के लिए उन्हें बड़ी पारियां खेलनी होंगी। डार्विन की दूसरी पारी में लाबुशेन ने 31 रन बनाए और तेज गेंदबाजों के खिलाफ उनका खेल बेहतर नजर आया, लेकिन मैकडोनाल्ड के मुताबिक यह पारी सिर्फ 31 रन तक ही सीमित रही।

लाबुशेन का टेस्ट औसत अब 44.16 तक गिर चुका है, जबकि एक समय उनका औसत 60 के आसपास था। तीन साल से टेस्ट शतक नहीं लगा पाने के कारण मैके में उनके प्रदर्शन पर खास नजर रहेगी। अगले टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया का लक्ष्य श्रृंखला बराबर करना होगा, क्योंकि घरेलू मैदान पर बांग्लादेश से श्रृंखला हारना टीम के लिए एक और बड़ा झटका साबित हो सकता है।
Tue, 18 Aug 2026 22:18:05 +0530

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