पाकिस्तान के बहुत मशहूर नेता मौलाना फजलुर रहमान इन दिनों पाकिस्तान की सेना और पाकिस्तान की सरकार के विरोध का एक अहम चेहरा हैं। मौलाना फजलुर रहमान लगातार यह बातें कह रहे हैं कि पाकिस्तान की सेना अब इस देश का फजीहत कराने लगी है। पाकिस्तान की सेना पर वो सवाल खड़े कर रहे हैं। वो कहते हैं कि तुम्हें इतना ही शौक है तो वर्दी उतारो और चुनाव लड़ लो। और तो और उन्होंने अपनी इस बात में जो एक बहुत अहम बिंदु उठा दिया कि 80% बलूचिस्तान इनके हाथ से जा चुका है। पश्तूनों के भी खून खल रहा है। वहां की धरती लाल हो रही है। यानी कि बलूचिस्तान को लेकर एक बड़ा एडमिशन जो है उनकी तरफ से आया है। और दूसरी तरफ़ जो सोशल मीडिया हैंडल एक्स है और अह उस पर कई तरह के दावे जो लगातार बीते दिनों किए जा रहे थे उसको लेकर एक अलग परिस्थिति अब दिखाई दे रही है। यानी कि जो बात पहले बलूचिस्तान के समर्थकों द्वारा कही जा रही थी। वो बात तो अब मौलाना फजलुर रहमान भी अपनी दबी जुबान से करते हुए पब्लिक के सामने जो है वो दिखाई दे रहे हैं। जहां वो ये कह रहे हैं कि 80% इलाका जो है वो इनके हाथ से जा चुका है।
मीर यार बलोच हैं वो अपने आप को बलूचिस्तान समर्थक बताते हैं, पत्रकार बताते हैं, एक्टिविस्ट बताते हैं। उन्होंने ये बकायदा ऐलान किया है कि बलूचिस्तान अब आजाद हो चुका है और बलूचिस्तानियों का 80% इलाके पर कब्जा हो गया है। इस वीडियो में उस परिस्थिति की बात करेंगे कि क्या हालात है। बलूचिस्तान में कई अलग-अलग मोर्चों पर पाकिस्तान का विरोध हो रहा है। पाकिस्तान की सरकार का विरोध हो रहा है। सेना का विरोध हो रहा है। क्यों हो रहा है विरोध प्रदर्शन? ये भी समझिए। वहां पर पानी की जो गंभीर समस्या है, कथित जबरन जो डिसअपीयरेंस है जो लोग गायब करा दिए जा रहे हैं। हिंसा बढ़ रही है, गुस्सा बढ़ रहा है। कई इलाकों में लोग पानी की कमी और सरकारी लापरवाही के खिलाफ सड़कों पर हैं। वहीं बलोच यख जिहाती कमेटी के नेतृत्व में लापता लोगों के परिजन अपने रिश्तेदारों की बरामदगी की मांग के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके अलावा हालिया जो बंद हथियार बंद समूह है बलोच लिबरेशन आर्मी बलोच लिबरेशन फ्रंट वो लगातार जो है वो मांग कर रहे हैं एक्शन कर रहे हैं पाकिस्तान की सेना पर वो दूसरा दबाव है और इन सबके बीच जो हथियार समूहों के हमले में पुलिस और सुरक्षा बलों के जवानों की मौत के बाद उनके परिजन हैं वो भी बेहतर सुरक्षा और न्याय की मांग करते हुए विरोध कर रहे हैं। यानी कि चौतरफ़ा बलूचिस्तान के मोर्चे पर पाकिस्तान घिरता हुआ दिखाई पड़ता है।
बलूचिस्तान लंबे वक्त से पाकिस्तान से अह जो है वो आजादी चाह रहा है और पाकिस्तान के लिए बहुत संवेदनशील इलाका रहा है। वहां पाकिस्तानी सेना सरकार शोषण दोहन चाहती है। लेकिन वहां विरोध है और बीते कुछ वर्षों में हालात बद से बदतर हुए हैं। रणनीतिक मामलों के जानकार दावा करते हैं कि पाकिस्तानी सरकार का नियंत्रण अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित है। जबकि ग्रामीण इलाकों में हथियार बंद समूहों की एक्टिविटी इतनी है कि वहां थानों में वहां पोस्ट में सैनिक नहीं रहना चाहते हैं। पुलिस वाले नहीं रहना चाहते हैं। अपनी वर्दी जब पहनकर कोई वहां जाता है तो लोग कहावत के तौर पर कहते हैं कि ये आखिरी अलविदा है। उसके बाद अब ये लौट कर नहीं आ पाएगा। तो ये स्थिति है। रिपोर्ट्स कहते हैं कि बलूच विद्रोही लगातार सैन्य काफिलों, अजम्गों और सिक्योरिटी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले करते हैं। जाफर एक्सप्रेस पर हुए कई हमलों ने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए। इतना ही नहीं चीन के निवेश वाले परियोजना पर भी संकट मंडरा गया क्योंकि लगातार हमले हो रहे हैं। इसके अलावा रेको डिक जैसे बड़े माइनिंग प्रोजेक्ट्स को लेकर भी सुरक्षा चिंताएं हैं। अमेरिका और दूसरे देशों के साथ जो पाकिस्तान डील करने की कोशिश कर रहा है उसने भी बड़ा इंपैक्ट किया है क्योंकि लगातार हमले हो रहे हैं। सवाल खड़े हो गए हैं।
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चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शुक्रवार को कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का विकास किसी एक देश का सोलो परफॉर्मेंस नहीं, बल्कि ग्लोबल सहयोग का तालमेल होना चाहिए। शंघाई में 2026 वर्ल्ड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि AI बहुत तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और इसे इस तरह से विकसित किया जाना चाहिए जो मानवता के लिए सकारात्मक और फायदेमंद हो। यह बयान तब आया जब 29 देशों ने शंघाई में 'वर्ल्ड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कोऑपरेशन ऑर्गनाइज़ेशन' बनाने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह एक स्वतंत्र अंतर-सरकारी अंतरराष्ट्रीय संगठन होगा जिसका मुख्यालय इसी शहर में होगा। इस कदम ने AI गवर्नेंस और विकास पर व्यापक सहयोग के लिए चीन की कोशिशों को एक अंतरराष्ट्रीय आयाम दिया।
शी ने कहा कि AI के तेज़ी से आगे बढ़ने के साथ, हमें यह पक्का करना होगा कि इसका विकास सकारात्मक हो, भलाई के लिए हो और मानवता के हित में हो। उन्होंने कई ऐसे सवाल भी उठाए जिनके जवाब अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मिलने चाहिए। उन्होंने कहा, "हम इंसानों को अपने समय के सवालों का जवाब देना होगा: सोचने वाली मशीनों के साथ कैसे तालमेल बिठाएं? जब कोई एल्गोरिदम फ़ैसला लेने का हिस्सा हो, तो सुरक्षा कैसे पक्का करें? अडैप्टिव गवर्नेंस के ज़रिए टेक्नोलॉजी से जुड़ी नैतिक चुनौतियों का सामना कैसे करें? जब खाई लगातार बढ़ रही हो, तो सबके लिए AI को कैसे साकार करें? इन सवालों पर पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय से गंभीरता से विचार करने और ठोस जवाब देने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि चीन चाहता है कि सभी देश AI के विकास में लोगों को केंद्र में रखने वाला नज़रिया अपनाएं। उन्होंने कहा, "हमें यह पक्का करना चाहिए कि AI साझा समृद्धि और सामूहिक सुरक्षा के लिए एक अहम ज़रिया बने। हमें मिलकर ग्लोबल AI गवर्नेंस के लिए एक न्यायपूर्ण और निष्पक्ष सिस्टम बनाना चाहिए।
शी ने यह भी कहा कि अगले पांच सालों में चीन विकासशील देशों में AI के विकास में मदद करेगा। इन देशों में 'एसोसिएशन ऑफ़ साउथईस्ट एशियन नेशंस' (ASEAN), अरब लीग, शंघाई सहयोग संगठन, अफ़्रीकी संघ, लैटिन अमेरिका और ब्रिक्स (BRICS) देशों के सदस्य शामिल हैं। उन्होंने कहा कि चीन 5,000 AI रिसर्च प्रोजेक्ट्स के साथ-साथ ट्रेनिंग, सेमिनार प्रोग्राम और सहयोग केंद्र भी उपलब्ध कराएगा। इससे पहले, सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, 29 देशों ने 'वर्ल्ड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कोऑपरेशन ऑर्गनाइज़ेशन' (विश्व कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहयोग संगठन) बनाने के समझौते पर हस्ताक्षर किए। चीन के अलावा कज़ाकिस्तान, लाओस, पाकिस्तान, रूस और इंडोनेशिया जैसे देशों के प्रतिनिधियों ने समझौते पर हस्ताक्षर किए और संगठन के संस्थापक सदस्य बने। हस्ताक्षर समारोह में मौजूद देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों में संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी शामिल थे। समझौते के अनुसार, यह संगठन संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों को बनाए रखेगा, साझा लाभ के लिए व्यापक विचार-विमर्श और संयुक्त योगदान का समर्थन करेगा, और लोगों पर केंद्रित दृष्टिकोण अपनाएगा।
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