'अमेरिका की नागरिकता दिलवा दो', तारक मेहता के 'जेठालाल' ने न्यूयॉर्क पहुंचते ही की ऐसी डिमांड, जानें वजह
Dilip Joshi Viral Statement: सालों से दर्शकों को हंसाने और गुदगुदाने वाला टीवी का पॉपुलर शो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ (Taarak Mehta Ka Ooltah Chashmah) आज भी लोगों के बीच अपनी खास जगह बनाए हुए है. शो के किरदारों की पॉपुलैरिटी सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी इसके बहुत चाहने वाले लोग है. ऐसे में हाल ही में शो की टीम न्यूयॉर्क पहुंची और भारतीय-अमेरिकी कम्यूनिटी के साथ भारत का 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाया. इस दौरान दिलीप जोशी यानि जेठालाल ने अमेरिका की नागरिकता दिलवाने की बात की.
न्यूयॉर्क पहुंचे तारक मेहता के ये कलाकार
भारतीय-अमेरिकी कम्यूनिटी के साथ भारत का 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने के लिए ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ के सभी कलाकार पहुंचे थे. जिनमें दिलीप जोशी (जेठालाल), मंदार चंदवाडकर (भिडे), सोनालिका जोशी (माधवी), बलविंदर सिंह सूरी (रोशन सिंह सोढ़ी), मुनमुन दत्ता (बबीता) और नीतीश भलूनी (टपू) का नाम शामिस है. वहीं, इस दौरान शो के निर्माता असित कुमार मोदी भी टीम के साथ मौजूद रहे. कार्यक्रम से जुड़े कई वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं.
जेठालाल ने की फैंस संग मस्ती
न्यूयॉर्क में 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' की टीम का जोरदार स्वागत किया गया और सभी कलाकारों ने फैंस संग मस्ती की, जिसके वीडियो वायरल हो रहे हैं. एक वीडियो में कलाकारों ने फैंस के साथ बातचीत की, डांस किया और आजादी के जश्न में जमकर हिस्सा लिया. वहीं, एक दूसरे वीडियो में म का जेठालाल वाला अंदाज भी फैंस को देखने को मिला.
ये भी पढ़ें- Explainer: ‘Toxic’ का इतना खौफ क्यों? यश की फिल्म से बचने के लिए इन 4 फिल्मों ने बदली रिलीज डेट!
अमेरिका की नागरिकता दिलवाने की मांग
वहीं, एक वीडियो में की नागरिकता दिलवाने ने शूटिंग करने की बात करते हुए अमेरिकी नागरिकता दिलवाने की मांग की. एक्टर से सवाल किया गया- 'क्या आप गड़ा इलेक्ट्रॉनिक्स का ब्रांच यहां न्यूयॉर्क में खोलने के बारे में सोच रहे हैं?' इसपर उन्होंने कहा- 'आपको गोकुलधाम सोसायटी न्यूयॉर्क में खोलना है, गड़ा इलेक्ट्रॉनिक्स न्यूयॉर्क में खोलना है, आप हम सबको सिटिजनशिप दे दो न, हम यहीं से एपिसोड शूट करके भारत भेजेंगे.' दिलीप की इस बात को सुनकर वहां मौजूद लोग हंस पड़े.
18 सालों से जीत रहा दिल
बता दें, तारक मेहता का उल्टा चश्मा ने टीवी की दुनिया में अपने 18 साल पूरे कर लिए हैं. साल 2008 में शुरू हुआ ये शो इतने लंबे समय बाद भी दर्शकों के बीच अपनी पकड़ बनाए हुए है. गोकुलधाम सोसाइटी के किरदारों और उनकी मजेदार कहानियों ने कई सालों से लोगों का मनोरंजन किया है. जेठालाल, दयाबेन, तारक मेहता, बापूजी और पोपटलाल जैसे किरदार घर-घर में पहचान बना चुके हैं. खास बात ये है कि शो की पॉपुलैरिट सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में है.
दिलीप जोशी का करियर
दिलीप जोशी की बात करे तो आज भले ही वो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ के जेठालाल के नाम से घर-घर में जाने जाते हैं, लेकिन उनका एक्टिंग करियर इस शो से काफी पहले शुरू हो चुका था. उन्होंने थिएटर से अपने करियर की शुरुआत की थी और बाद में कई हिंदी फिल्मों और टीवी शोज में छोटे-बड़े किरदार निभाए. ‘हम आपके हैं कौन..!’ और ‘फिर भी दिल है हिंदुस्तानी’ जैसी फिल्मों में भी वो नजर आ चुके हैं. साल 2008 में जब उन्हें जेठालाल चंपकलाल गड़ा का किरदार मिला, तो उनकी जिंदगी ही बदल गई. उनका गुजराती अंदाज, मजेदार एक्सप्रेशन, बापूजी से डर और तारक मेहता के साथ दोस्ती दर्शकों को इतनी पसंद आई कि जेठालाल उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गई.
ये भी पढ़ें- शाहरुख खान के बंगले में घुसे 8 फीट लंबे दो सांप, 'मन्नत' की सीढ़ियों के नीचे से इस तरह किया रेस्क्यू: Video
हाथियों की सेहत पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- धार्मिक आयोजनों में भी हाथियों की देखभाल-सुरक्षा जरूरी
सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में पाले जा रहे हाथियों की सेहत, देखभाल और उनके कल्याण को लेकर अहम निर्देश दिए हैं. अदालत ने साफ किया कि हाथी धार्मिक या सांस्कृतिक परंपराओं का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उनके स्वास्थ्य और आराम की अनदेखी की जाए. कोर्ट ने कहा कि अगर किसी धार्मिक परंपरा में हाथी का इस्तेमाल होता है तो उसकी देखभाल और सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्रीय हाथी स्वास्थ्य एवं कल्याण समिति को कैद में रखे गए हाथियों से जुड़े फैसलों को लागू करने के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा है. केंद्र सरकार और समिति से हाथियों की पहचान, डीएनए प्रोफाइलिंग, इलाज और रखरखाव को लेकर विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी गई है. यह मामला हाथियों को छोड़ने, उनका पुनर्वास करने और उनकी बेहतर देखभाल से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया.
हाथियों के स्वास्थ्य और उनके रखरखाव पर अदालत का ध्यान
सुनवाई में बताया गया कि 2018 की गणना के अनुसार देश में 2,675 कैद हाथी थे. याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी कहा गया कि कुछ हाथियों के पास उनकी कैद में आने से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड नहीं है. हाथियों के धार्मिक और व्यावसायिक इस्तेमाल का मुद्दा भी उठाया गया. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि इस समय उसका मुख्य ध्यान मालिकाना हक पर नहीं, बल्कि हाथियों के स्वास्थ्य और उनके रखरखाव पर है.
कोर्ट ने हाथियों की नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए एक प्रभावी व्यवस्था बनाने पर जोर दिया. सुझाव दिया गया कि हर हाथी का मेडिकल रिकॉर्ड रखा जाए और समय-समय पर उसकी जांच हो. एक समिति इलाज और देखभाल की निगरानी करे और हाथियों को रखने की जगह, भोजन और दूसरी जरूरी सुविधाओं के लिए न्यूनतम मानक तय किए जाएं.
मालिकाना हक या हाथी के हस्तांतरण को लेकर भी कोर्ट ने नियमों का पालन जरूरी बताया. हाथी को एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को देने की स्थिति में दोनों पक्षों की जानकारी और हस्तांतरण का कारण दर्ज किया जाना चाहिए. इसके अलावा मालिकाना प्रमाणपत्र के नवीनीकरण के समय हाथी की उम्र, पहचान और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी दोबारा जांचने की व्यवस्था बनाने की बात कही गई है.
सुप्रीम कोर्ट ने निजी लोगों के पास रखे हाथियों को लेकर भी सवाल उठाए. कोर्ट ने जानना चाहा कि क्या ऐसे मालिक हाथी के भोजन, इलाज और रोजमर्रा की जरूरतों का खर्च ठीक से उठा सकते हैं और आखिर हाथी को निजी तौर पर रखने की जरूरत क्या है. अदालत ने यह भी पूछा कि क्या हाथियों की उम्र, पहचान और स्वास्थ्य से जुड़ा पूरा डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध है.
धार्मिक गतिविधियां भी पशु कल्याण से जुड़े कानूनों के मुताबिक हों- सर्वोच्च अदालत
धार्मिक आयोजनों में हाथियों के इस्तेमाल पर भी कोर्ट ने संतुलित रुख अपनाया. अदालत ने कहा कि उसका उद्देश्य किसी धार्मिक या व्यक्तिगत अधिकार में दखल देना नहीं है. लेकिन धार्मिक गतिविधियां भी पशु कल्याण से जुड़े कानूनों के मुताबिक होनी चाहिए. मंदिरों में जुलूस के दौरान हाथियों के इस्तेमाल के समय और उनकी सेहत का भी ध्यान रखना होगा. कोर्ट ने इसी संदर्भ में कहा कि दिव्यता के प्रति सम्मान हाथियों तक भी पहुंचना चाहिए.
अदालत ने यह भी जानना चाहा कि मंदिरों, सर्कस और दूसरे संस्थानों में रखे हाथियों को पर्याप्त चिकित्सा सुविधा मिल रही है या नहीं. साथ ही यह भी देखा जाएगा कि उनके साथ ऐसा कोई व्यवहार तो नहीं हो रहा जो पशुओं के प्रति क्रूरता रोकने वाले कानून के खिलाफ हो.
सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को पहले दिए गए आदेशों के पालन की जानकारी देने को कहा है. केंद्रीय हाथी स्वास्थ्य एवं कल्याण समिति को भी अपने स्तर पर जरूरी कदम उठाकर अदालत को स्थिति से अवगत कराने का निर्देश दिया गया है. साफ है कि अदालत का जोर हाथियों के मालिकाना विवाद से ज्यादा उनके स्वास्थ्य, सुरक्षित जीवन और सम्मानजनक देखभाल पर है.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation









.jpg)

