Property News: दिल्ली-NCR में खरीदने जा रहे हैं प्रॉपर्टी तो इन दस्तावेजों की जरूर कर लें जांच, वरना बढ़ सकती है मुश्किल
Property News: दिल्ली-NCR में घर, फ्लैट या प्लॉट खरीदना लाखों लोगों का सपना होता है. नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद और आसपास के इलाकों में रियल एस्टेट लगातार निवेश का बड़ा विकल्प बना हुआ है. लेकिन प्रॉपर्टी की कीमत और लोकेशन के साथ उसकी कानूनी स्थिति और RERA रजिस्ट्रेशन की जांच करना भी उतना ही जरूरी है.
रियल एस्टेट में धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों को देखते हुए हरियाणा रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण यानी हरेरा, गुरुग्राम ने घर खरीदारों को बिना पंजीकरण वाली परियोजनाओं से दूर रहने की सलाह दी है.
बिना RERA जांच के न बुक करें प्रॉपर्टी
प्राधिकरण का कहना है कि कोई भी खरीदार प्लॉट, फ्लैट, विला, अपार्टमेंट या दूसरी संपत्ति खरीदने से पहले संबंधित प्रोजेक्ट की पूरी जानकारी जरूर जांचे.
कई बार बिल्डर आकर्षक कीमत, शानदार सुविधाओं और जल्द कब्जे का दावा करके खरीदारों को बुकिंग के लिए तैयार कर लेते हैं. लेकिन बाद में प्रोजेक्ट की मंजूरी या रजिस्ट्रेशन से जुड़ी समस्या सामने आ सकती है. ऐसे में शुरुआती जांच खरीदार को बड़ी आर्थिक परेशानी से बचा सकती है.
इन दस्तावेजों की जरूर करें जांच
किसी प्रोजेक्ट में निवेश करने से पहले खरीदार को उसका RERA रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट और रजिस्ट्रेशन नंबर देखना चाहिए. इसके अलावा प्रोजेक्ट की आधिकारिक वेबसाइट, स्वीकृत साइट का पता और प्राधिकरण के पोर्टल पर उपलब्ध दूसरी जानकारी भी जांचना जरूरी है.
सिर्फ बिल्डर द्वारा दिए गए ब्रोशर या व्हाट्सऐप पर भेजी गई जानकारी पर भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है. खरीदार को कोशिश करनी चाहिए कि हर महत्वपूर्ण जानकारी आधिकारिक रिकॉर्ड से ही सत्यापित की जाए.
बिना रजिस्ट्रेशन प्रोजेक्ट में निवेश क्यों खतरनाक?
RERA के तहत आने वाली परियोजनाओं के लिए निर्धारित नियमों का पालन जरूरी है. बिना पंजीकरण वाली परियोजना में बिक्री, विज्ञापन, मार्केटिंग, बुकिंग या बिक्री की पेशकश करना नियमों का उल्लंघन हो सकता है. इसलिए खरीदारों के लिए सबसे सुरक्षित तरीका यही है कि वे RERA में पंजीकृत परियोजना की स्थिति की जांच करने के बाद ही आगे बढ़ें.
सिर्फ बिल्डर ही नहीं, एजेंट भी जिम्मेदार
प्रॉपर्टी खरीदने में ब्रोकर या रियल एस्टेट एजेंट की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है. प्राधिकरण के मुताबिक, RERA के तहत पंजीकृत परियोजनाओं की बिक्री या खरीद में मदद करने वाले संबंधित रियल एस्टेट एजेंट का भी प्राधिकरण में पंजीकरण होना जरूरी है.
इसका मतलब है कि खरीदार को प्रोजेक्ट के साथ-साथ उस एजेंट की वैधता भी जांचनी चाहिए, जिसके माध्यम से वह संपत्ति खरीद रहा है.
नियम तोड़ने पर हो सकती है कार्रवाई
बिना पंजीकरण वाली परियोजना का विज्ञापन करने, मार्केटिंग करने, बुकिंग लेने, बिक्री की पेशकश करने या बिक्री करने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है.
RERA अधिनियम की धारा 59(2) के तहत नियमों का उल्लंघन करने वाले बिल्डर, प्रमोटर या संबंधित लोगों पर कार्रवाई की जा सकती है. इसलिए केवल खरीदार ही नहीं, बल्कि प्रोजेक्ट को बाजार में बेचने वाले लोगों के लिए भी नियमों का पालन करना अनिवार्य है.
प्री-लॉन्च ऑफर के नाम पर न फंसें
रियल एस्टेट बाजार में कई बार ऐसे ऑफर सामने आते हैं जिनमें किसी प्रोजेक्ट को आधिकारिक मंजूरी या जरूरी पंजीकरण मिलने से पहले ही ग्राहकों को आकर्षित किया जाता है.
‘अर्ली बर्ड ऑफर’, ‘प्री-लॉन्च प्राइस’ या बेहद कम कीमत जैसे दावे खरीदारों को जल्दी फैसला लेने के लिए प्रेरित कर सकते हैं. ऐसे मामलों में अतिरिक्त सावधानी जरूरी है. हरेरा ने भी बिना आवश्यक मंजूरी के प्री-लॉन्च विज्ञापन और प्रचार सामग्री से बचने के निर्देश दिए हैं.
प्रॉपर्टी खरीदने से पहले 6 बुनियादी सवाल जरूर पूछें
1. क्या प्रोजेक्ट RERA में पंजीकृत है?
2. उसका वैध रजिस्ट्रेशन नंबर क्या है?
3. स्वीकृत प्रोजेक्ट साइट का पता क्या है?
4. बिल्डर की ओर से दी गई जानकारी आधिकारिक रिकॉर्ड से मेल खाती है या नहीं?
5. प्रॉपर्टी बेचने वाला एजेंट पंजीकृत है या नहीं?
6. प्रोजेक्ट को जरूरी मंजूरियां मिली हैं या नहीं?
जल्दबाजी नहीं, पहले जांच
प्रॉपर्टी में निवेश जिंदगी की सबसे बड़ी वित्तीय खरीदारी में से एक हो सकता है. इसलिए सिर्फ लोकेशन, कीमत या बिल्डर के वादे देखकर फैसला लेना उचित नहीं है.
RERA रजिस्ट्रेशन, प्रोजेक्ट की मंजूरी और एजेंट की वैधता की जांच करने में थोड़ा समय लग सकता है, लेकिन यही सावधानी भविष्य के बड़े नुकसान से बचा सकती है. दिल्ली-NCR में प्रॉपर्टी खरीदने वालों के लिए हरेरा की यह सलाह खास तौर पर महत्वपूर्ण है कि पैसा लगाने से पहले आधिकारिक रिकॉर्ड जरूर जांचें और भ्रामक विज्ञापनों के बजाय प्रमाणित जानकारी पर भरोसा करें.
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‘मेरे सपनों का उत्तराखंड’ अभियान को मिला जोरदार समर्थन, 35 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों ने भेजे निबंध
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आह्वान पर शुरु हुए ‘मेरे सपनों का उत्तराखंड’ अभियान को विद्यार्थियों का जबरदस्त समर्थन मिल रहा है. सीएम विद्यार्थी मंथन डॉट कॉम पोर्टल पर अब तक 35 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने अपने निबंध अपलोड किए हैं. निबंध जमा करने की अंतिम तारीख 24 अगस्त तय की गई है.
निबंध के माध्यम से विचार शेयर करने की अपील
दरअसल, 10 अगस्त को मुख्यमंत्री धामी ने करीब 3 लाख कक्षा 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों के साथ ऑनलाइन संवाद किया था. इस दौरान, युवाओं से उन्होंने उत्तराखंड के विकास को लेकर अपने विचार और विजन निबंध के माध्यम से शेयर करने की अपील की थी. अभियान के तहत विद्यार्थियों से रोजगार, पर्यटन, सामाजिक विकास, शिक्षा, तकनीक और स्वास्थ्य जैसे अहम विषयों पर अपने विचार मांगे हैं. मुख्यमंत्री ने कहा था कि विद्यार्थियों के बेहतर विचारों का अध्ययन करके उनको राज्य की नीतियों में शामिल करने की दिशा में काम किया जाएगा.
इस अभियान के तहत सीएम ने 140 उत्तम विचार देने वाले विद्यार्थियों के साथ शासन के वरिष्ठ सचिवों की मौजूदगी में चर्चा करने और खुद भी उनके विचार सुनने की बात की है. सरकार ने अच्छा प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों करियर और परीक्षा की तैयारी में मदद के लिए छात्रवृत्ति और अन्य पुरस्कार देने की घोषणा की है. अभियान की खास बात है कि निबंध अपलोड करने के बाद विद्यार्थियों को तत्काल रूप से प्रमाण पत्र भी मिल रहा है. इस वजह से छात्रों में इसको लेकर उत्साह दिखाई दे रहा है.
जेन-जी और जेन अल्फा को मिल रहा लाभ
अभियान के संयोजक डॉ. राहुल अग्रवाल की मानें तो ये देश में अपनी प्रकार का पहला प्रयास है, जिससे जेन-जी और जेन अल्फा दोनों पीढ़ियों के विद्यार्थी लाभ ले रहे हैं. सरकारी और निजी स्कूलों से लगातार प्रविष्टियां मिल रही है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद इस अभियान की मॉनिटरिंग कर रहे हैं. सरकार का उद्देश्य विद्यार्थियों की सोच और सुझावों को उत्तराखंड के भविष्य के विकास को जोड़ना है.
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