अमेरिका और ईरान के बीच जंग अब सिर्फ मिसाइलों तक सीमित नहीं रही। तेहरान की सड़कों पर भी अब एक ऐसा संदेश दिखाई दे रहा है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। ईरान की राजधानी में एक विशाल बिलबोर्ड लगाया गया है जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को काले ताबूत में दिखाया गया। बिलबोर्ड पर साफ लिखा है वी विल किल ट्रंप यानी हम ट्रंप को मारेंगे। अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध के बीच तेहरान के मशहूर एंगेलाब चौक पर लगाया गया यह बिलबोर्ड अब चर्चा का विषय बन गया है। ईरान की अर्ध सरकारी मीडिया के मुताबिक बिलबोर्ड में डोनाल्ड ट्रंप को एक काले ताबूत में लेटा हुआ दिखाया गया है। उनकी आंखें और मुंह बंद है। हाथ सीने पर रखे हुए हैं और ऊपर अंग्रेजी और फारसी भाषा में लिखा है। वी विल किल ट्रंप। यानी हम ट्रंप को मारेंगे। बिलबोर्ड के नीचे एक और लाइन लिखी हुई है मीनाब की याद में। रिपोर्ट के मुताबिक यह संदेश उस कथित हमले की ओर इशारा करता है जिसमें अमेरिकी और इजराइली बमबारी के दौरान मीनाब स्कूल प्रभावित हुआ था। इसी घटना को आधार बनाकर यह बुलबोर्ड बनाया गया है।
यह पहली बार नहीं है कि जब ईरान में अमेरिकी राष्ट्रपति के खिलाफ इस तरह का गुस्सा सार्वजनिक तौर पर दिखाई दिया हो। इससे पहले भी ईरान में कई मौकों पर डेथ टू अमेरिका और डेथ टू ट्रंप जैसे नारे लगाए जाते रहे हैं। हाल ही में दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामनई के अंतिम संस्कार के दौरान भी बड़ी संख्या में लोगों ने ऐसे ही नारे लगाए थे। यह बिल बोर्ड ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। हर रात अमेरिकी हमलों की खबरें आती हैं और सुबह होते-होते ईरान की ओर से जवाबी कार्यवाही की जानकारी सामने आती है। दावा यह किया जा रहा है कि क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है। वहीं हॉरमोस से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों पर भी तनाव का असर साफ दिखाई दे रहा है। डोनाल्ड ट्रंप इससे पहले ऐसी धमकियों पर जवाब भी दे चुके हैं। खामन के अंतिम संस्कार के दौरान लगे नारों के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था अगर ईरान मेरी हत्या की कोशिश करता है तो उसके नतीजों के लिए और पहले से तैयार है। मैंने अपने नेतृत्व को पहले ही निर्देश दे दिए हैं कि अगर मेरी हत्या होती है तो क्या कारवाई की जाए।
डोनाल्ड ट्रंप ने अभी कहा था अगर ऐसा कुछ हुआ तो हजारों मिसाइलें ईरान की ओर दागी जाएंगी और ईरान को तबाह कर दिया जाएगा। तहरान का यह बिलबोर्ड सिर्फ एक पोस्टर नहीं बल्कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती दुश्मनी का एक प्रतीक बन गया है। एक तरफ युद्ध के मैदान में मिसाइलें चल रही हैं तो दूसरी तरफ मनोवैज्ञानिक और प्रतीकात्मक संदेशों की जंग भी तेज हो गई है। अब देखना होगा कि यह टकराव आगे किस दिशा में बढ़ता है और क्या दोनों देशों के बीच तनाव और गहराता है। व आपको बता दें कि 28 फरवरी को खामन की मौत के बाद ईरान ने युद्ध की वजह से उनका अंतिम संस्कार नहीं किया था। जुलाई के पहले हफ्ते में जब यह हुआ तो वहां मौजूद भीड़ ने ट्रंप को मारने के नारे लगाए। अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी इसका जवाब दिया। उन्होंने कहा कि ईरान की तरफ से ऐसा कोई प्रयास किया जाता है तो इसके लिए वह पहले से तैयार हैं। बकाल ट्रंप उन्होंने पहले ही अपने नेतृत्व को आदेश दे दिया है कि अगर ईरानी हमले में उनकी मौत होती है तो क्या किया जाए? डोनाल्ड ट्रंप ने जोर देकर कहा कि अगर ऐसा कुछ होता है तो हजारों मिसाइलें ईरान की तरफ लगी हुई हैं।
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पाकिस्तान के बहुत मशहूर नेता मौलाना फजलुर रहमान इन दिनों पाकिस्तान की सेना और पाकिस्तान की सरकार के विरोध का एक अहम चेहरा हैं। मौलाना फजलुर रहमान लगातार यह बातें कह रहे हैं कि पाकिस्तान की सेना अब इस देश का फजीहत कराने लगी है। पाकिस्तान की सेना पर वो सवाल खड़े कर रहे हैं। वो कहते हैं कि तुम्हें इतना ही शौक है तो वर्दी उतारो और चुनाव लड़ लो। और तो और उन्होंने अपनी इस बात में जो एक बहुत अहम बिंदु उठा दिया कि 80% बलूचिस्तान इनके हाथ से जा चुका है। पश्तूनों के भी खून खल रहा है। वहां की धरती लाल हो रही है। यानी कि बलूचिस्तान को लेकर एक बड़ा एडमिशन जो है उनकी तरफ से आया है। और दूसरी तरफ़ जो सोशल मीडिया हैंडल एक्स है और अह उस पर कई तरह के दावे जो लगातार बीते दिनों किए जा रहे थे उसको लेकर एक अलग परिस्थिति अब दिखाई दे रही है। यानी कि जो बात पहले बलूचिस्तान के समर्थकों द्वारा कही जा रही थी। वो बात तो अब मौलाना फजलुर रहमान भी अपनी दबी जुबान से करते हुए पब्लिक के सामने जो है वो दिखाई दे रहे हैं। जहां वो ये कह रहे हैं कि 80% इलाका जो है वो इनके हाथ से जा चुका है।
मीर यार बलोच हैं वो अपने आप को बलूचिस्तान समर्थक बताते हैं, पत्रकार बताते हैं, एक्टिविस्ट बताते हैं। उन्होंने ये बकायदा ऐलान किया है कि बलूचिस्तान अब आजाद हो चुका है और बलूचिस्तानियों का 80% इलाके पर कब्जा हो गया है। इस वीडियो में उस परिस्थिति की बात करेंगे कि क्या हालात है। बलूचिस्तान में कई अलग-अलग मोर्चों पर पाकिस्तान का विरोध हो रहा है। पाकिस्तान की सरकार का विरोध हो रहा है। सेना का विरोध हो रहा है। क्यों हो रहा है विरोध प्रदर्शन? ये भी समझिए। वहां पर पानी की जो गंभीर समस्या है, कथित जबरन जो डिसअपीयरेंस है जो लोग गायब करा दिए जा रहे हैं। हिंसा बढ़ रही है, गुस्सा बढ़ रहा है। कई इलाकों में लोग पानी की कमी और सरकारी लापरवाही के खिलाफ सड़कों पर हैं। वहीं बलोच यख जिहाती कमेटी के नेतृत्व में लापता लोगों के परिजन अपने रिश्तेदारों की बरामदगी की मांग के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके अलावा हालिया जो बंद हथियार बंद समूह है बलोच लिबरेशन आर्मी बलोच लिबरेशन फ्रंट वो लगातार जो है वो मांग कर रहे हैं एक्शन कर रहे हैं पाकिस्तान की सेना पर वो दूसरा दबाव है और इन सबके बीच जो हथियार समूहों के हमले में पुलिस और सुरक्षा बलों के जवानों की मौत के बाद उनके परिजन हैं वो भी बेहतर सुरक्षा और न्याय की मांग करते हुए विरोध कर रहे हैं। यानी कि चौतरफ़ा बलूचिस्तान के मोर्चे पर पाकिस्तान घिरता हुआ दिखाई पड़ता है।
बलूचिस्तान लंबे वक्त से पाकिस्तान से अह जो है वो आजादी चाह रहा है और पाकिस्तान के लिए बहुत संवेदनशील इलाका रहा है। वहां पाकिस्तानी सेना सरकार शोषण दोहन चाहती है। लेकिन वहां विरोध है और बीते कुछ वर्षों में हालात बद से बदतर हुए हैं। रणनीतिक मामलों के जानकार दावा करते हैं कि पाकिस्तानी सरकार का नियंत्रण अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित है। जबकि ग्रामीण इलाकों में हथियार बंद समूहों की एक्टिविटी इतनी है कि वहां थानों में वहां पोस्ट में सैनिक नहीं रहना चाहते हैं। पुलिस वाले नहीं रहना चाहते हैं। अपनी वर्दी जब पहनकर कोई वहां जाता है तो लोग कहावत के तौर पर कहते हैं कि ये आखिरी अलविदा है। उसके बाद अब ये लौट कर नहीं आ पाएगा। तो ये स्थिति है। रिपोर्ट्स कहते हैं कि बलूच विद्रोही लगातार सैन्य काफिलों, अजम्गों और सिक्योरिटी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले करते हैं। जाफर एक्सप्रेस पर हुए कई हमलों ने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए। इतना ही नहीं चीन के निवेश वाले परियोजना पर भी संकट मंडरा गया क्योंकि लगातार हमले हो रहे हैं। इसके अलावा रेको डिक जैसे बड़े माइनिंग प्रोजेक्ट्स को लेकर भी सुरक्षा चिंताएं हैं। अमेरिका और दूसरे देशों के साथ जो पाकिस्तान डील करने की कोशिश कर रहा है उसने भी बड़ा इंपैक्ट किया है क्योंकि लगातार हमले हो रहे हैं। सवाल खड़े हो गए हैं।
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