कमर्शियल गाड़ी मालिकों की आ गई मौज, इलेक्ट्रिक, सीएनजी और हाइड्रोजन वाहनों की उम्र 5 साल बढ़ाने की तैयारी
National Permit Rules: केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय परमिट प्रणाली के अंतर्गत आने वाले इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी), हाइड्रोजन ईंधन आधारित वाहनों और प्राकृतिक गैस (सीएनजी) से चलने वाले वाणिज्यिक वाहनों की निर्धारित आयु सीमा में 5 वर्ष की अतिरिक्त बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है.
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच) द्वारा हाल ही में जारी एक अधिसूचना के अनुसार, यह प्रस्ताव राष्ट्रीय परमिट प्रक्रियाओं को सरल बनाने और डिजिटल प्रक्रियाओं के उपयोग को बढ़ाने के लिए एक मसौदा संशोधन का हिस्सा है, जिन पर सरकार ने आम जनता, उद्योग जगत और अन्य हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित किए हैं. इसके लिए 30 दिनों का समय दिया गया है. इन सुझावों पर विचार करने के बाद अंतिम नियमों को राजपत्र (गजट) में प्रकाशित किया जाएगा, जिसके बाद ही वे लागू होंगे.
राष्ट्रीय परमिट नियमों में बदलाव का प्रस्ताव
केंद्रीय मोटर वाहन नियम (सीएमवीआर), 1989 में संशोधन के मसौदे में प्रस्तावित प्रावधान में राष्ट्रीय परमिट प्रक्रियाओं को सरल बनाने और प्रक्रिया को डिजिटल बनाने का भी प्रयास किया गया है.
मुख्य प्रस्ताव नियम 88 में है, जो राष्ट्रीय परमिट प्रणाली के अंतर्गत वाहनों की आयु सीमा निर्धारित करता है. मंत्रालय ने बैटरी से चलने वाले हाइड्रोजन ईंधन आधारित और सीएनजी से चलने वाले वाहनों के लिए इन सीमाओं को 5 साल तक बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है.
12 और 15 साल की सीमा बढ़कर हो सकती है 17 और 20 साल
यदि इसे अंतिम रूप दे दिया जाता है, तो मौजूदा 12 वर्ष और 15 वर्ष की सीमाएं प्रभावी रूप से क्रमशः 17 और 20 वर्ष हो जाएंगी. यह संशोधन सभी वाणिज्यिक वाहनों के लिए एक समान विस्तार नहीं है. यह विशेष रूप से नियम 88 के अंतर्गत आने वाले वाहनों पर लागू होता है. हालांकि अधिसूचना में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि संशोधन के बाद इन वाहनों की अधिकतम अनुमत आयु कितनी होगी. साथ ही प्रस्तावित विस्तार सभी वाणिज्यिक वाहनों पर लागू नहीं होगा और यह केवल कुछ वाहनों तक ही सीमित रहेगा.
यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है, जब सरकार वाणिज्यिक परिवहन में स्वच्छ वाहनों का उपयोग बढ़ाने का प्रयास कर रही है.
राष्ट्रीय परमिट की प्रक्रिया होगी डिजिटल
सरकार ने राष्ट्रीय परमिट प्रणाली को भी अधिक डिजिटल और सरल बनाने का प्रस्ताव रखा है. मसौदा नियमों के अनुसार, आवेदक अपनी सुविधा के अनुसार एक बार में अधिकतम पांच वर्ष की अवधि के लिए राष्ट्रीय परमिट प्राधिकरण प्राप्त कर सकेंगे. इसके लिए प्रति वर्ष 16,500 रुपए शुल्क निर्धारित किया गया है, जिसे राष्ट्रीय परमिट खाते में जमा करना होगा.
इसके अलावा, राष्ट्रीय परमिट के लिए फॉर्म-46 के माध्यम से आवेदन और फॉर्म-47 के तहत अनुमति प्रदान करने की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन करने का प्रस्ताव है. इससे परिवहन क्षेत्र में कागजी कार्यवाही कम होगी और प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी.
अस्थायी पंजीकरण के नियमों में भी बदलाव
मंत्रालय ने अस्थायी पंजीकरण से जुड़े नियमों में भी महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित किए हैं. यदि किसी वाहन का केवल चेसिस है और उस पर अभी बॉडी नहीं लगी है, तो उसका अस्थायी पंजीकरण जारी होने की तारीख से 6 महीने तक वैध रहेगा.
यदि 6 महीने के बाद भी बॉडी फिटमेंट का कार्य पूरा नहीं हो पाता है या किसी अन्य अनियंत्रित परिस्थितियों के कारण वाहन कार्यशाला में ही रहता है, तो संबंधित पंजीकरण प्राधिकरण इसकी वैधता को हर बार 30 दिनों के लिए बढ़ा सकेगा.
वहीं, ऐसे पूर्ण निर्मित वाहनों के लिए जिन्हें विशेष रूप से अनुकूलित बनाया जा रहा है या किसी अन्य राज्य में पंजीकरण कराया जाना है, उनके लिए अस्थायी पंजीकरण 45 दिनों तक वैध रहेगा.
ऑटो कंपोनेंट निर्माताओं के लिए भी प्रस्ताव
सरकार ऑटोमोबाइल उद्योग में अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) को बढ़ावा देने के लिए पात्र ऑटो कंपोनेंट निर्माताओं को भी ट्रेड सर्टिफिकेट से जुड़े प्रावधानों के दायरे में लाने की तैयारी कर रही है.
इसके तहत वही निर्माता पात्र होंगे जिन्हें वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) से मान्यता प्राप्त होगी और जो ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए नए उत्पादों के विकास में अनुसंधान एवं विकास कार्य कर रहे होंगे.
वाहन दस्तावेजों को और डिजिटल बनाने की तैयारी
मसौदा नियमों में वाहन संबंधी दस्तावेजों को और अधिक डिजिटल बनाने का भी प्रस्ताव है. इसके तहत डीलरशिप प्राधिकरण प्रमाणपत्र या वाहन पंजीकरण संख्या दर्ज करते ही आवश्यक जानकारी वाहन पोर्टल से स्वतः प्राप्त हो जाएगी.
संशोधित फॉर्म में डीलरों के लिए जीएसटी पंजीकरण संख्या, पैन, उद्यम आधार और कॉर्पोरेट आइडेंटिफिकेशन नंबर (सीआईएन) जैसी जानकारियां भी शामिल की जाएंगी.
वाहन मालिकों के लिए भी नए प्रावधान
वाहन मालिकों के लिए प्रस्तावित संशोधनों के तहत फॉर्म-20 में आधार से जुड़े मोबाइल नंबर का उल्लेख अनिवार्य किया जा सकता है. इसके अलावा, हायर-परचेज, लीज या हाइपोथेकेशन व्यवस्था से जुड़े दस्तावेजों में संबंधित एग्रीमेंट या लोन अकाउंट नंबर दर्ज करने का भी प्रावधान किया गया है.
सरकार ने फॉर्म-48 में भी बदलाव का प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत वाहन के वैध पंजीकरण, बीमा, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसी), फिटनेस सर्टिफिकेट, लंबित चालान और पहले प्राप्त किसी राष्ट्रीय परमिट से जुड़ी जानकारी दर्ज करना अनिवार्य होगा.
(DISCLAIMER: हेडिंग, समरी और सबहेड के अलावा, पूरी खबर IANS न्यूज फीड से ली गई है. न्यूजनेशन खबर में किए गए किसी भी डेटा और फैक्ट्स की पुष्टि नहीं करता है.)
इमरान खान को PAK सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, इलाज के लिए जेल से अस्पताल में शिफ्ट करने का आदेश
Imran Khan: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को पाक सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. दरअसल, पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को उनकी बिगड़ती सेहत को देखते हुए निजी अस्पताल में शिफ्ट करने का आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश उनकी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) पार्टी और परिवार की लंबे समय से चली आ रही मांग के जवाब में आया है, जिन्होंने आदिला जेल से आई उनकी नई मेडिकल रिपोर्टों का हवाला देते हुए चिंता जताई थी.
48 घंटों के भीतर अस्पताल में शिफ्ट करने का आदेश
पीटीआई प्रवक्ता नईम हैदर पंजुथा के मुताबिक, सर्वोच्च न्यायालय ने खान को 48 घंटों के भीतर शिफा इंटरनेशन अस्पताल में शिफ्ट करने और 16 सितंबर तक वहीं रहने का निर्देश दिया है. इसके साथ ही अदालत ने इमरान खान और उनके परिवार के सदस्यों के बीच साप्ताहिक मुलाकात करने का भी आदेश दिया है.
मेडिकल रिपोर्ट्स को मीडिया के साथ साझा न करने का आदेश
अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि खान के स्वास्थ्य की जांच के लिए एक चिकित्सा बोर्ड का गठन किया जाए, जिसमें पीटीआई नेता के निजी चिकित्सक और उनकी बहन डॉ. उजमा खान भी शामिल होंगी. हालांकि, अदालत ने खान के वकीलों और उनके परिवार को निर्देश दिया है कि वे उनकी मेडिकल रिपोर्टों को मीडिया के साथ साझा न करें और इस मुद्दे का राजनीतिकरण न करें.
पिछले तीन साल से जेल में बंद हैं इमरान खान
बता दें कि क्रिकेटर से राजनेता बने 73 वर्षीय इमरान खान अगस्त 2023 से रावलपिंडी की अडियाला जेल में बंद हैं. उन पर कई मामले दर्ज हैं, जिन्हें उनके अनुसार 2022 में सत्ता से बेदखल किए जाने के बाद राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया गया है.
इमरान खान के स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं
बता दें कि पिछले साल से ही इमरान खान के बेटे ने उनके बिगड़ते स्वास्थ्य को लेकर चिंता व्यक्त करते रहे हैं. उनके वकीलों का कहना है कि जेल में रहते हुए उनकी दाहिनी आंख की रोशनी काफी कम हो गई है. पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति आरिफ अल्वी समेत कई अन्य लोगों ने भी खान के स्वास्थ्य में गिरावट का जिक्र किया है. अल्वी के मुताबिक, पूर्व प्रधानमंत्री की मेडिकल रिपोर्ट चिंताजनक हैं, जिनमें उनकी घबराहट, धड़कन और हाई ब्लड प्रेशर की समस्या दिखाई देती है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में अल्वी ने कहा कि उन्होंने खान की मेडिकल रिपोर्ट देखी हैं, जो उन्हें "चिंताजनक" लगीं.
पूर्व राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने अपनी पोस्ट में लिखा, "मैंने कई विशेषज्ञों के साथ इन रिपोर्टों का अध्ययन किया है, और मैं इसे सरल भाषा में लिख रहा हूं ताकि हर पाकिस्तानी समझ सके कि वास्तव में क्या हो रहा है." उन्होंने आगे कहा कि खान की "चिंता और तनाव का स्तर", "दिल की धड़कन तेज होना" और "उच्च रक्तचाप" उन्हें सबसे ज्यादा चिंतित कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में अनिद्रा की बात नहीं है, लेकिन संभवतः यह उनके द्वारा ली जा रही दवाओं के कारण है.
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