Chamoli Tunnel Collapse: चमोली टनल हादसे में 2 और मजदूरों के मिले शव, मृतकों का आंकड़ा पहुंचा 10, 5 दिनों बाद सर्च ऑपरेशन खत्म
Chamoli Tunnel Accident: चमोली THDC टनल हादसे में दो और लापता मजदूरों के शव मिलने के बाद, 13 अगस्त को हुए हादसे में मरने वालों की कुल संख्या 10 हो गई है। टनल में बचाव और तलाशी अभियान मंगलवार को खत्म हो गया।
सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री पद ठुकराने की वजह बताई:संस्मरण में प्यार, नुकसान और छह दशक के अनुभव, किताब 10 नवंबर को प्रकाशित होगी
न्यूयॉर्क में 18 अगस्त को जारी एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सोनिया गांधी का संस्मरण इस पतझड़ में प्रकाशित होगा। इसमें वे भारत के नेहरू-गांधी राजनीतिक परिवार में शादी के वादे और त्रासदी के साथ अपने सरकारी जीवन पर लिखेंगी। अल्फ्रेड ए. नॉफ ने मंगलवार को बताया कि सोनिया गांधी की किताब ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ 10 नवंबर को प्रकाशित होगी। सोनिया गांधी की उम्र 79 साल है और वे मूल रूप से इटली की रहने वाली हैं। राजीव गांधी से कैंब्रिज में हुई थी मुलाकात सोनिया गांधी इंग्लैंड के कैंब्रिज में पढ़ाई कर रही थीं, तभी उनकी मुलाकात राजीव गांधी से हुई थी। राजीव गांधी आगे चलकर उनके पति बने। राजीव गांधी भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के पोते और देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बेटे थे। सास और पति की हत्या के बाद राजनीति में आईं सोनिया गांधी ने संस्मरण में लिखा है कि 1984 में उनकी सास इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई थी। इसके बाद राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने, लेकिन सात साल बाद उनकी भी हत्या कर दी गई। बाद में सोनिया गांधी राजनीति में आईं और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी की सबसे लंबे समय तक अध्यक्ष रहीं। उन्होंने अपनी पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री बनने का प्रस्ताव भी ठुकरा दिया था। 2014 में उनकी पार्टी की सत्ता मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पार्टी से हार गई थी। सोनिया गांधी ने नॉफ के जरिए जारी बयान में कहा, “दिल टूटने और नुकसान ने मुझे राजनीति की सार्वजनिक दुनिया में पहुंचाया। उससे पहले मैं अपनी निजता की पूरी तरह रक्षा करती थी।” ‘यह किताब परिवार की इंसानियत को सम्मान देती है’ सोनिया गांधी ने कहा, “मेरे परिवार के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है, लेकिन बहुत कम कथाएं उनके इरादों, उनके कामों और उनकी बहुत मानवीय कमियों की सच्चाई तक पहुंच पाई हैं। कई मायनों में यह किताब उनकी इंसानियत को सम्मान देती है।” उन्होंने कहा कि उनकी कहानी पाठकों को उस खूबसूरत देश में छह दशक के दौरान देखे सामाजिक और राजनीतिक बदलावों को समझने का एक अलग नजरिया भी देगी, जिसे वे अपना देश मानती हैं। ‘अपने जीवन के बारे में लिखना आसान नहीं था’ सोनिया गांधी ने कहा, “अपने जीवन के बारे में लिखना मेरे लिए आसान नहीं था। इसका मतलब था खुद को खोलना और उन पलों व अनुभवों को साझा करना, जिन्हें मैंने हमेशा अपने भीतर गहराई से संभालकर रखा था।” उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे उन्होंने खुद को राजनीति से दूर किया और पीछे मुड़कर देखा, उनकी कहानी में प्यार और वफादारी की वह कड़ी साफ होने लगी। यह कड़ी इटली के छोटे शहर में बिताए उनके सरल बचपन से लेकर भारत में राजीव गांधी की पत्नी और प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की बहू के रूप में बिताए जटिल वर्षों तक फैली है। राहुल और प्रियंका भी राजनीति में सक्रिय नेहरू-गांधी परिवार अब भी राजनीति में सक्रिय है। सोनिया गांधी के दोनों बच्चे राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा कांग्रेस पार्टी से भारतीय संसद के निचले सदन के सदस्य हैं। राहुल गांधी विपक्ष के नेता हैं। (एपी)
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