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27 रुपये वाले शेयर को खरीदने की मची लूट, RBI के इस फैसले का असर

टाइगर लॉजिस्टिक्स (इंडिया) ने बताया था कि उसे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के फॉरेन एक्सचेंज डिपार्टमेंट से एक कंपाउंडिंग ऑर्डर मिला है। अब इसके शेयर डिमांड में आ गए हैं।

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India Ratings ने भारत की GDP growth का अनुमान बढ़ाकर 6.8 प्रतिशत किया

देश की आर्थिक वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष 2026-27 में 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है जो पिछले वित्त वर्ष में 7.6 प्रतिशत थी। इंडिया रेटिंग एंड रिसर्च (इंड-रा) ने पश्चिम एशिया संघर्ष से उत्पन्न अनिश्चितता, ईंधन एवं खाद्य महंगाई, कमजोर मुद्रा तथा कृषि पर अल नीनो के संभावित प्रभाव का हवाला देते हुए मंगलवार को भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर का अनुमान जारी किया। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 6.8 प्रतिशत का जीडीपी वृद्धि अनुमान मई में इंडिया रेटिंग्स के पहले लगाए गए 6.7 प्रतिशत के अनुमान से थोड़ा अधिक है।

इस महीने की शुरुआत में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था का हवाला देते हुए वृद्धि दर का अनुमान 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया था। घरेलू रेटिंग एजेंसी ने अब वित्त वर्ष 2026-27 में कच्चे तेल की औसत कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान लगाया है, जबकि मई, 2026 में उसने 95 डॉलर प्रति बैरल का अनुमान लगाया था। एजेंसी को वित्त वर्ष 2026-27 में रुपये-डॉलर विनिमय दर औसतन 93.98 रुपये रहने की उम्मीद है, जो मई, 2026 के 94.28 रुपये के अनुमान से कम है।

फिच समूह की अनुषंगी इंड-रा ने विदेशी मुद्रा प्रवासी (बैंक) (एफसीएनआर-बी) और विदेशी वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) के तहत 70 अरब डॉलर के पूंजी प्रवाह का अनुमान लगाया है। इंडिया रेटिंग्स ने बयान में कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में वित्त वर्ष 2025-26 की तुलना में जीडीपी वृद्धि में कमी पश्चिम एशिया संघर्ष से उत्पन्न अनिश्चितता, कमजोर मुद्रा और कृषि पर अल नीनो के संभावित प्रभाव से ईंधन तथा खाद्य महंगाई बढ़ने की वजह से होगी। एजेंसी ने अप्रैल-जून, जुलाई-सितंबर, अक्टूबर-दिसंबर और जनवरी-मार्च तिमाहियों के लिए जीडीपी वृद्धि दर क्रमशः 6.9, 6.6, 6.7 और 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है।

वहीं, आरबीआई ने इन तिमाहियों के लिए क्रमशः 7, 6.4, 6.5 और 6.8 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया है। इंड-रा के मुख्य अर्थशास्त्री एवं सार्वजनिक वित्त प्रमुख देवेंद्र पंत ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में भारत के आयातित कच्चे तेल की औसत कीमत 101.31 डॉलर प्रति बैरल और अप्रैल-जुलाई 2026 में 96.49 डॉलर प्रति बैरल रही। इंड-रा ने चालू वित्त वर्ष में खुदरा महंगाई औसतन 4.9 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में यह दो प्रतिशत थी।

चालू खाते का घाटा वित्त वर्ष 2025-26 के 0.6 प्रतिशत से बढ़कर जीडीपी के 1.5 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। पंत ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में राजकोषीय घाटे का 4.3 प्रतिशत का लक्ष्य एलपीजी और उर्वरक पर सब्सिडी के कारण चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। प्रत्यक्ष कर संग्रह और गैर-कर राजस्व से राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिल सकती है लेकिन अप्रत्यक्ष कर संग्रह चुनौती पैदा कर सकता है।

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  Sports

David Warner के बाद Australia की सलामी जोड़ी पर संकट, Matt Renshaw लौटे और Labuschagne के लिए बढ़ी मुश्किलें

ऑस्ट्रेलिया की टीम को बांग्लादेश के खिलाफ घरेलू मैदान पर मिली शर्मनाक हार के बाद चयनकर्ताओं ने बड़ा फैसला लिया है। डार्विन में खेले गए पहले टेस्ट के बाद जैक वेदराल्ड को टीम से बाहर कर दिया गया है। अब उनकी जगह मैट रेनशॉ को अगले टेस्ट के लिए शुरुआती बल्लेबाज के तौर पर मौका मिलने की उम्मीद है।

जैक वेदराल्ड के लिए डार्विन टेस्ट की शुरुआत बेहद खराब रही थी। पहली गेंद पर उन्होंने ऑफ स्टंप से काफी बाहर जाती गेंद पर गलत शॉट खेलने की कोशिश की। इसके बाद अगली गेंद भी ज्यादा प्रभावी नहीं रही। तीसरी गेंद पर उन्होंने ऑफ स्टंप के करीब आई गेंद को काटने की कोशिश की, लेकिन गेंद बल्ले से लगकर विकेटों पर जा लगी। इस तरह छह मिनट से भी कम समय में उनकी पारी खत्म हो गई।

वेदराल्ड के लिए यह मुकाबला खास था क्योंकि डार्विन को उनकी घरेलू वापसी के लिए सही मंच माना जा रहा था। लेकिन वह मौके का फायदा नहीं उठा सके। छह टेस्ट में उनके नाम केवल एक अर्धशतक है और उनका बल्लेबाजी औसत 20.36 रहा है। ऐसे प्रदर्शन के बाद बांग्लादेश के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया की हार ने उनकी स्थिति और कमजोर कर दी।

बता दें कि ऑस्ट्रेलिया ने बांग्लादेश के खिलाफ मुकाबले में अपने तेज गेंदबाजों के दम पर दबाव बनाने की कोशिश की थी, लेकिन बांग्लादेश के शीर्ष क्रम ने उन्हें काफी आसानी से खेला। इसी वजह से चयनकर्ताओं के सामने ऊपरी क्रम में बदलाव का दबाव बढ़ गया। माना जा रहा है कि अगर ऑस्ट्रेलिया डार्विन में हार से बच जाता तो वेदराल्ड को एक और मौका मिल सकता था।

अब मैट रेनशॉ के लिए वापसी का रास्ता खुल गया है। रेनशॉ ने पिछले घरेलू सत्र में क्वींसलैंड के लिए शानदार प्रदर्शन किया था। उन्होंने शेफील्ड शील्ड में 46.09 की औसत से रन बनाए और दो शतक भी लगाए। इससे पहले वह ऑस्ट्रेलिया की एशेज टीम में वेदराल्ड से पीछे रह गए थे।

गौरतलब है कि रेनशॉ ने अब तक 14 टेस्ट खेले हैं और उनकी पिछली तीन टेस्ट पारियां मध्यक्रम में आई थीं। उनका आखिरी टेस्ट मैच 2023 की शुरुआत में दिल्ली में हुआ था। अब मैके में उन्हें फिर से पारी की शुरुआत करने की जिम्मेदारी मिल सकती है। इससे पहले उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के जोहानिसबर्ग में भी सलामी बल्लेबाज की भूमिका निभाई थी।

वॉर्नर के संन्यास के बाद से ऑस्ट्रेलिया अब तक नौ अलग-अलग सलामी बल्लेबाज आजमा चुका है। ऐसे में रेनशॉ के लिए यह मौका बेहद अहम है। उनके मार्गदर्शक उस्मान ख्वाजा भी लंबे अंतराल के बाद टेस्ट टीम में लौटकर सफल रहे थे और रेनशॉ उनसे प्रेरणा ले सकते हैं।

दूसरी ओर, मार्नस लाबुशेन पर भी दबाव बढ़ गया है। कोच और चयनकर्ता एंड्रयू मैकडोनाल्ड ने उन्हें साफ संकेत दिया है कि टीम में जगह बनाए रखने के लिए उन्हें बड़ी पारियां खेलनी होंगी। डार्विन की दूसरी पारी में लाबुशेन ने 31 रन बनाए और तेज गेंदबाजों के खिलाफ उनका खेल बेहतर नजर आया, लेकिन मैकडोनाल्ड के मुताबिक यह पारी सिर्फ 31 रन तक ही सीमित रही।

लाबुशेन का टेस्ट औसत अब 44.16 तक गिर चुका है, जबकि एक समय उनका औसत 60 के आसपास था। तीन साल से टेस्ट शतक नहीं लगा पाने के कारण मैके में उनके प्रदर्शन पर खास नजर रहेगी। अगले टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया का लक्ष्य श्रृंखला बराबर करना होगा, क्योंकि घरेलू मैदान पर बांग्लादेश से श्रृंखला हारना टीम के लिए एक और बड़ा झटका साबित हो सकता है।
Tue, 18 Aug 2026 22:18:05 +0530

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